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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी तेज, TMC ने फिर दिया नोटिस, 9 आरोपों से बढ़ा राजनीतिक तापमान

The Hill India News
Last updated: April 24, 2026 11:07 am
The Hill India News
Published: April 24, 2026
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देश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जब ज्ञानेश कुमार (मुख्य चुनाव आयुक्त) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने नया नोटिस जारी किया है। यह नोटिस राज्यसभा सचिवालय में सौंपा गया है और इसमें कुल 73 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। इस नोटिस के जरिए CEC पर कुल 9 गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनको लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाया है।

Contents
पहले भी उठे थे सवाल, अब आरोपों की संख्या बढ़ीपहले नोटिस में भारी समर्थनमहाभियोग का नियम और प्रक्रियाविपक्ष की रणनीति और राजनीतिक संदेशक्या होगा आगे?

यह पहला मौका नहीं है जब तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की है। इससे पहले भी पार्टी की ओर से महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया जा चुका है, जिसमें कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया था। उस समय विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के कई दलों ने इस पहल का समर्थन किया था, जिससे यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया था।

पहले भी उठे थे सवाल, अब आरोपों की संख्या बढ़ी

इससे पहले दिए गए नोटिस में कुल 7 आरोप शामिल थे, जबकि इस बार आरोपों की संख्या बढ़ाकर 9 कर दी गई है। इन आरोपों में चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं, कुछ राजनीतिक दलों के प्रति पक्षपात और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार में लागू की गई SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आपत्तियां जताई गई हैं।

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पहले नोटिस में भारी समर्थन

पहले दिए गए महाभियोग नोटिस को विपक्ष का व्यापक समर्थन मिला था। उस समय करीब 200 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल थे। जानकारी के अनुसार, लोकसभा के लगभग 130 और राज्यसभा के 60 से अधिक सांसदों ने उस नोटिस का समर्थन किया था।

इस प्रस्ताव को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने आगे बढ़ाया था। उनके इस कदम को कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का समर्थन मिला था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर बढ़ती चिंताओं का परिणाम है।

महाभियोग का नियम और प्रक्रिया

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी सख्त और संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है। किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए संसद के दोनों सदनों में न्यूनतम संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।

नियमों के अनुसार, लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। इसके बाद ही यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है और आगे की जांच प्रक्रिया शुरू होती है।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संसद में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गंभीर और दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि यह देश की संवैधानिक संस्थाओं से जुड़ा मामला होता है।

विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक संदेश

विपक्षी दल इस मुद्दे को लोकतंत्र और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि यदि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो इससे पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर भी उठाया जा रहा है। विपक्ष इस माध्यम से सरकार और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

क्या होगा आगे?

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह महाभियोग प्रस्ताव आवश्यक समर्थन जुटा पाएगा या नहीं। फिलहाल 73 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ दिया गया यह नोटिस शुरुआती कदम माना जा रहा है। यदि विपक्ष और समर्थन जुटाने में सफल होता है, तो यह मामला संसद में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

साथ ही, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय चुनाव आयोग और सरकार इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। अगर यह विवाद और बढ़ता है, तो इसका असर देश की राजनीतिक और चुनावी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है, और देश की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।

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