अहमदाबाद: गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से ‘अकेला मुजाहिद जिहाद कैसे करे’ नाम की एक बुकलेट बरामद हुई, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और नए लोगों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इसी सामग्री के आधार पर युवाओं को जिहादी सोच की ओर आकर्षित करने और उन्हें विस्फोटक तैयार करने जैसी गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की कोशिश की जा रही थी।
गुजरात ATS ने हाल ही में पाटन जिले के सिद्धपुर तालुका के खडियाल गांव से पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों के नाम पहले गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आए थे। इसके बाद ATS ने निगरानी बढ़ाई और कार्रवाई करते हुए इन्हें हिरासत में लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, ये सभी एक स्थानीय मस्जिद में नियमित रूप से एकत्र होते थे, जहां कथित तौर पर IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार करने की तकनीक सीखी जा रही थी। जांच में यह भी दावा किया गया है कि आरोपियों ने एक परीक्षण विस्फोट भी किया था ताकि विस्फोटक उपकरण के काम करने की प्रक्रिया को समझा जा सके।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी जामिया अबुल हसन मदरसा में रह रहे थे और वर्ष 2023 से लगातार विस्फोटक बनाने की तकनीक सीखने तथा उसका अभ्यास करने में लगे थे। ATS के अनुसार, उनका उद्देश्य IED तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को समझना और उसे व्यवहारिक रूप से लागू करना था। इसके लिए उन्हें विभिन्न प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें कथित तौर पर ‘अकेला मुजाहिद जिहाद कैसे करे’ नामक बुकलेट भी शामिल थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस बुकलेट के माध्यम से उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने और हिंसक गतिविधियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल मोहम्मद अमीन शेरा अक्सर जिहाद से जुड़े भाषण देता था और अन्य लोगों को भी इसी दिशा में प्रेरित करने की कोशिश करता था। अधिकारियों के अनुसार, उसके पास से कई डिजिटल सामग्री भी बरामद हुई हैं, जिनमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के कथित भाषणों वाली पेन ड्राइव भी शामिल है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह सामग्री आरोपियों तक किस माध्यम से पहुंची और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
ATS की जांच के मुताबिक, वर्ष 2023 से फरवरी 2026 के बीच इन संदिग्धों ने आठ अलग-अलग स्थानों का दौरा किया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन स्थानों पर उन्होंने विस्फोटक तैयार करने की प्रक्रिया, उसके मैकेनिज्म और विस्फोट करने के तरीकों का अध्ययन किया। अधिकारियों के अनुसार, इन दौरों के दौरान कथित तौर पर कई बार अभ्यास भी किया गया, ताकि तकनीकी जानकारी को व्यवहारिक रूप से समझा जा सके। अब जांच एजेंसियां उन सभी स्थानों की भी पड़ताल कर रही हैं, जहां ये आरोपी गए थे।
जांच में यह भी पता चला है कि IED तैयार करने के लिए आवश्यक कुछ रसायन और अन्य सामग्री ऑनलाइन माध्यम से खरीदी गई थी, जबकि कुछ सामान स्थानीय बाजारों से जुटाया गया था। मोहम्मद अमीन शेरा के पास से ऐसी सामग्री भी बरामद होने का दावा किया गया है, जिसका इस्तेमाल विस्फोटक उपकरण तैयार करने में किया गया था। बरामद वस्तुओं की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका वास्तविक उपयोग किस प्रकार किया गया।
ATS का कहना है कि आरोपी केवल खुद तक सीमित नहीं रहना चाहते थे, बल्कि वे मदरसे के अन्य छात्रों को भी कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। जांच के अनुसार, इसके लिए उन्होंने कई बैठकों और धार्मिक आमंत्रण कार्यक्रमों का आयोजन किया था, जहां युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि इस नेटवर्क का विस्तार केवल गुजरात तक सीमित था या इसके तार अन्य राज्यों अथवा विदेशी संगठनों से भी जुड़े हुए थे।
अब तक इस मामले में कुल 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पहले चरण में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बाद में पांच अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसियां सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं और उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस, बैंक लेन-देन और ऑनलाइन गतिविधियों की भी विस्तृत जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि उन्हें आर्थिक सहायता कहां से मिल रही थी और क्या इस मॉड्यूल का संबंध किसी बड़े आतंकी नेटवर्क से है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय रहते इस मॉड्यूल का खुलासा होना एक बड़ी सफलता है। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और कई पहलुओं की पुष्टि होना बाकी है। ATS का कहना है कि सभी बरामद दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क के और सदस्य तो सक्रिय नहीं हैं तथा क्या देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के मॉड्यूल संचालित किए जा रहे थे।
फिलहाल पूरे मामले की जांच विभिन्न सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के समन्वय से आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क, उसके संचालन के तरीके और उसके संभावित उद्देश्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
