
नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र का सोमवार को 11वां दिन है और आज का दिन विधायी और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार आज लोकसभा में एटॉमिक एनर्जी अमेंडमेंट बिल पेश करने की तैयारी में है, जिसे भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस विधेयक के जरिए सरकार का उद्देश्य देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी का रास्ता खोलना है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल परमाणु ऊर्जा उत्पादन में तेजी आएगी, बल्कि तकनीकी नवाचार, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है और सदन में हंगामे के आसार जताए जा रहे हैं।
एटॉमिक एनर्जी अमेंडमेंट बिल: क्या है सरकार की मंशा
सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले एटॉमिक एनर्जी अमेंडमेंट बिल को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में है, जहां निजी कंपनियों की भूमिका सीमित रही है। नए संशोधन के जरिए इस क्षेत्र में निजी निवेश और साझेदारी को बढ़ावा देने की योजना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना, स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करना है। सरकार का दावा है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से—
- परमाणु संयंत्रों की संख्या बढ़ेगी
- अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल संभव होगा
- ऊर्जा उत्पादन की लागत में कमी आएगी
- वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता मजबूत होगी
ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव, देशभर की निगाहें संसद पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है तो भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा। परमाणु ऊर्जा को लंबे समय से स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा स्रोत के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन निवेश और तकनीकी सीमाओं के कारण इसकी गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
सरकार का तर्क है कि निजी कंपनियों के आने से न केवल परियोजनाओं में तेजी आएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा। यही वजह है कि आज संसद में होने वाली चर्चा पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
कॉर्पोरेट बिल और उच्च शिक्षा से जुड़े विधेयकों पर भी चर्चा संभव
एटॉमिक एनर्जी बिल के अलावा, शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार कॉर्पोरेट बिल और हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) से जुड़े विधेयकों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। उच्च शिक्षा से संबंधित यह विधेयक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अन्य नियामक संस्थाओं के ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव करता है।
सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ेगी। हालांकि, विपक्ष इन प्रस्तावों को लेकर पहले ही अपनी आपत्तियां जता चुका है।
SIR मुद्दे पर विपक्ष का सरकार पर हमला
आज के दिन संसद में विपक्ष के हंगामे के आसार इसलिए भी हैं क्योंकि विपक्ष SIR (Special Investigation Report) के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस रिपोर्ट से जुड़े अहम सवालों से बच रही है और सदन में स्पष्ट जवाब देने से कतरा रही है।
इस मुद्दे को लेकर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में तेज बहस और टकराव देखने को मिल सकता है। विपक्ष की मांग है कि सरकार इस पर विस्तृत चर्चा कराए और सभी तथ्यों को सदन के सामने रखे।
संसदीय कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका
पिछले कुछ दिनों के अनुभव को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि विपक्ष के विरोध के कारण आज भी संसद की कार्यवाही बाधित हो सकती है। शीतकालीन सत्र के दौरान अब तक कई बार हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है।
सरकार की कोशिश है कि अहम विधेयकों पर चर्चा कर उन्हें पारित कराया जाए, जबकि विपक्ष का जोर सरकार को जवाबदेह बनाने और विवादित मुद्दों पर बहस कराने पर है।
सरकार बनाम विपक्ष: आमने-सामने की स्थिति
आज का दिन संसद में सरकार और विपक्ष के बीच शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है। एक ओर सरकार एटॉमिक एनर्जी अमेंडमेंट बिल को देशहित में जरूरी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे संवेदनशील क्षेत्र में निजीकरण का प्रयास करार दे सकता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, क्योंकि परमाणु ऊर्जा जैसे विषय पर राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और जवाबदेही जैसे सवाल स्वाभाविक रूप से उठते हैं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह बिल
भारत की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। कोयला और पेट्रोलियम जैसे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार न्यूक्लियर एनर्जी को एक मजबूत विकल्प के रूप में आगे बढ़ा रही है। एटॉमिक एनर्जी अमेंडमेंट बिल को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि यह विधेयक—
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा
- कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद करेगा
- भारत को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर मजबूत स्थिति देगा
निष्कर्ष
संसद के शीतकालीन सत्र का 11वां दिन कई मायनों में निर्णायक साबित हो सकता है। एटॉमिक एनर्जी अमेंडमेंट बिल जहां भारत के ऊर्जा भविष्य की दिशा तय कर सकता है, वहीं विपक्ष का विरोध इस पर राजनीतिक रंग भी चढ़ा सकता है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस अहम विधेयक को कितनी मजबूती से सदन में रख पाती है और क्या विपक्ष के हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाती है या नहीं। आने वाले घंटों में संसद का माहौल देश की राजनीति और नीति दोनों की दिशा तय कर सकता है।



