उत्तराखंडफीचर्ड

नैनीताल नाबालिग दुष्कर्म कांड: 72 वर्षीय आरोपी उस्मान को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत देने से साफ इनकार

नैनीताल: उत्तराखंड के सबसे चर्चित और संवेदनशील आपराधिक मामलों में से एक ‘नैनीताल नाबालिग दुष्कर्म कांड’ के मुख्य आरोपी उस्मान अली को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। नैनीताल हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे जमानत देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। 72 वर्षीय ठेकेदार उस्मान पर 12 साल की मासूम के साथ दरिंदगी का आरोप है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।

हाईकोर्ट की सुनवाई: ‘राहत’ की उम्मीद पर फिरा पानी

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश आलोक कुमार मेहरा की एकलपीठ में हुई। आरोपी उस्मान के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल को सोशल मीडिया पर मामला उछलने के बाद दबाव में गिरफ्तार किया गया है और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। बचाव पक्ष ने उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की गुहार लगाई थी।

हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इन तर्कों का कड़ा विरोध किया। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और मामले के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए फिलहाल उस्मान को जेल से बाहर आने की अनुमति नहीं दी। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।


क्या था पूरा मामला? (The Timeline of Horror)

यह घटना पिछले वर्ष यानी 30 अप्रैल 2025 की है, जब नैनीताल के एक प्रतिष्ठित ठेकेदार के रूप में पहचाने जाने वाले उस्मान अली (72 वर्ष) पर एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और लंबे समय तक उत्पीड़न करने का आरोप लगा था। जैसे ही यह खबर स्थानीय लोगों तक पहुँची, नैनीताल का शांत वातावरण आक्रोश की आग में जल उठा।

घटनाक्रम के मुख्य बिंदु:

  1. शिकायत और खुलासा: पीड़िता के परिजनों ने जब मामले की जानकारी पुलिस को दी, तो आरोपी के रसूख और पीड़ित की उम्र ने जनमानस को विचलित कर दिया।

  2. जन आक्रोश और तनाव: आरोपी एक विशेष समुदाय से होने के कारण मामला सांप्रदायिक रूप लेने लगा। हिंदूवादी संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिसके कारण नैनीताल के बाजारों में तोड़फोड़ और तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

  3. प्रशासनिक मुस्तैदी: तत्कालीन स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपी उस्मान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तब से आरोपी सलाखों के पीछे है।


नैनीताल की सड़कों पर दिखा था उबाल

जब इस घटना का खुलासा हुआ था, तब नैनीताल में स्थिति बेकाबू हो गई थी। आक्रोशित भीड़ ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर रातभर प्रदर्शन किया था। स्थानीय निवासियों का कहना था कि देवभूमि की मर्यादा को तार-तार करने वाले ऐसे अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन को स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भारी बल तैनात करना पड़ा था और कई दिनों तक शहर में धारा 144 जैसी स्थिति बनी रही थी।

पोक्सो एक्ट और कड़ी कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी उस्मान अली के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिग के साथ हुए इस जघन्य अपराध में साक्ष्य काफी मजबूत हैं। यही कारण है कि निचली अदालतों के बाद अब हाईकोर्ट ने भी आरोपी को फिलहाल किसी भी प्रकार की राहत देना उचित नहीं समझा।


‘देवभूमि’ में महिला सुरक्षा पर सवाल

इस मामले ने एक बार फिर उत्तराखंड में महिला और बाल सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है। नैनीताल जैसे पर्यटन केंद्र में, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था हमेशा चाक-चौबंद रहने का दावा किया जाता है, वहाँ एक बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा नाबालिग का उत्पीड़न प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल उठाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आरोपी उस्मान जैसे रसूखदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा एक नजीर पेश करेगी, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हिमाकत न कर सके।

अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

अब सबकी निगाहें 16 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्य मजबूती से रखे, तो आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल, उस्मान अली को जेल की चारदीवारी के भीतर ही दिन काटने होंगे।


नैनीताल नाबालिग दुष्कर्म कांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और न्याय प्रणाली की परीक्षा भी है। हाईकोर्ट का जमानत न देना न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button