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विपक्ष पर चिल्ला-चिल्लाकर मेरा गला बैठ गया” – केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद गतिरोध पर साधा निशाना

रिजिजू बोले – संसद विपक्ष की होती है, सरकार जवाब देने के लिए तैयार; कांग्रेस पर लगाया बहस से भागने का आरोप, कहा-“अगर संसद नहीं चलेगी तो नुकसान विपक्ष का है, सरकार राष्ट्रहित में विधेयक पारित करेगी”

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025: संसद के मौजूदा मानसून सत्र में लगातार जारी हंगामे और गतिरोध पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। रिजिजू ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष से बहस की अपील करते-करते उनकी आवाज़ ही बैठ गई है। उन्होंने साफ कहा कि संसद लोकतंत्र की आत्मा है और इसमें सरकार से ज्यादा जिम्मेदारी विपक्ष की होती है।


“संसद विपक्ष की होती है, सरकार तो जवाब देने के लिए तैयार”

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा,

“मेरा गला भी बैठ गया देखो। विपक्ष को चिल्ला-चिल्लाकर मैं अनुरोध करता हूं कि बहस होने दीजिए। संसदीय लोकतंत्र में संसद विपक्ष की होती है। सरकार जवाब देने के लिए जिम्मेदार होती है। विपक्ष को सवाल पूछने ही होंगे। अगर सवाल पूछने वाले ही भाग जाएं तो सरकार क्या करेगी?”

उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह बहस और चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार हंगामे पर उतारू है।


कांग्रेस पर लगाया बहस से भागने का आरोप

रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस को संसदीय चर्चाओं में कोई रुचि नहीं है। उनके मुताबिक,

“कांग्रेस और अन्य दलों के कई सांसद मेरे पास आए और कहा कि संसद नहीं चलने के कारण वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों की चिंताओं को प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं। कांग्रेस बहस और चर्चा से भाग रही है, उन्हें लोकतांत्रिक परंपराओं में कोई विश्वास नहीं है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का रवैया न केवल संसद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और जनता की अपेक्षाओं के साथ भी खिलवाड़ है।


“अगर संसद नहीं चलेगी तो नुकसान विपक्ष का है”

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि संसद न चलने की सबसे बड़ी कीमत विपक्ष को चुकानी होगी। उन्होंने कहा,

“अगर संसद नहीं चलती है तो नुकसान विपक्ष का है। सरकार राष्ट्रहित में विधेयक पारित करेगी। लेकिन अगर विधेयक बिना चर्चा के पारित हो जाते हैं तो यह अच्छा नहीं है। हम चर्चा में विश्वास करते हैं। नुकसान उनका है जिन्हें सवाल पूछने हैं।”


विधेयकों के पारित होने पर उठाया सवाल

रिजिजू ने यह स्वीकार किया कि अगर संसद में विधेयक बिना चर्चा के पारित होते हैं, तो यह लोकतांत्रिक परंपरा के लिए सही नहीं है। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि सरकार किसी भी सूरत में राष्ट्रहित से जुड़े विधेयकों को रोकने वाली नहीं है।


संसद का गतिरोध और राजनीतिक असर

गौरतलब है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की कोशिश में हंगामा कर रहे हैं। कई अहम विधेयक लंबित पड़े हैं और विपक्ष चर्चा की बजाय नारेबाजी और वाकआउट का रास्ता अपना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिरोध जारी रहता है तो एक तरफ सरकार विपक्ष की “नकारात्मक राजनीति” का आरोप लगाकर सियासी लाभ ले सकती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष जनता के बीच यह मुद्दा उठा सकता है कि सरकार “सहमति की बजाय बहुमत के बल पर विधेयक पारित कर रही है।”

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का बयान यह स्पष्ट करता है कि संसद में गतिरोध ने सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच टकराव को और गहरा कर दिया है। जहां सरकार खुद को बहस और चर्चा के लिए तैयार दिखा रही है, वहीं विपक्ष अपने विरोध को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह आक्रामक रूप से पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संसद का गतिरोध टूटेगा या फिर यह विवाद राजनीतिक लाभ-हानि की जंग में बदल जाएगा।

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