By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा मामले में केजरीवाल, सिसोदिया समेत कई आप नेताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय का नोटिस, सामाजिक माध्यम अभियान पर बढ़ा विवाद
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > दिल्ली > जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा मामले में केजरीवाल, सिसोदिया समेत कई आप नेताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय का नोटिस, सामाजिक माध्यम अभियान पर बढ़ा विवाद
दिल्लीफीचर्ड

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा मामले में केजरीवाल, सिसोदिया समेत कई आप नेताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय का नोटिस, सामाजिक माध्यम अभियान पर बढ़ा विवाद

The Hill India News
Last updated: May 19, 2026 7:40 am
The Hill India News
Published: May 19, 2026
Share
SHARE

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को बड़ा झटका देते हुए नोटिस जारी किया है। यह मामला शराब नीति प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायपालिका के खिलाफ कथित रूप से चलाए गए सामाजिक माध्यम अभियान से जुड़ा हुआ है। अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह  समेत कई नेताओं से जवाब मांगा है।

दरअसल पूरा मामला दिल्ली शराब नीति प्रकरण की सुनवाई से जुड़ा हुआ है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा  कर रही थीं। आरोप है कि सुनवाई के दौरान कुछ आप नेताओं और समर्थकों ने सामाजिक माध्यम मंचों पर न्यायाधीश के खिलाफ टिप्पणियां कीं और अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। अदालत का मानना है कि यह केवल सामान्य राजनीतिक बयानबाजी नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित सामाजिक माध्यम अभियान की तरह चलाया गया मामला था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मौखिक रूप से फैसला सुनाते हुए कहा कि सामाजिक माध्यम पोस्ट, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और विभिन्न मंचों पर प्रकाशित सामग्री को रिकॉर्ड का हिस्सा माना जाएगा। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इन सभी सामग्रियों की प्रतियां सुरक्षित रखी जाएं और उन्हें आगे की सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। न्यायालय का कहना है कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री गंभीर प्रकृति की दिखाई देती है और इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को इस प्रकरण की सुनवाई से अलग कर लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह फैसला किसी दबाव या स्वयं को मामले से अलग करने की मांग के कारण नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि उन्होंने अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है, इसलिए उचित यही होगा कि शराब नीति से जुड़े मामलों की सुनवाई अब दूसरी पीठ करे।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपने आदेश में कहा था कि कुछ नेताओं द्वारा केवल बयानबाजी ही नहीं की गई, बल्कि सामाजिक माध्यम के माध्यम से उनके खिलाफ अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश की निष्पक्षता पर बिना किसी ठोस आधार के सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक नेता को यह अधिकार नहीं है कि वह खुले मंच से यह कहे कि अदालत निष्पक्ष फैसला नहीं दे सकती।

न्यायालय ने यह भी कहा कि मामले में केवल एक-दो सामाजिक माध्यम पोस्ट नहीं हैं, बल्कि लगातार कई पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक टिप्पणियां सामने आई हैं। अदालत ने दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज  और अन्य नेताओं की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। विशेष रूप से उस वीडियो का जिक्र किया गया, जिसमें न्यायाधीश और एक राजनीतिक दल के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने माना कि इस प्रकार की टिप्पणियां न्यायपालिका की निष्पक्षता को प्रभावित करने का प्रयास मानी जा सकती हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यदि अदालतों और न्यायाधीशों के खिलाफ इस प्रकार के सार्वजनिक अभियान को अनियंत्रित छोड़ दिया गया, तो इससे न्याय व्यवस्था पर आम लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि यह मामला आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की पीठ करेगी। अदालत ने यह भी कहा है कि इस मामले में एक न्यायालय मित्र की नियुक्ति की जाएगी, जो अदालत की सहायता करेगा। न्यायालय मित्र की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी लिखित आदेश में सामने आएगी।

इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे न्यायपालिका की गरिमा और सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बता रहे हैं। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन न्यायपालिका के खिलाफ बिना प्रमाण आरोप लगाना और सामाजिक माध्यम के जरिए माहौल बनाना बेहद गंभीर विषय है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस प्रकार की गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनता का भरोसा दोनों प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि दिल्ली उच्च न्यायालय इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रहा है और आगे की सुनवाई में कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो सकती है।

You Might Also Like

Israel Hezbollah War: हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर किया पलटवार, कर दी भयंकर मिसाइलों की बौछार
Breaking…. उत्तराखंड शासन में हुआ फेरबदल, इस आईएएस को दिया ये पदभार
जनमानस की सुरक्षा सर्वोपरि: सेफ्टी ऑडिट के बाद ही शुरू हुआ देहरादून-मसूरी आवागमन
87.50 करोड़ की वसूली पर प्रशासन का बड़ा प्रहार: सुभारती समूह पर कुर्की की कार्रवाई शुरू, डीएम का सख्त संदेश
मसूरी-देहरादून मार्ग पर वैली ब्रिज का लोकार्पण, ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत
TAGGED:AAPArvind kejriwalDelhi High CourtJustice Swarna Kanta SharmaManish SisodiaSanjay Singh
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

बिहार में शिक्षक भर्ती का इंतजार खत्म! BPSC ने जारी किया TRE-4 नोटिफिकेशन, 32,388 पदों पर बंपर भर्ती

The Hill India News
The Hill India News
August 18, 2026
पीपलकोटी टनल हादसे में खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, सभी 10 लापता मजदूरों के शव बरामद; 12 घायल अस्पताल में भर्ती
‘आरक्षण के लिए भाजपा के साथ आए थे, अब तक लागू क्यों नहीं किया?’ यूपी चुनाव से पहले संजय निषाद के तीखे तेवर, बोले- निषाद समाज अपना हक मांग रहा है
राजपाल यादव की लगी ‘लॉटरी’! 1200 करोड़ की 12 फिल्मों की डील साइन, 10 साल तक बड़े पर्दे पर छाएंगे कॉमेडी के किंग
‘गांधी, नेहरू और पटेल पर भी FIR करिए’, वंदे मातरम विवाद पर खरगे का भाजपा को करारा जवाब
पान मसाला ऐड पर सनी देओल का बयान और वायरल हुआ पुराना विज्ञापन, बोले- ‘मेरा जमीर गवाही नहीं देता’
इमरान खान को जेल से अस्पताल शिफ्ट करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 48 घंटे में होगा ट्रांसफर; परिवार से हर हफ्ते मुलाकात की भी मंजूरी
देहरादून में कल से बदलेगा ट्रैफिक का पूरा रूट! उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर 19-20 अगस्त तक डायवर्जन, घर से निकलने से पहले देखें पूरा प्लान
पंजाब में अनोखा लंगर! अब पूड़ी-सब्जी नहीं, मुफ्त में मिलेगा पेट्रोल; दोपहिया को ₹500 और कार वालों को ₹1,000 का तेल
1.20 करोड़ के लालच में खौफनाक कत्ल! YouTube के झूठे दावे पर नाबालिग की हत्या, शरीर का हिस्सा लेकर 3 दिन तक भटकते रहे आरोपी
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?