Ranchi Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 20 दिनों से अधिक समय से जारी छात्र आंदोलन अब राजनीतिक चर्चा के केंद्र में भी आ गया है। राज्य में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सामने आए हैं। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा देश का भविष्य हैं और ऐसे समय में उनके साथ एकजुटता दिखाना जरूरी है।
राहुल गांधी का यह पत्र ऐसे समय आया है, जब रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है और कई दौर की बातचीत के बावजूद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। आंदोलन कर रहे कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। ऐसे में राहुल गांधी की मुख्यमंत्री से छात्रों के प्रतिनिधियों से सीधे मुलाकात की अपील को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा’
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार देता है और यह लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कांग्रेस ने समर्थन दिया है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस और बीजेपी का प्रभाव बढ़ गया है और इसे छात्रों के शोषण तथा दमन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था अब उस मजबूत नॉलेज सिस्टम जैसी नहीं रह गई है, जैसी उनके अनुसार करीब एक दशक पहले थी।
झारखंड के छात्रों की मांगों को बताया जायज
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सोरेन का ध्यान झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन की ओर दिलाते हुए कहा कि छात्र राज्य की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का विरोध शांतिपूर्ण रहा है और उनकी मांगें जायज हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए एक कमेटी बनाई है और इस माध्यम से सरकार तथा छात्रों के बीच बातचीत शुरू हुई है। राहुल गांधी ने सरकार की ओर से बातचीत की पहल की सराहना भी की।
हालांकि, उनका कहना है कि बातचीत के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने और प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से सीधे मुलाकात करने का आग्रह किया।
‘कुछ मांगों पर सहमति बनी, फिर भी आंदोलन जारी’
राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि छात्रों की ओर से उठाई गई कई मांगों पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बनने की स्थिति भी बनी है। इसके बावजूद आंदोलन जारी है और कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
ऐसे में कांग्रेस सांसद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा कि वह स्वयं छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करें। राहुल गांधी के मुताबिक, मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत बातचीत से छात्रों की बची हुई चिंताओं को दूर करने और सरकार की प्रतिबद्धता का भरोसा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच सीधा संवाद किसी भी विवाद को समाधान की दिशा में ले जाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
‘भारत के युवा ही देश का भविष्य हैं’
राहुल गांधी ने अपने पत्र में युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उनके साथ एकजुटता दिखाना और उनकी बात सुनना जरूरी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए और इस पूरे मामले का उचित समाधान निकालने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
राहुल गांधी की इस अपील से आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। अब निगाहें सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं।
16 अगस्त को पुतला दहन के बाद फिर बातचीत का न्योता
छात्र आंदोलन के बीच 16 अगस्त को प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के पुतले भी जलाए थे। इसके बाद झारखंड सरकार की ओर से छात्रों को एक बार फिर बातचीत के लिए बुलाया गया।
सरकार और छात्रों के बीच इससे पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है जिससे आंदोलन समाप्त हो सके।
इसी क्रम में प्रदर्शनकारी छात्रों को 17 अगस्त को दोपहर 2 बजे बातचीत के लिए बुलाया गया है। प्रशासन की ओर से अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर ने छात्रों को बैठक के प्रस्ताव की जानकारी दी है।
अब यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच सरकार की ओर से एक बार फिर बातचीत की पहल हुई है। अगर इस बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस आश्वासन या सहमति बनती है, तो आंदोलन को खत्म करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।
भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता बना बड़ा मुद्दा
रांची में चल रहे इस छात्र आंदोलन के केंद्र में राज्य की भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियां और छात्रों की अन्य मांगें हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है।
छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता से उनकी वर्षों की मेहनत और भविष्य प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि वे अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
दूसरी तरफ सरकार के सामने चुनौती यह है कि छात्रों की शिकायतों की जांच और समाधान की प्रक्रिया को इस तरह आगे बढ़ाया जाए कि उम्मीदवारों का भरोसा कायम हो सके।
अब सरकार और छात्रों की अगली बैठक पर टिकी नजरें
राहुल गांधी के पत्र के बाद रांची छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। एक तरफ राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से छात्रों से सीधे मिलने और उनकी मांगों को गंभीरता से सुनने की अपील की है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने भी छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया है।
ऐसे में 17 अगस्त की बैठक आंदोलन के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला लेगी। वहीं सरकार के सामने भी यह चुनौती है कि बातचीत को केवल आश्वासन तक सीमित न रखते हुए किसी व्यावहारिक समाधान तक पहुंचाया जाए।
फिलहाल रांची का छात्र आंदोलन केवल एक राज्य स्तरीय मुद्दा नहीं रह गया है। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और सरकार तथा छात्रों के बीच संवाद जैसे सवालों ने इसे व्यापक चर्चा का विषय बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत क्या लंबे समय से चले आ रहे इस आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता खोल पाएगी या प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा।
