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Bangladesh Election 2026: ‘नए बांग्लादेश’ की नींव रखने के लिए मतदान शुरू; हसीना के बिना पहली बार वोट डाल रहे 12.7 करोड़ मतदाता

The Hill India News
Last updated: February 12, 2026 2:19 am
The Hill India News
Published: February 12, 2026
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ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के इतिहास में आज का दिन (12 फरवरी 2026) सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। साल 2024 की ‘छात्र क्रांति’ और शेख हसीना के 15 साल पुराने शासन के पतन के बाद, देश अपनी पहली लोकतांत्रिक परीक्षा से गुजर रहा है। 13वें संसदीय चुनाव के लिए आज सुबह स्थानीय समयानुसार 07:30 बजे (भारतीय समय सुबह 7:00 बजे) से मतदान शुरू हो गया है।

Contents
सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा: 9 लाख जवान तैनातजनमत संग्रह (Referendum): सिर्फ नेता नहीं, संविधान भी चुन रही जनताराजनीतिक परिदृश्य: आवामी लीग ‘आउट’, तारिक रहमान ‘इन’भारत के लिए क्या हैं मायने?प्रमुख सांख्यिकी: एक नजर मेंलोकतंत्र की नई सुबह या अनिश्चितता का दौर?

मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की देखरेख में हो रहे इस चुनाव को दुनिया ‘जीन-जेड (Gen-Z) चुनाव’ के रूप में देख रही है। बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों में से फिलहाल 299 सीटों पर मतदान हो रहा है, क्योंकि शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार के निधन के कारण वोटिंग स्थगित कर दी गई है।

सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा: 9 लाख जवान तैनात

चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे बांग्लादेश को एक ‘सुरक्षा कवच’ में तब्दील कर दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन के अनुसार, लगभग 9 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। आधे से अधिक पोलिंग स्टेशनों को ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी में रखा गया है, जहाँ सीसीटीवी कैमरों से पल-पल की निगरानी की जा रही है।

शाम 4:30 बजे तक चलने वाले इस मतदान के तुरंत बाद शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी। माना जा रहा है कि शुक्रवार सुबह तक देश की नई दिशा की तस्वीर साफ हो जाएगी।


जनमत संग्रह (Referendum): सिर्फ नेता नहीं, संविधान भी चुन रही जनता

इस चुनाव की सबसे अनोखी बात यह है कि मतदाता न केवल अपने प्रतिनिधि चुन रहे हैं, बल्कि एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह (Referendum) में भी हिस्सा ले रहे हैं। 84-पॉइंट के इस सुधार पैकेज (जुलाई चार्टर) के जरिए बांग्लादेश के संविधान में व्यापक बदलावों की तैयारी है। इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, उच्च सदन (Upper House) का गठन और चुनाव आयोग की स्वायत्तता जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं।


राजनीतिक परिदृश्य: आवामी लीग ‘आउट’, तारिक रहमान ‘इन’

यह बांग्लादेश के चुनावी इतिहास में पहली बार है कि ‘आवामी लीग’ जैसी विशाल पार्टी चुनावी मैदान से पूरी तरह गायब है। शेख हसीना पर हत्याओं और दमन के आरोपों के बाद उनकी पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया गया था। ऐसे में मुकाबला अब त्रिकोणीय न रहकर मुख्य रूप से दो ध्रुवों के बीच सिमट गया है:

  1. BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी): पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद वतन लौटे हैं और प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। उन्होंने ‘स्वच्छ राजनीति’ और रोजगार का वादा किया है।

  2. जमात-ए-इस्लामी गठबंधन: 11 पार्टियों का यह गठबंधन BNP को कड़ी टक्कर दे रहा है। सर्वे रिपोर्टों के अनुसार, युवाओं और शिक्षित वर्ग के बीच जमात की लोकप्रियता में इजाफा देखा गया है।


भारत के लिए क्या हैं मायने?

शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में एक ‘ठिठुरन’ देखी गई थी। दिल्ली की नजरें इस चुनाव पर टिकी हैं, क्योंकि BNP और जमात-ए-इस्लामी का सत्ता में आना दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। तारिक रहमान ने हालांकि अपने घोषणापत्र में पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंधों की बात की है, लेकिन ‘बॉर्डर किलिंग’ जैसे मुद्दों पर उनका कड़ा रुख चिंता का विषय हो सकता है।

प्रमुख सांख्यिकी: एक नजर में

  • कुल पंजीकृत मतदाता: 12.77 करोड़

  • कुल उम्मीदवार: 1,755 (50 राजनीतिक दलों से)

  • निर्दलीय उम्मीदवार: 273

  • पोलिंग सेंटर: 42,761

  • युवा मतदाता (18-37 वर्ष): लगभग 44% (जो निर्णायक साबित होंगे)

लोकतंत्र की नई सुबह या अनिश्चितता का दौर?

मोहम्मद यूनुस ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में जनता से निर्भीक होकर मतदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “यह चुनाव उन शहीदों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने लोकतंत्र के लिए अपनी जान दी।” बांग्लादेश चुनाव 2026 केवल एक सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उस ‘सिस्टम रिबूट’ की पुष्टि है जिसकी मांग ढाका की सड़कों पर छात्रों ने की थी। क्या तारिक रहमान ‘किंग’ बनकर उभरेंगे या जमात-ए-इस्लामी कोई बड़ा उलटफेर करेगी? इसका फैसला आज शाम से आने वाले रुझानों में छिपा है।

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