नई दिल्ली: देशभर में मानसून की तेज रफ्तार अब आम जनजीवन के लिए आफत बन चुकी है। पहाड़ी राज्यों से लेकर मैदानी इलाकों तक, आसमान से बरस रही आफत ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, सड़कें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं और पहाड़ों से दरकते मलबे ने दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश के कई राज्यों में ‘रेड’ और ‘येलो’ अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने श्री अमरनाथ जी और माता वैष्णो देवी की पवित्र यात्राओं को भी अस्थायी रूप से रोक दिया है।
पहाड़ों पर आफत: जम्मू-कश्मीर में रेड अलर्ट, थमीं पवित्र यात्राएं
जम्मू-कश्मीर के राजौरी सहित कई जिलों में बीती रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई है। कई इलाकों में गंभीर जलभराव के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और स्थानीय नदी-नाले उफान पर हैं। मौसम विभाग ने घाटी और जम्मू संभाग के लिए 27 जुलाई तक भारी बारिश, तेज बौछारों और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी करते हुए रेड अलर्ट घोषित किया है।
इस खराब मौसम का सीधा असर श्रद्धा और आस्था के केंद्रों पर पड़ा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए 19 जुलाई से अमरनाथ यात्रा को दोनों मार्गों (पहलगाम और बालटाल) से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने बताया कि आईएमडी के खराब मौसम के पूर्वानुमान के कारण एहतियातन यह कदम उठाया गया है। इसी तरह, कटरा में भी खराब मौसम के चलते श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश में फटा बादल, सांग्ला-छितकुल रोड तबाह
हिमाचल प्रदेश में भी भारत में मानसून का कहर साफ देखा जा सकता है। किन्नौर में आईटीबीपी (ITBP) कैंप के समीप बादल फटने (Cloudburst) की एक भयानक घटना सामने आई है। बादल फटने के तुरंत बाद पहाड़ी नाले में आए मलबे और विशालकाय पत्थरों ने सांग्ला-छितकुल मार्ग को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया।
मौसम विभाग के शिमला केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा के अनुसार, 19 जुलाई की रात से राज्य में मानसून और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा, जो 24 जुलाई तक जारी रहेगा। मौसम विभाग ने 20 और 21 जुलाई को चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और सिरमौर जैसे मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी जिलों में अत्यंत भारी बारिश का अंदेशा जताते हुए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को नदियों तथा नालों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है, क्योंकि अचानक बाढ़ (Flash Floods), भूस्खलन (Landslides) और मडस्लाइड की घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं।
दिल्ली-एनसीआर में उमस से मिलेगी राहत, यूपी में आंधी-तूफान की चेतावनी
मैदानी इलाकों की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर के लोग पिछले कई दिनों से भीषण उमस और गर्मी से बेहाल हैं। हालांकि, रविवार को मौसम ने करवट बदली है और आईएमडी ने रविवार के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए हल्की बारिश की संभावना जताई है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश के बाद भी उमस का असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
उधर, उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आसपास के जिलों में रविवार सुबह से ही बादलों का डेरा है। मौसम विभाग ने पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी है। राज्य में गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट है, जहां अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। लगातार हो रही इस बारिश के कारण यूपी की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
मध्य प्रदेश में सूखे के बाद बारिश का दौर, अरुणाचल में बाढ़ का संकट
मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी देखने को मिल रही थी, जहां सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। कम वर्षा वाले इन जिलों में जबलपुर, सागर, रीवा, छिंदवाड़ा, सिवनी, धार और बैतूल जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, भोपाल मौसम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एस.एन. साहू के अनुसार, रविवार से एमपी में भी बारिश का एक नया दौर शुरू हो रहा है, जिससे किसानों और आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
वहीं, पूर्वोत्तर के राज्य अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग और कामले जिलों से एक बार फिर बाढ़ और भूस्खलन की खबरें आ रही हैं। आईएमडी ने पापुम पारे और पूर्वी कामेंग जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है, जहां 12 से 20 सेंटीमीटर तक अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। लगातार हो रही इस बारिश के चलते कमजोर बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन ने चौबीसों घंटे निगरानी के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं और लोगों से गैर-जरूरी यात्राएं टालने की अपील की है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक मौसम में सुधार नहीं होता, लोग मौसम विभाग की ‘नाउकास्ट’ (तत्काल पूर्वानुमान) और सरकारी एडवाइजरी को देखकर ही अपने घरों से बाहर निकलें।
