नई दिल्ली। देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए अब यह आफत का कारण बनता दिख रहा है। बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और नदियों के उफान से हालात गंभीर बने हुए हैं, तो वहीं मैदानी इलाकों में जलभराव और आंधी-तूफान ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, जम्मू-कश्मीर और गुजरात समेत देश के 16 राज्यों में तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।
दिल्ली-NCR में रातभर झमाझम बारिश: रास्तों पर पानी भरा, यातायात प्रभावित
देश की राजधानी दिल्ली और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद में बीती रात से ही रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। सुबह जब लोग दफ्तरों और अपने गंतव्य के लिए निकले, तो उन्हें कई मुख्य मार्गों और निचले इलाकों में भारी जलभराव का सामना करना पड़ा। सड़कों पर पानी जमा होने के कारण कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम देखा गया।
मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR में अगले दो से तीन दिनों तक हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। क्षेत्र में एहतियातन येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी रखा गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से तापमान में गिरावट जरूर दर्ज की गई है, जिससे उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, लेकिन बुनियादी ढांचे और नाली-निकासी व्यवस्था की पोल खुलने से आम नागरिकों की परेशानी बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश: पूर्वी यूपी में रेड अलर्ट, पश्चिमी जिलों में मूसलाधार बारिश का अनुमान
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का प्रकोप साफ नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अत्यंत भारी बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट (Red Alert) जारी किया है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आगरा समेत कई जिलों में आगामी 25 जुलाई तक मध्यम से भारी बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है।
प्रशासन ने सभी संवेदनशील जिलों में राहत और बचाव टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण और निचले इलाकों में नदियों के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
बिहार: पटना, मुजफ्फरपुर समेत पूरे राज्य में 26 जुलाई तक व्यापक वर्षा की चेतावनी
बिहार में भी मानसून का प्रसार व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है। राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और पूर्णिया समेत राज्य के लगभग सभी जिलों में 26 जुलाई तक मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ वज्रपात (बिजली गिरने) की प्रबल आशंका है। लोगों से अपील की गई है कि वे खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, खेतों या पेड़ों के नीचे आश्रय न लें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
पहाड़ों पर आफत: उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन व नदियों के उफान का खतरा
पहाड़ी राज्यों में स्थिति सबसे अधिक संवेदनशील बनी हुई है। पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां-नाले उफान पर हैं और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं।
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उत्तराखंड: राज्य के सभी 13 जिलों (देहरादून, नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली, हरिद्वार आदि) में 26 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर मलबा आने से यातायात बार-बार बाधित हो रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
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हिमाचल प्रदेश: शिमला, मंडी, कुल्लू, मनाली और कांगड़ा सहित अधिकांश जिलों में तेज बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने राज्य में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे अचानक बाढ़ (Flash Flood) और भूस्खलन का जोखिम काफी बढ़ गया है।
राजस्थान व जम्मू-कश्मीर: आंधी, बिजली और भारी बारिश का डबल अटैक
मरुधरा राजस्थान में भी मानसून अपनी पूरी ताकत दिखा रहा है। जयपुर, उदयपुर, कोटा और जोधपुर जैसे प्रमुख जिलों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बादलों की तेज गर्जना और बिजली चमकने के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
उधर, जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, जम्मू, उधमपुर और रियासी समेत विभिन्न पर्वतीय व मैदानी जिलों में भी मूसलाधार बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की तैयारी और नागरिकों के लिए सलाह
मानसून के इस रौद्र रूप को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को अत्यधिक प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम नागरिकों के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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अति-आवश्यक काम न होने पर जलभराव वाले क्षेत्रों और जर्जर इमारतों के पास जाने से बचें।
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पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने से पहले मौसम और रास्तों की अद्यतन स्थिति जरूर जांच लें।
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बिजली के खंभों, खुले तारों और जलमग्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रहें।
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आंधी-तूफान के समय वाहनों को किसी मजबूत छत के नीचे ही पार्क करें, पेड़ों के नीचे नहीं।
उत्तर भारत में मानसून का यह रुख आगामी कुछ दिनों तक इसी तरह बने रहने की संभावना है, जिससे राहत के साथ-साथ सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
