
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिसका असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक की तेजी के साथ 75,890 के स्तर को पार कर गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 23,850 के ऊपर पहुंच गया। बाजार की इस मजबूत शुरुआत ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी।
शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स लगभग 627 अंक चढ़कर 75,945 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी करीब 200 अंकों की तेजी के साथ 23,859 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है।
BSE Sensex और NIFTY 50 में आई इस तेजी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर निवेशकों की चिंताओं में कमी और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी मानी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं ने पश्चिम एशिया में तनाव को कुछ हद तक कम किया है, जिससे वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना।
सेक्टोरल स्तर पर रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स करीब 1.5 प्रतिशत तक उछल गया। इसके अलावा सीमेंट, केमिकल, ऑटो, मीडिया, PSU बैंक और मेटल सेक्टर में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी शानदार प्रदर्शन किया और कई शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की यह तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी मजबूती दिखाई दी। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस लौट रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अभी भी “Buy on Dips” रणनीति अपना रहे हैं, यानी बाजार में गिरावट आने पर खरीदारी की जा रही है।
बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया VIX भी करीब 4 प्रतिशत गिरकर 18 के आसपास पहुंच गया। इंडिया VIX में गिरावट को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि इससे यह पता चलता है कि निवेशकों में घबराहट कम हो रही है और बाजार में स्थिरता बढ़ रही है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार के लिए अहम मानी जा रही हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में AI-आधारित शेयरों का वैल्यूएशन काफी बढ़ चुका है, जिसके चलते विदेशी निवेशकों का ध्यान अब भारत की ओर बढ़ सकता है। भारत में कई सेक्टर्स अभी भी बेहतर वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं, जो विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकते हैं।
ग्लोबल मार्केट से भी भारतीय बाजार को मजबूत समर्थन मिला। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का KOSPI और हांगकांग का हैंगसेंग जैसे प्रमुख एशियाई बाजार हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इससे एशियाई बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रहा, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
करेंसी मार्केट में भी भारतीय रुपये ने मजबूती दिखाई। डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 55 पैसे मजबूत होकर 96.28 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 96.83 पर बंद हुआ था। रुपये में मजबूती को भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दी है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनियों के प्रदर्शन पर ईंधन कीमतों का प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी तक चौथी तिमाही के नतीजे अपेक्षाकृत मजबूत रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार में आई यह तेजी निवेशकों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। वैश्विक संकेतों में सुधार, विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी और घरेलू बाजार में मजबूत सेंटीमेंट ने बाजार को नई ऊर्जा दी है। अब निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह पर बनी रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।



