
कोलकाता/मध्यग्राम: पश्चिम बंगाल में एक बार फिर राजनीतिक हिंसा ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के नेता और भाजपा के कद्दावर चेहरा शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की बीती रात निर्मम हत्या कर दी गई। मध्यग्राम के पास हुई इस वारदात ने न केवल भाजपा खेमे को झकझोर दिया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है।
घटना के वक्त मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने जो खुलासे किए हैं, वे इशारा करते हैं कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक पेशेवर ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ या सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
चश्मदीद की जुबानी: ‘वह एक माहिर शूटर लग रहा था’
इस जघन्य हत्याकांड के दौरान चंद्रनाथ रथ की कार के ठीक पीछे चल रहे एक चश्मदीद ने घटना के उन खौफनाक पलों को साझा किया है। चश्मदीद के मुताबिक, रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच चंद्रनाथ की कार अचानक बीच रास्ते में रुकी।
चश्मदीद ने बताया:
“जैसे ही उनकी कार मेरी गाड़ी के आगे से गुजरी, वह अचानक रुक गई। तभी एक बाइक सवार शख्स तेजी से आया और कार के बाईं ओर जाकर ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगा। जिस तरह से उसने बिल्कुल करीब से गोलियां चलाईं और फिर पलक झपकते ही फरार हो गया, उससे साफ लग रहा था कि वह कोई माहिर शूटर है।”
चश्मदीद ने आगे बताया कि उसने दो बार गोलियों की गूंज सुनी। यह वारदात अस्पताल से महज 200-300 मीटर की दूरी पर हुई, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में घायल चंद्रनाथ और उनके ड्राइवर को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने चंद्रनाथ को मृत घोषित कर दिया।
शुभेंदु अधिकारी का हमला: “यह पूर्वनियोजित हत्या है”
अपने करीबी सहयोगी की मौत से आहत शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर राज्य प्रशासन और साजिशकर्ताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश थी।
शुभेंदु ने मीडिया से बातचीत में कहा: “यह एक पूर्ण नियोजित हत्या है। अपराधियों ने 2-3 दिनों तक इलाके की रेकी की थी और चंद्रनाथ के आने-जाने के रास्तों की टोह ली थी। डीजीपी ने भी प्राथमिक जांच के आधार पर यही बात कही है। हमारे पास इस कायरतापूर्ण कृत्य की निंदा करने के लिए शब्द नहीं हैं।”
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की और पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। घटना के बाद से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और वरिष्ठ भाजपा नेता एवं विधायक मौके पर जुट रहे हैं।
जांच के घेरे में ‘रेकी’ और ‘प्रोफेशनल किलर’
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उस बाइक सवार शूटर की पहचान की जा सके। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आखिर कार बीच रास्ते में क्यों रुकी? क्या ड्राइवर को रोका गया था या शूटर ने कार को ओवरटेक कर रुकने पर मजबूर किया?
जिस तरह से बाईं तरफ से (पैसेंजर सीट की ओर) फायरिंग की गई, वह दर्शाता है कि हमलावर को पता था कि चंद्रनाथ रथ गाड़ी में कहां बैठे हैं। यह तथ्य शुभेंदु अधिकारी के ‘रेकी’ वाले दावे को बल देता है।
सियासी गलियारों में तनाव
पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद और उससे पहले भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याओं का इतिहास रहा है, लेकिन विपक्ष के नेता के पीए की इस तरह हत्या होना मामले को बेहद संवेदनशील बना देता है। भाजपा ने इसे राज्य में ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है, वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे सभी संभावित कोणों से जांच कर रहे हैं।
चंद्रनाथ रथ की हत्या ने बंगाल की राजनीति में सुरक्षा और सुशासन के दावों की पोल खोल दी है। यदि एक हाई-प्रोफाइल नेता का करीबी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है। अब देखना यह होगा कि बंगाल पुलिस कितनी जल्दी उस ‘माहिर शूटर’ तक पहुँच पाती है और इस साजिश के पीछे के असली चेहरों को बेनकाब करती है।



