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भारत की परमाणु ताकत में बड़ा बदलाव! पहली बार ‘तुरंत दागने के लिए तैयार’ स्थिति में तैनात हुईं परमाणु मिसाइलें

The Hill India News
Last updated: June 9, 2026 9:52 am
The Hill India News
Published: June 9, 2026
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भारत की परमाणु शक्ति को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय हथियार निगरानी संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली बार अपनी कुछ परमाणु मिसाइलों और हथियारों को ऐसी स्थिति में तैनात किया है, जहां जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने करीब 12 परमाणु हथियारों को परिचालन तैनाती (ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट) की श्रेणी में रखा है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह भारत की दशकों पुरानी परमाणु नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।

Contents
क्या है ‘रेडी टू फायर’ तैनाती?‘पहले इस्तेमाल नहीं’ की नीति बरकरारभारत के पास कितने परमाणु हथियार?चीन को ध्यान में रखकर बढ़ रही क्षमतादुनिया की बड़ी परमाणु शक्तियों की स्थितिरक्षा खर्च में भी भारत आगेऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी सतर्कताबदलते सुरक्षा माहौल का संकेत

अब तक भारत की नीति यह रही है कि परमाणु हथियार, उन्हें ले जाने वाली मिसाइलें और लॉन्चिंग सिस्टम अलग-अलग स्थानों पर रखे जाते थे। इसका उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आकस्मिक या अनधिकृत परमाणु हमले की संभावना को न्यूनतम करना था। लेकिन सिपरी की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने अब अपनी कुछ परमाणु क्षमताओं को अधिक सक्रिय और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली व्यवस्था में शामिल कर लिया है।

क्या है ‘रेडी टू फायर’ तैनाती?

‘रेडी टू फायर’ या ‘तुरंत प्रक्षेपण के लिए तैयार’ स्थिति का मतलब यह नहीं है कि हथियार किसी भी समय बिना आदेश के इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि हथियारों को ऐसी स्थिति में रखा गया है, जहां राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के आदेश मिलते ही उन्हें बहुत कम समय में दागा जा सके। यह व्यवस्था किसी भी संभावित खतरे का तेजी से जवाब देने की क्षमता को मजबूत बनाती है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत ने कुछ परमाणु हथियारों को भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियों में तैनात किया है। इससे भारत की जवाबी हमले की क्षमता और अधिक प्रभावी हो जाती है। किसी भी दुश्मन देश द्वारा पहले हमला किए जाने की स्थिति में भारत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहेगा।

‘पहले इस्तेमाल नहीं’ की नीति बरकरार

भारत लंबे समय से ‘पहले इस्तेमाल नहीं’ यानी ‘नो फर्स्ट यूज’ की नीति का पालन करता रहा है। इस नीति के अनुसार भारत किसी भी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन यदि उस पर परमाणु हमला होता है तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा।

यही कारण है कि भारत की परमाणु नीति को दुनिया में जिम्मेदार परमाणु शक्ति की नीति माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय चुनौतियों के कारण भारत अपनी परमाणु तैयारियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है।

भारत के पास कितने परमाणु हथियार?

सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास लगभग 190 परमाणु हथियार हैं। इनमें से 12 हथियारों को परिचालन तैनाती की श्रेणी में रखा गया है, जबकि लगभग 178 हथियार सुरक्षित भंडारण में मौजूद हैं।

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार हैं, लेकिन उसने अपने किसी भी परमाणु हथियार को तैनात श्रेणी में नहीं रखा है। इस तरह कुल संख्या के मामले में भारत पाकिस्तान से आगे निकल चुका है।

चीन को ध्यान में रखकर बढ़ रही क्षमता

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की परमाणु रणनीति अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और उसकी परमाणु क्षमता को देखते हुए भारत लगातार अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों और आधुनिक हथियार प्रणालियों का विकास कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ऐसे हथियार विकसित कर रहा है जो चीन के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचने में सक्षम हैं। इसके लिए लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, परमाणु पनडुब्बियों और उन्नत लॉन्चिंग सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

दुनिया की बड़ी परमाणु शक्तियों की स्थिति

सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और रूस अब भी दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियां हैं। अमेरिका के पास लगभग 1,770 तैनात परमाणु हथियार हैं, जबकि करीब 1,930 हथियार भंडार में रखे गए हैं। रूस के पास लगभग 1,796 तैनात और 2,604 सुरक्षित परमाणु हथियार मौजूद हैं।

चीन के पास लगभग 620 परमाणु हथियार हैं, जबकि फ्रांस के पास 290 और ब्रिटेन के पास 225 परमाणु हथियार हैं। इन आंकड़ों की तुलना में भारत के परमाणु हथियारों की संख्या कम है, लेकिन उसकी क्षमता लगातार मजबूत होती जा रही है।

रक्षा खर्च में भी भारत आगे

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में भारत ने रक्षा क्षेत्र पर 92.1 अरब डॉलर खर्च किए, जिससे वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा बजट वाला देश बन गया। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने और आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया है।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली और नौसैनिक शक्ति के विस्तार ने भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी सतर्कता

मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कई सैन्य और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया था। लगभग पांच दिनों तक चले इस संघर्ष के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उस समय परमाणु संघर्ष की आशंका भी जताई थी। हालांकि दोनों देशों ने हालात को नियंत्रित कर लिया, लेकिन इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया।

बदलते सुरक्षा माहौल का संकेत

सिपरी की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत अब अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को अधिक प्रभावी और तेज प्रतिक्रिया देने योग्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि भारत सरकार ने रिपोर्ट में किए गए दावों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल में भारत अपनी सामरिक तैयारियों को मजबूत कर रहा है।

यदि रिपोर्ट के दावे सही हैं, तो यह भारत के परमाणु कार्यक्रम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाएगा। ‘पहले इस्तेमाल नहीं’ की नीति को बनाए रखते हुए भारत अपनी जवाबी हमले की क्षमता को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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