
शिमला/मनाली। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है, जिससे तपती गर्मी की आहट के बीच लोगों को बड़ी राहत मिली है। लाहौल और स्पीति जिले के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है, जबकि निचले और मध्य पहाड़ी इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज की है। मार्च के महीने में इस ‘विंटर वंडरलैंड’ जैसे नज़ारे ने न केवल पर्यटकों को रोमांचित किया है, बल्कि प्रदेश के बागवानों और पर्यटन व्यवसायियों की उम्मीदों को भी नए पंख लगा दिए हैं।
सफेद चादर में लिपटी घाटी: जिस्पा और शिंकुला में भारी हिमपात
ताजा जानकारी के अनुसार, लाहौल-स्पीति के ऊंचे इलाकों जैसे जिस्पा, दारचा और शिंकुला में आज फिर से बर्फबारी हुई है। घाटी के हंसा क्षेत्र में करीब 2.5 सेंटीमीटर ताजा बर्फ दर्ज की गई है। बर्फबारी के ये दिलकश वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहे हैं। मनाली घूमने आए पर्यटकों के लिए यह किसी लॉटरी से कम नहीं था; अटल टनल और उसके आसपास के इलाकों में बर्फबारी देखकर सैलानी झूम उठे।
आंकड़ों में बारिश: कहां कितनी हुई वर्षा?
शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश का दौर भी जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गई बारिश का विवरण कुछ इस प्रकार है:
| स्थान | दर्ज बारिश (मिमी) |
| भरमौर | 12 मिमी |
| गोंडला | 6.2 मिमी |
| केलांग | 4 मिमी |
| धर्मशाला / भुंतर | 2 मिमी |
| कांगड़ा / कुकुमसेरी | 1.3 मिमी |
| कल्पा | 0.4 मिमी |
पर्यटन उद्योग में जगी नई उम्मीद
मार्च में हुई इस बर्फबारी ने मनाली, लाहौल और स्पीति के पर्यटन हितधारकों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। मैदानी इलाकों में बढ़ती गर्मी के कारण अब भारी संख्या में पर्यटकों के पहाड़ों की ओर रुख करने की उम्मीद है। होटल व्यवसायियों का मानना है कि ‘व्हाइट मार्च’ (White March) के कारण इस बार वीकेंड पर होटलों की ऑक्यूपेंसी में 30-40% का इजाफा हो सकता है। मनाली से अटल टनल की ओर जाने वाले मार्ग पर सैलानियों की चहल-पहल अभी से बढ़ गई है।
किसानों और बागवानों को मिला ‘जीवनदान’
हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए यह बारिश किसी अमृत से कम नहीं है। चंबा जिले के चुराह उपमंडल, चांजू, काणों जोत और साच-पास जैसी चोटियों पर बर्फबारी से निचले इलाकों की फसलों को नमी मिली है।
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सूखे से राहत: लंबे समय से सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे इलाकों में गेहूं और अन्य रबी फसलों को नया जीवन मिला है।
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सेब के बागवान खुश: सेब के बागवानों का कहना है कि चिलिंग ऑवर (Chilling Hours) के लिए यह मौसम अनुकूल है। यदि मार्च में नमी बनी रहती है, तो इस बार सेब की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
17 मार्च तक ‘येलो अलर्ट’: क्या कहता है मौसम विभाग?
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, वर्तमान में एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है।
“अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। 17 मार्च तक प्रदेश के कई भागों में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान और ओलावृष्टि को लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।”
इसके विपरीत, सुंदरनगर और सोलन जैसे मैदानी इलाकों में मौसम तुलनात्मक रूप से शुष्क रहा है, जिससे वहां अभी भी हल्की गर्मी का अहसास हो रहा है। हालांकि, ऊपरी इलाकों की हवाएं जल्द ही वहां भी तापमान में गिरावट ला सकती हैं।
पर्यटकों के लिए एडवाइजरी
प्रशासन ने बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं:
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सावधानी बरतें: फिसलन वाले रास्तों पर वाहनों को संभलकर चलाएं।
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स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहें: अटल टनल और लाहौल की ओर जाने से पहले सड़क की स्थिति की जांच जरूर करें।
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गर्म कपड़े साथ रखें: तापमान में अचानक आई गिरावट के कारण घाटी में ठंड काफी बढ़ गई है।
हिमाचल में इस बेमौसम बारिश और बर्फबारी को प्रकृति के वरदान के रूप में देखा जा रहा है। जहां एक तरफ यह पर्यटन के जरिए राज्य के राजस्व को बढ़ाएगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान करेगा। यदि मौसम विभाग का अनुमान सटीक रहता है और 17 मार्च तक इसी तरह की गतिविधियां जारी रहती हैं, तो यह सीजन हिमाचल के लिए ‘बंपर’ साबित हो सकता है।



