देशफीचर्ड

कश्मीर में तनाव: ईरानी नेता की हत्या के विरोध में प्रदर्शन हुए हिंसक, श्रीनगर में झड़पों के बीच 12 घायल, सुरक्षा बल अलर्ट

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की वादियों में सोमवार को उस समय तनाव व्याप्त हो गया, जब ईरानी नेता अयातुल्ला खामेनी की हत्या के विरोध में निकाले जा रहे मार्च ने हिंसक रूप ले लिया। राजधानी श्रीनगर सहित घाटी के कई संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। इन घटनाओं में पांच पुलिसकर्मियों समेत कुल 12 लोग घायल हो गए हैं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है और शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्देश दिए हैं।

लाल चौक बना संघर्ष का केंद्र, भारी पत्थरबाजी

सोमवार सुबह से ही घाटी के विभिन्न हिस्सों से प्रदर्शनकारी छोटे-छोटे समूहों में एकत्रित होने लगे। जैसे ही इन समूहों ने श्रीनगर के हृदय स्थल लाल चौक की ओर कूच करने का प्रयास किया, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर दी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोके जाने पर भीड़ उग्र हो गई और सुरक्षा बलों पर भारी पथराव शुरू कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया जब भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। ‘अल्लाह ओ अकबर, खामेनेई रहबर’ के नारों के बीच प्रदर्शनकारियों और अर्धसैनिक बलों के बीच घंटों तक आंख-मिचौली चलती रही।

पुलिस की कड़ी चेतावनी: ‘शांति मंजूर, दंगा नहीं’

घाटी में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस प्रवक्ता ने कहा:

“हम मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर नागरिकों की भावनाओं और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं। लेकिन कुछ स्थानों पर जिस तरह से दंगा, पत्थरबाजी और सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालने की कोशिश की गई है, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। कानून हाथ में लेने वाले उकसावेबाजों और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह के उकसावे में न आएं, क्योंकि ऐसी हिंसा से न केवल आम परिवारों की कठिनाइयां बढ़ती हैं, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों, व्यापारियों और छात्रों का भविष्य भी प्रभावित होता है।

घाटी में कड़े प्रतिबंध: स्कूल-कॉलेज और इंटरनेट बंद

अयातुल्ला खामेनी की मौत पर उमड़े शोक और आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने ऐहतियातन कई कड़े कदम उठाए हैं।

  • इंटरनेट सेवाएं: अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है।

  • शिक्षण संस्थान: घाटी के सभी स्कूल और कॉलेजों को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है।

  • लाल चौक सील: रविवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बाद सोमवार को प्रशासन ने लाल चौक और उसके आसपास के रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया है। भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।

क्यों उबल रही है कश्मीर घाटी?

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी नेता अयातुल्ला खामेनी की हत्या ने कश्मीर के एक विशेष वर्ग में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। रविवार को प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे थे और प्रशासन ने भी नरमी दिखाई थी। लेकिन सोमवार को जैसे ही बड़े मार्च की घोषणा हुई, प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगा दिए, जिससे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच आमना-सामना हो गया।

व्यापार और जनजीवन पर प्रभाव

हिंसा और प्रतिबंधों का सीधा असर कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। लाल चौक और मैसूमा जैसे व्यापारिक केंद्रों के बंद होने से करोड़ों रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ है। पर्यटन पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बार-बार लगने वाले प्रतिबंधों से उनकी कमर टूट रही है, लेकिन धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था के पेचीदा समीकरणों के बीच फिलहाल राहत की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

भविष्य की रणनीति और सुरक्षा समीक्षा

मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि आने वाले शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन फिर से भड़क सकते हैं। इसके लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त टुकड़ियों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। पुलिस अब उन वीडियो फुटेज की जांच कर रही है जिसमें पत्थरबाजों और उकसाने वालों की पहचान की जा सके।


कश्मीर में वर्तमान स्थिति ‘प्रतीक्षा करो और देखो’ (Wait and Watch) वाली बनी हुई है। अयातुल्ला खामेनी की हत्या का मुद्दा स्थानीय राजनीति और धार्मिक संवेदनाओं से जुड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन आने वाले दिनों में जनता के गुस्से को शांत करने और घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने में कितना सफल हो पाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button