
नई दिल्ली | 1 जनवरी, 2026: साल 2026 का आगाज आम आदमी और व्यापारियों के लिए मिश्रित खबरें लेकर आया है। एक तरफ जहां पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा है, वहीं दूसरी ओर तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर महंगाई का पहला झटका दे दिया है। 1 जनवरी 2026 से लागू हुई नई दरों के मुताबिक, कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 111 रुपये का तगड़ा इजाफा किया गया है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार ने घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की कीमतों को स्थिर रखा है, जिससे आम गृहिणियों के किचन बजट पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में करीब 7% का उछाल
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1,691.50 रुपये हो गई है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में इसकी कीमत 1,580.50 रुपये थी। यह जून 2025 के बाद से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर का सबसे ऊंचा स्तर है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण यह फैसला लिया गया है।
प्रमुख महानगरों में कॉमर्शियल सिलेंडर के नए दाम (19 KG)
| शहर | पुरानी कीमत (दिसंबर 2025) | नई कीमत (1 जनवरी 2026) | कुल बढ़ोतरी |
| दिल्ली | ₹1,580.50 | ₹1,691.50 | ₹111 |
| मुंबई | ₹1,532.00 | ₹1,643.00 | ₹111 |
| कोलकाता | ₹1,690.00 | ₹1,801.00 | ₹111 |
| चेन्नई | ₹1,745.00 | ₹1,856.00 | ₹111 |
घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) को मिली राहत
आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम पिछले कई महीनों से स्थिर बने हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार 8 अप्रैल 2025 को बदलाव देखा गया था, तब से सरकार ने इसे आम जनता की पहुंच में बनाए रखा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार आगामी राज्यों के चुनावों और मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से बच रही है।
बाहर खाना होगा महंगा: होटल और रेस्तरां पर असर
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैंटीन और हलवाइयों द्वारा किया जाता है। एक साथ 111 रुपये की बढ़ोतरी से खाद्य सेवा उद्योग (Food Service Industry) पर सीधा असर पड़ना तय है।
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इनपुट कॉस्ट में वृद्धि: कच्चा माल पहले से ही महंगा है, अब ईंधन की लागत बढ़ने से रेस्तरां मालिकों का मार्जिन कम होगा।
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आम आदमी पर बोझ: लागत की भरपाई के लिए रेस्तरां संचालक थाली और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकते हैं।
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व्यापारियों की चिंता: फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन का कहना है कि नए साल के पहले ही दिन इस तरह की बढ़ोतरी छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ देगी।
पिछले दो महीनों का ट्रेंड: नवंबर-दिसंबर में मिली थी राहत
दिसंबर 2025 और नवंबर 2025 में गैस की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी। दिसंबर में सिलेंडर के दाम 10 रुपये और नवंबर में 5 रुपये कम किए गए थे। लेकिन जनवरी 2026 की इस भारी बढ़ोतरी ने पिछले दो महीनों की राहत को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
वैश्विक स्तर पर नेचुरल गैस की सप्लाई चेन में आ रही बाधाएं और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति एलपीजी की कीमतों को प्रभावित करती है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली छोटी सी हलचल भी घरेलू कीमतों में बड़े बदलाव का कारण बनती है।
नए साल की इस शुरुआत ने संकेत दे दिए हैं कि साल 2026 में ऊर्जा की कीमतें अस्थिर रह सकती हैं। हालांकि, घरेलू सिलेंडर के दाम न बढ़ाकर सरकार ने ‘मिडिल क्लास’ को सुरक्षित रखा है, लेकिन कॉमर्शियल गैस के जरिए महंगाई परोक्ष रूप से (Indirectly) जनता की जेब पर ही हमला करेगी। अब देखना यह होगा कि क्या आने वाले हफ्तों में तेल कंपनियां इस बढ़ोतरी को वापस लेती हैं या कीमतें और ऊपर जाती हैं।



