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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > “प्रकृति को बचाकर ही होगा सच्चा विकास” : देहरादून–ऋषिकेश मार्ग पर वृक्ष कटान के बीच पद्मश्री एवं पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का बड़ा संदेश
उत्तराखंडपर्यावरणफीचर्ड

“प्रकृति को बचाकर ही होगा सच्चा विकास” : देहरादून–ऋषिकेश मार्ग पर वृक्ष कटान के बीच पद्मश्री एवं पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का बड़ा संदेश

The Hill India News
Last updated: July 18, 2026 8:40 am
The Hill India News
Published: July 18, 2026
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देहरादून। देहरादून–ऋषिकेश मार्ग के चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित वर्षों पुराने वृक्षों के कटान को लेकर उत्तराखंड में जारी बहस के बीच देश के प्रख्यात पर्यावरणविद्, पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने विकास और पर्यावरण के संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। एक वीडियो संदेश के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट कहा कि “विकास का मार्ग प्रकृति के साथ होना चाहिए, उसके विरुद्ध नहीं।” उनका यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब सड़क परियोजना के तहत बड़ी संख्या में पुराने वृक्षों के कटान की आशंका को लेकर पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के बीच चिंता का माहौल है।

डॉ. जोशी ने कहा कि किसी भी राज्य और देश के विकास के लिए आधुनिक सड़कें, बेहतर परिवहन व्यवस्था, मजबूत आधारभूत ढांचा और नागरिक सुविधाएं आवश्यक हैं, लेकिन विकास की परिभाषा केवल कंक्रीट के ढांचों तक सीमित नहीं हो सकती। यदि विकास की कीमत प्रकृति, जंगलों और जैव विविधता के विनाश के रूप में चुकानी पड़े, तो उसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक झेलना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में वृक्ष केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे जल स्रोतों को संरक्षित रखने, भू-क्षरण रोकने, स्वच्छ वायु उपलब्ध कराने, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और जलवायु संतुलन बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी भी विकास परियोजना को लागू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीर और वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने सुझाव दिया कि आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, वैज्ञानिक योजना और वैकल्पिक डिजाइनों का उपयोग कर ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जिनसे सड़कों का विस्तार भी हो और अधिक से अधिक पुराने वृक्षों को संरक्षित भी रखा जा सके। उनका कहना है कि आज दुनिया के कई देशों में विकास परियोजनाओं के दौरान पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए नवाचार आधारित मॉडल अपनाए जा रहे हैं और भारत भी इस दिशा में प्रभावी कदम उठा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि विकास और पर्यावरण को एक-दूसरे का विरोधी मानना उचित नहीं है। वास्तविक और टिकाऊ विकास वही है, जिसमें आर्थिक प्रगति, सामाजिक आवश्यकताओं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। यदि विकास योजनाओं में पर्यावरणीय संवेदनशीलता को समान महत्व दिया जाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

देहरादून–ऋषिकेश मार्ग पर प्रस्तावित वृक्ष कटान को लेकर जारी जनचर्चा के बीच डॉ. जोशी का यह संदेश केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए विकास की नई सोच प्रस्तुत करता है। उनका मानना है कि नीति निर्माण से लेकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन तक हर स्तर पर प्रकृति को भागीदार बनाया जाना चाहिए, क्योंकि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने अंत में आह्वान किया कि विकास की दिशा ऐसी हो, जो प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़े। उनका स्पष्ट संदेश है कि सच्चा विकास वही है, जो सड़कें भी बनाए, शहर भी बसाए और साथ ही जंगलों, नदियों, जल स्रोतों तथा जैव विविधता को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखे। यही उत्तराखंड की पारिस्थितिकी, देश के पर्यावरणीय भविष्य और सतत विकास की वास्तविक पहचान है।

https://thehillindia.com/wp-content/uploads/2026/07/video-.mp4

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