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आंध्र प्रदेश के कोनासीमा में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 7 की मौत — पीएम मोदी और सीएम नायडू ने जताया दुख

The Hill India News
Last updated: October 9, 2025 2:15 am
The Hill India News
Published: October 9, 2025
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अमरावती/नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. आंबेडकर कोनासीमा जिले में बुधवार दोपहर एक पटाखा निर्माण फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयंकर था कि फैक्ट्री परिसर पूरी तरह ध्वस्त हो गया और आसपास के घरों की खिड़कियों के शीशे तक टूट गए।

Contents
आग और धमाकों से मचा हड़कंपपहले भी मिली थी चेतावनीपीएम मोदी और मुख्यमंत्री नायडू ने जताया शोकविपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवालस्थानीय लोगों की बहादुरी और बचाव अभियानतीन महीने में तीसरा बड़ा हादसाप्रशासन ने शुरू की जांच

यह घटना श्री गणपति ग्रैंड फायर वर्क्स नामक लाइसेंस प्राप्त फैक्ट्री में दोपहर करीब 1 बजे के आसपास घटी, जब मजदूर आतिशबाजी सामग्री तैयार कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रासायनिक मिश्रण तैयार करते समय अचानक उठी चिंगारी ने वहां रखे बारूद और अन्य ज्वलनशील पदार्थों को आग लगा दी। देखते ही देखते फैक्ट्री में लगातार धमाके होने लगे और आग ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।


आग और धमाकों से मचा हड़कंप

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट की आवाजें इतनी तेज थीं कि आसपास के दो से तीन किलोमीटर तक झटके महसूस किए गए। कई स्थानीय लोग इसे पहले भूकंप समझकर घरों से बाहर निकल आए। फैक्ट्री के ऊपर धुएं का काला गुबार कई घंटे तक मंडराता रहा।

स्थानीय निवासी राजू नायडू ने बताया,

“पहला धमाका बहुत तेज था। उसके बाद कुछ ही सेकंड में लगातार तीन-चार धमाके हुए। फैक्ट्री के अंदर से लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हम कुछ लोगों को बाहर निकाल पाए, लेकिन कई अंदर ही फंस गए।”

दमकल विभाग की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। लेकिन तब तक सात मजदूरों की मौत हो चुकी थी। तीन घायलों को राजमुंदरी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।


पहले भी मिली थी चेतावनी

हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रामचंद्रपुरम एसडीपीओ बी. रघुवीर ने बताया कि फैक्ट्री को पिछले पखवाड़े में दो बार सुरक्षा संबंधी चेतावनी दी गई थी।

“राजस्व विभाग ने नोटिस जारी कर कहा था कि सुरक्षा उपकरणों और स्टोरेज व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, लेकिन काम बंद नहीं हुआ। उत्पादन जारी रहने के कारण ही यह बड़ा हादसा हुआ।”

जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) राहुल मीणा ने पुष्टि की कि फैक्ट्री लाइसेंस प्राप्त थी, लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक और प्रबंधक के खिलाफ लापरवाही और ज्वलनशील पदार्थों के अनुचित भंडारण के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली है।


पीएम मोदी और मुख्यमंत्री नायडू ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जारी बयान में कहा गया,

“आंध्र प्रदेश के कोनासीमा में हुई पटाखा फैक्ट्री दुर्घटना अत्यंत दुखद है। दिवंगतों के परिजनों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”

पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी घटना पर शोक जताया और प्रशासन को तुरंत राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा,

“यह हृदयविदारक दुर्घटना है। मैंने जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा दी जाए और मृतकों के परिवारों को हर संभव आर्थिक मदद पहुंचाई जाए।”

मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट 48 घंटे में मांगी है।


विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने भी हादसे पर दुख जताया और राज्य सरकार से औद्योगिक सुरक्षा मानकों की सख्त समीक्षा की मांग की।
उन्होंने कहा,

“यह बेहद दुखद है कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद फैक्ट्री में काम जारी था। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता की भी कमी को दर्शाता है।”


स्थानीय लोगों की बहादुरी और बचाव अभियान

विस्फोट के बाद जब तक दमकल गाड़ियां पहुंचीं, तब तक आसपास के गांवों के लोगों ने ही राहत कार्य शुरू कर दिए। कई लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर धुएं से भरी फैक्ट्री में प्रवेश किया और मजदूरों को बाहर निकालने की कोशिश की।

स्थानीय पंचायत सदस्य लक्ष्मण राव ने बताया,

“हमें पता था कि अंदर मजदूर फंसे हैं। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के हम अंदर गए और तीन लोगों को बाहर निकालने में सफल हुए। आग बहुत तेज थी, लेकिन हमने हार नहीं मानी।”

सरकार ने उन ग्रामीणों को राहत कार्यों में साहस दिखाने के लिए सम्मानित करने का संकेत दिया है।


तीन महीने में तीसरा बड़ा हादसा

यह हादसा इस वर्ष आंध्र प्रदेश में पटाखा निर्माण इकाइयों में हुई तीसरी बड़ी दुर्घटना है।
जुलाई में कडप्पा जिले और अगस्त में कृष्णा जिले में भी इसी तरह की घटनाओं में कुल 11 लोगों की जान गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में कई छोटे और मध्यम स्तर की पटाखा फैक्ट्रियां पुराने लाइसेंस और सीमित सुरक्षा उपकरणों के सहारे चल रही हैं।

औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञ एस. रामकृष्णन का कहना है,

“फायरवर्क्स यूनिटों में रासायनिक पदार्थों का मिश्रण अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है। एक छोटी सी चिंगारी या स्थैतिक बिजली का झटका भी जानलेवा विस्फोट का कारण बन सकता है। सरकार को लाइसेंस रिन्युअल से पहले फिजिकल इंस्पेक्शन को अनिवार्य करना चाहिए।”


प्रशासन ने शुरू की जांच

जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कलेक्टर हेमलता राव ने बताया कि राहत कार्य पूरे हो चुके हैं और घायलों को राज्य सरकार के खर्चे पर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हादसे की विस्तृत तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है।

पुलिस ने फैक्ट्री परिसर को सील कर दिया है, जबकि फॉरेंसिक टीम विस्फोट के कारणों की वैज्ञानिक जांच कर रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट में बारूद के गलत अनुपात में मिलावट को हादसे की प्रमुख वजह बताया गया है।

कोनासीमा की यह त्रासदी फिर एक बार इस सवाल को मजबूती से सामने लाती है कि क्या भारत में औद्योगिक सुरक्षा और निरीक्षण प्रणाली पर्याप्त है?
हर साल पटाखा उद्योगों में दर्जनों मजदूर असुरक्षित परिस्थितियों में अपनी जान गंवाते हैं, और जांच रिपोर्टों के बाद भी हालात नहीं बदलते।

सरकार ने राहत और जांच के आदेश जरूर दिए हैं, पर असली जिम्मेदारी अब यह सुनिश्चित करने की है कि ऐसी फैक्ट्रियां मानक सुरक्षा ढांचे के तहत काम करें — ताकि अगला त्योहार, किसी परिवार के लिए शोक का कारण न बने।

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