नैनीताल हाईकोर्ट ने चंपावत जिले के बनबसा क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर हुए अतिक्रमण के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यूपी सिंचाई विभाग के सचिव को आदेश दिया है कि अतिक्रमणकारियों के मामलों की दोबारा सुनवाई कर विस्तृत रिपोर्ट छह सप्ताह के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई भी छह सप्ताह बाद तय की है।
यह मामला लंबे समय से बनबसा क्षेत्र में वन भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों से जुड़ा हुआ है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि बड़ी संख्या में लोगों ने वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जिससे स्थानीय प्रशासन, यातायात व्यवस्था और आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने इससे पहले भी इस मामले को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने और उनके दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी कथित अतिक्रमणकारियों को अपने दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा था। जांच प्रक्रिया के दौरान कुल 488 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए थे। इनमें से केवल 314 लोगों ने ही अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए। विभागीय जांच में सामने आया कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में से 174 लोगों के दस्तावेज अवैध पाए गए। इसके बाद विभाग ने ऐसे लोगों को कब्जा हटाने और भूमि खाली करने के नोटिस जारी किए।
हालांकि, हाईकोर्ट ने विभाग की ओर से पेश की गई रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त नहीं किया और दस्तावेजों के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि सभी मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसके पास वैध दस्तावेज हैं और किसने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को भी इस मामले में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार या सिंचाई विभाग को कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक या सुरक्षा सहायता की आवश्यकता हो तो उत्तराखंड सरकार उन्हें पूरा सहयोग उपलब्ध कराए। इससे स्पष्ट है कि अदालत इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर तेजी से समाधान चाहती है।
यह जनहित याचिका चंपावत निवासी बहादुर सिंह पाटनी द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि बनबसा क्षेत्र में वन भूमि पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण बाजार क्षेत्र में अव्यवस्था फैल रही है। सड़कें संकरी हो गई हैं और यातायात जाम की समस्या आम हो गई है। कई बार लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी देर हो जाती है। इसके अलावा वन भूमि पर अतिक्रमण से पर्यावरणीय नुकसान की आशंका भी जताई गई है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि वन विभाग की भूमि पर हुए अवैध कब्जों को चिन्हित कर तत्काल हटाने के निर्देश दिए जाएं ताकि क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधर सके और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके। अदालत ने इस मामले में लगातार निगरानी बनाए रखी हुई है और प्रशासन से समय-समय पर रिपोर्ट भी मांगी जा रही है।
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब एक बार फिर अतिक्रमण मामलों की समीक्षा होगी। माना जा रहा है कि दस्तावेजों के पुनर्मूल्यांकन के बाद अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अदालत के हस्तक्षेप से बनबसा क्षेत्र में वर्षों पुरानी अतिक्रमण की समस्या का समाधान निकल सकेगा।
