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छोटे सैलून संचालक को ₹72 लाख का GST नोटिस, बैंक खाता फ्रीज — पहचान के दुरुपयोग का बड़ा मामला आया सामने

The Hill India News
Last updated: April 9, 2026 8:25 am
The Hill India News
Published: April 9, 2026
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विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक छोटे सैलून चलाकर गुजर-बसर करने वाले व्यक्ति को ₹72 लाख का जीएसटी (GST) नोटिस थमा दिया गया। इतना ही नहीं, जीएसटी विभाग की कार्रवाई के चलते उनका बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पहचान चोरी (Identity Theft) और दस्तावेजों के दुरुपयोग के गंभीर खतरे को भी उजागर कर दिया है।

पीड़ित की पहचान श्रीनिवास राव के रूप में हुई है, जो पिछले करीब 40 वर्षों से विजयवाड़ा के पंजा सेंटर इलाके में एक छोटी सी नाई की दुकान (सैलून) चलाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी कोई बड़ा व्यापार नहीं किया और न ही उन्होंने कभी जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया। इसके बावजूद उनके नाम पर करोड़ों के कारोबार का रिकॉर्ड दिखाया जा रहा है और लाखों रुपये के टैक्स बकाया की मांग की जा रही है।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब मई 2021 में श्रीनिवास राव एक सरकारी वेलफेयर योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय वार्ड सचिवालय पहुंचे। वहां उनके दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की गई, जिसमें यह सामने आया कि वे विशाखापत्तनम में एक बड़े व्यवसाय के मालिक हैं और नियमित रूप से जीएसटी का भुगतान कर रहे हैं। इस जानकारी से वे खुद हैरान रह गए, क्योंकि उन्होंने ऐसा कोई व्यापार कभी किया ही नहीं।

इसके बाद उन्होंने तुरंत जीएसटी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उनके नाम से कोई व्यापार नहीं है और न ही उन्होंने कभी जीएसटी के लिए आवेदन किया है। लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और उनकी समस्या जस की तस बनी रही।

साल 2022 में उन्हें एक बार फिर जीएसटी बकाया का नोटिस मिला, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गईं। उन्होंने फिर से अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने विजयवाड़ा टू टाउन पुलिस स्टेशन और सिटी पुलिस कमिश्नर के कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई।

मामला यहीं नहीं रुका। इस साल फरवरी में श्रीनिवास राव को सूचना मिली कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र में उनका खाता फ्रीज कर दिया गया है। जब उन्होंने बैंक जाकर इसकी जानकारी ली, तो पता चला कि यह कार्रवाई जीएसटी विभाग के निर्देश पर की गई है। इसके बाद उन्हें ₹72 लाख के जीएसटी बकाया का नोटिस भी सौंपा गया, जिसने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया।

प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने श्रीनिवास राव के आधार और पैन कार्ड की जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हुए उनके नाम पर फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद उस फर्जी पहचान के जरिए विशाखापत्तनम में बड़े स्तर पर व्यापार किया गया और टैक्स चोरी की गई। जब मामला सामने आने का खतरा हुआ, तो आरोपी फरार हो गया और पूरा बोझ निर्दोष श्रीनिवास राव पर आ गया।

यह घटना देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और पहचान चोरी के मामलों की गंभीरता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधार और पैन जैसी संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा बेहद जरूरी है, क्योंकि इनके दुरुपयोग से निर्दोष लोगों को भारी आर्थिक और कानूनी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

फिलहाल श्रीनिवास राव न्याय की गुहार लगा रहे हैं और संबंधित विभागों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाए और एक निर्दोष व्यक्ति को राहत दिलाए। साथ ही, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत सिस्टम और जागरूकता की भी सख्त जरूरत है।

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