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NEET-UG पेपर लीक: राजस्थान तक कैसे पहुंचा सवालों का जाल, सीकर के छात्रों तक किसने पहुंचाया लीक पेपर?

The Hill India News
Last updated: May 14, 2026 6:09 am
The Hill India News
Published: May 14, 2026
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 23 लाख छात्रों ने इस परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत की थी, लेकिन पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द करना पड़ा। अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और विभिन्न राज्य एजेंसियां तेजी से कर रही हैं। जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं और यह सामने आया है कि लीक हुआ पेपर राजस्थान के सीकर तक कैसे पहुंचा और वहां से छात्रों में कैसे फैल गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, NEET-UG का लीक प्रश्नपत्र राजस्थान तक पहुंचाने में कई राज्यों में फैले एक संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नेटवर्क का कनेक्शन महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान और केरल तक फैला हुआ था। शुरुआती जांच में पता चला है कि यश यादव नामक व्यक्ति के जरिए यह पेपर राजस्थान पहुंचा। बताया जा रहा है कि उसकी पहचान विकास बिवाल से थी, जिसके बाद पेपर का पूरा खेल शुरू हुआ।

जांच में यह भी सामने आया कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने पेपर की हार्डकॉपी को स्कैन कर उसे पीडीएफ फाइल में बदला। इसके बाद इस फाइल को मोबाइल और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए आगे भेजा गया। आरोप है कि यही पीडीएफ बाद में सीकर के कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्रों तक पहुंची। सीकर देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग का बड़ा केंद्र माना जाता है, इसलिए वहां पेपर पहुंचने के बाद यह तेजी से कई छात्रों तक फैल गया।

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में कुछ छात्रों ने यह स्वीकार किया है कि उनसे लीक पेपर के बदले 2 लाख से 5 लाख रुपये तक लिए गए थे। वहीं जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ मामलों में यह रकम 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। बताया जा रहा है कि जयपुर और हरियाणा से जुड़े सिंडिकेट ने इस पेपर को 10 से 15 लाख रुपये में कई अभ्यर्थियों को बेचा। एक ही पेपर को बार-बार बेचकर गिरोह ने करोड़ों रुपये का नेटवर्क तैयार कर लिया था।

इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड महाराष्ट्र के नासिक का रहने वाला शुभम खैरनर बताया जा रहा है। हालांकि उसने खुद को मास्टरमाइंड मानने से इनकार किया है। CBI ने अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनर, जयपुर से मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल तथा हरियाणा के गुरुग्राम से यश यादव को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा पुणे से भी एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जिससे पूछताछ जारी है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि अभी कई अन्य संदिग्धों से अलग-अलग शहरों में पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। CBI और राज्य पुलिस की टीमें लगातार डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हैं। आरोपियों से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर को किस मैसेजिंग ऐप या डिजिटल माध्यम से शेयर किया गया था।

राजस्थान एसओजी के महानिरीक्षक अजय पाल लांबा ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सीकर के एक छात्र को यह लीक पेपर सबसे पहले उसके दोस्त से मिला था। बाद में उसी छात्र ने यह दस्तावेज दूसरे छात्रों के साथ साझा किया। इसके बाद यह ‘गेस पेपर’ या ‘क्वेश्चन बैंक’ के नाम पर कई छात्रों तक पहुंच गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि परीक्षा से पहले जयपुर और आसपास के इलाकों के कई अभ्यर्थियों तक भी यही पेपर पहुंचाया गया था।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि केरल के एक छात्र ने यह कथित ‘गेस पेपर’ सीकर के एक हॉस्टल मालिक और अपने दोस्तों को भेजा था। हॉस्टल मालिक ने इसे छात्रों के बीच यह कहकर साझा किया कि यह परीक्षा में काम आ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि बाद में उसी हॉस्टल मालिक ने स्थानीय पुलिस को इस संदिग्ध प्रश्नपत्र की जानकारी दी। उसने पुलिस को बताया कि बड़ी संख्या में छात्रों को एक विशेष ‘क्वेश्चन बैंक’ बांटा गया है, जिसमें असली परीक्षा से मिलते-जुलते सवाल मौजूद हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान पहुंचने से पहले यह पेपर हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाले एक व्यक्ति के जरिए भेजा गया था। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब हरियाणा कनेक्शन को भी गंभीरता से खंगाल रही हैं। माना जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क पहले से संगठित तरीके से काम कर रहा था और अलग-अलग राज्यों में इसके सदस्य सक्रिय थे।

इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका एक व्हिसल ब्लोअर की भी रही। राजस्थान के सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक ने सबसे पहले पेपर लीक की शिकायत जांच एजेंसियों से की थी। जांच प्रभावित न हो इसलिए उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने प्रश्नपत्र और छात्रों के पास मौजूद दस्तावेजों में समानता देखकर अधिकारियों को सतर्क किया था। उनकी सूचना के बाद ही जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क का खुलासा होने लगा।

इस बीच इस मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। बीजेपी की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने दावा किया है कि पेपर राजस्थान में लीक नहीं हुआ बल्कि इसकी शुरुआत केरल से हुई थी। हालांकि जांच एजेंसियां अभी सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और किसी एक राज्य को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहरा रही हैं।

NEET-UG पेपर लीक मामला सिर्फ एक परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है। लाखों छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। अब पूरे देश की नजर CBI जांच पर टिकी हुई है कि आखिर इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और क्या सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो पाएगी या नहीं।

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