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देशफीचर्ड

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खूंखार और रेबीज संक्रमित कुत्तों को दयामृत्यु देने की अनुमति

The Hill India News
Last updated: May 19, 2026 7:19 am
The Hill India News
Published: May 19, 2026
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के मामलों और लोगों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे आवारा कुत्ते जो रेबीज से संक्रमित हों, लाइलाज बीमारी से पीड़ित हों या अत्यधिक आक्रामक एवं खूंखार व्यवहार करते हों, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत दयामृत्यु (यूथेनेशिया) दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है तथा ऐसे मामलों में उचित और कानूनी कदम उठाना आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या को केवल पकड़कर हटाने से हल नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करनी होगी। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम को मजबूत करें। इसके अंतर्गत बड़े स्तर पर आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और इलाज की व्यवस्था की जाएगी ताकि उनकी संख्या नियंत्रित की जा सके और रेबीज जैसी बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।

अदालत ने कहा कि हर जिले में आधुनिक एबीसी सेंटर स्थापित किए जाएं, जहां नसबंदी, वैक्सीनेशन और पशु चिकित्सा से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध हों। इन केंद्रों की संख्या संबंधित जिले की आबादी और जरूरत के आधार पर तय की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, खेल परिसर, न्यायालय परिसर और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाए ताकि वहां लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य और स्वस्थ आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी स्थान पर छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था। हालांकि, जो कुत्ते अत्यधिक आक्रामक, रेबीज संक्रमित या गंभीर बीमारी से पीड़ित पाए जाएं, उन्हें खुले में नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे कुत्तों को शेल्टर होम, पाउंड या विशेष देखरेख केंद्रों में रखा जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि किसी कुत्ते की स्थिति बेहद गंभीर हो और उससे लोगों की जान को खतरा हो, तो पशु चिकित्सकों की सलाह और कानूनी प्रक्रिया के तहत दयामृत्यु दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि वे आवारा कुत्तों को लेकर एक स्पष्ट नीति बनाएं और उसे सख्ती से लागू करें। अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को भोजन खिलाने को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सड़कों, गलियों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों को खाना खिलाने से कई बार लोगों की सुरक्षा प्रभावित होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। इसलिए हर नगर निगम वार्ड में अलग से फीडिंग जोन बनाए जाएं, जहां निर्धारित व्यवस्था के तहत कुत्तों को भोजन दिया जा सके। इन स्थानों पर सूचना बोर्ड और आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।

इसके अलावा नेशनल हाइवेज़ अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया  को निर्देश दिया गया है कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं और कुत्तों को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। अदालत ने कहा कि हाईवे पर आवारा पशुओं की मौजूदगी कई बार गंभीर सड़क हादसों का कारण बनती है, इसलिए इस दिशा में तत्काल प्रभाव से कदम उठाए जाने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि कुत्तों के काटने के मामलों में तुरंत इलाज मिल सके। अदालत ने पशु कल्याण संगठनों, स्थानीय निकायों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आवारा कुत्तों की समस्या और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एक ओर अदालत ने पशु संरक्षण और कल्याण की बात कही है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यों और स्थानीय प्रशासन द्वारा इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो भविष्य में आवारा कुत्तों से जुड़ी घटनाओं और रेबीज के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।

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