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24 अप्रैल को बिहार विधानसभा में सम्राट चौधरी सरकार का शक्ति परीक्षण, विश्वास मत पर टिकी सियासी नजरें

The Hill India News
Last updated: April 18, 2026 11:12 am
The Hill India News
Published: April 18, 2026
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पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर अहम मोड़ पर खड़ी है, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार 24 अप्रैल को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने जा रही है। संवैधानिक परंपराओं के तहत किसी भी नए मुख्यमंत्री के लिए यह आवश्यक होता है कि वह सदन में विश्वास मत हासिल कर यह साबित करें कि उनके पास विधायकों का पर्याप्त समर्थन है। इसी क्रम में 18वीं बिहार विधानसभा का दूसरा सत्र 24 अप्रैल से शुरू होगा और पहले ही दिन सरकार विश्वास प्रस्ताव पेश करेगी।

हाल ही में राज्य की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए रवाना हो गए। उनके इस निर्णय के बाद बिहार की कमान सम्राट चौधरी को सौंपी गई। इस बदलाव ने न केवल राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है, बल्कि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए नई रणनीतियों का मार्ग भी प्रशस्त किया है। ऐसे में 24 अप्रैल को होने वाला विश्वास मत केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की मौजूदा राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

बिहार विधानसभा में होने वाले इस शक्ति परीक्षण को लेकर सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष जहां अपनी संख्या बल को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है, वहीं विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। इस सत्र के दौरान बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज रहने की संभावना है।

नई सरकार के गठन के बाद अभी तक मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार नहीं हो पाया है, जो राजनीतिक चर्चाओं का एक प्रमुख विषय बना हुआ है। फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ केवल दो उपमुख्यमंत्री—विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव—ने शपथ ली है। सरकार के पूर्ण स्वरूप को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में देरी का एक बड़ा कारण अन्य राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव हैं। पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया जारी है, जिनके परिणाम 4 मई को घोषित होने हैं। बिहार भाजपा के कई वरिष्ठ नेता इन चुनावों में व्यस्त हैं, जिसके चलते मंत्रियों के नामों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। यही वजह है कि कैबिनेट विस्तार फिलहाल टलता नजर आ रहा है।

हालांकि विभागों का प्रारंभिक बंटवारा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह विभाग सहित कुल 29 अहम विभाग हैं। इनमें पथ निर्माण, राजस्व, स्वास्थ्य, विधि, उद्योग, पर्यटन, आपदा प्रबंधन, कला-संस्कृति, सहकारिता, पर्यावरण और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर विभागों की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास होना प्रशासनिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विश्वास मत हासिल करना सरकार के लिए पहली बड़ी परीक्षा होगी। यदि सरकार बहुमत साबित कर लेती है, तो इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक फैसलों की प्रक्रिया तेज हो सकती है। वहीं, यदि किसी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता सामने आती है, तो राज्य की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

विपक्षी दलों की नजर भी इस शक्ति परीक्षण पर टिकी हुई है। वे सरकार की नीतियों और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने की तैयारी में हैं। साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या सभी विधायक पार्टी लाइन के अनुसार मतदान करते हैं या किसी प्रकार की क्रॉस-वोटिंग सामने आती है।

कुल मिलाकर, 24 अप्रैल का दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। यह न केवल सम्राट चौधरी सरकार के भविष्य को तय करेगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिरता और आगामी रणनीतियों की दिशा भी निर्धारित करेगा। अब सभी की निगाहें विधानसभा सत्र और विश्वास मत के परिणाम पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में बिहार की सियासत की तस्वीर साफ करेगा।

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