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देहरादून: ‘नंदा-सुनंदा’ प्रोजेक्ट से संवर रहा बेटियों का कल, DM सविन बंसल ने संघर्षों के बीच जलाए रखी शिक्षा की ‘स्पार्क’

देहरादून (09 जनवरी 2026): कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और इरादे नेक, तो परिस्थितियों की दीवारें भी रास्ता छोड़ देती हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहाँ जिलाधिकारी सविन बंसल (DM Savin Bansal) विषम परिस्थितियों की मार झेल रही होनहार बेटियों के लिए ‘मसीहा’ बनकर उभरे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ (Project Nanda-Sunanda) और CSR फंड के जरिए दो ऐसी बेटियों की शिक्षा को नया जीवन दिया है, जिनकी पढ़ाई पर आर्थिक तंगी के बादल मंडरा रहे थे।

जीविका अंथवाल: पिता ICU में, फिर भी नहीं डिगा CA बनने का संकल्प

देहरादून की जीविका अंथवाल, जो बी.कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं, उनकी कहानी संघर्ष की एक मिसाल है। जीविका के पिता गंभीर लीवर रोग के कारण लंबे समय से आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं। घर की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी उनकी माता के कंधों पर है।

प्रशासन की मदद:

  • जीविका की माता की गुहार पर डीएम सविन बंसल ने त्वरित कार्रवाई की।

  • सीएसआर (CSR) फंड से जीविका के खाते में 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता हस्तांतरित की गई।

  • सीए (Chartered Accountant) की पढ़ाई सुचारू रूप से करने के लिए राइफल फंड से एक आधुनिक लैपटॉप उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

नन्दिनी राजपूत: आंगनवाड़ी कार्यकर्ती की बेटी अब नीट (NEET) की राह पर

11वीं की छात्रा नन्दिनी राजपूत की आँखों में डॉक्टर बनने का सपना है, लेकिन 2018 में पिता के निधन के बाद यह राह मुश्किल हो गई थी। उनकी माता आंगनवाड़ी कार्यकर्ती हैं और सिलाई कर तीन बेटियों को पढ़ा रही हैं।

जिला प्रशासन का संबल:

  • डीएम ने नन्दिनी की लगन को देखते हुए उनके बैंक खाते में भी 1 लाख रुपये की सहायता राशि भेजी है।

  • यह राशि नन्दिनी को नीट (NEET) की तैयारी करने और कोचिंग सामग्री खरीदने में मदद करेगी।


क्या है प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’? (Project Nanda-Sunanda Highlights)

जिलाधिकारी सविन बंसल की यह महत्वाकांक्षी पहल उन बेटियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए है जो पारिवारिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी थीं या छोड़ने की कगार पर थीं।

बिंदु विवरण
लक्ष्य ड्रॉपआउट को रोकना और उच्च शिक्षा को पुनर्जीवित करना।
सहायता स्त्रोत CSR फंड, राइफल फंड और सरकारी योजनाएं।
पात्रता विषम परिस्थितियों से जूझ रही होनहार बेटियां।
मुख्य सहयोग लैपटॉप, नगद आर्थिक सहायता और काउंसलिंग।

DM सविन बंसल का संदेश: ‘शिक्षा की स्पार्क कभी न बुझने दें’

बेटियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल फंड देना नहीं, बल्कि पात्र और जरूरतमंदों के सपनों को ढाल देना है।

“शिक्षा की स्पार्क को कभी बुझने न दें। परिस्थितियों की मार झेल रहे परिवारों की होनहार बेटियों की शिक्षा को जीवित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपने हौसले और आत्मविश्वास को बनाए रखें, प्रशासन हर कदम पर आपके साथ खड़ा है।”

उन्होंने इस सफल अभियान के लिए उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार और जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट की टीम की सराहना की।

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