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रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव: अब TTE की टिकट जांच होगी बॉडी कैमरे की निगरानी में, बातचीत और विवाद की पूरी रिकॉर्डिंग होगी

The Hill India News
Last updated: July 23, 2026 7:07 am
The Hill India News
Published: July 23, 2026
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और टिकट जांच प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। अब ट्रेनों में टिकट जांच के दौरान ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) अपनी यूनिफॉर्म पर बॉडी वॉर्न कैमरा (Body-Worn Camera) पहनेंगे। यह कैमरा टिकट जांच के दौरान होने वाली पूरी बातचीत, गतिविधियों और संभावित विवादों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करेगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों और टिकट चेकिंग स्टाफ के बीच होने वाले विवादों को निष्पक्ष तरीके से सुलझाना, कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और टिकट जांच प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाना है।

Contents
दो प्रमुख ट्रेनों से हुई शुरुआतक्या होता है बॉडी वॉर्न कैमरा?विवाद होने पर मिलेगा स्पष्ट सबूतकर्मचारियों की सुरक्षा भी होगी मजबूतपहले भी हो चुका है सफल परीक्षणयात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में हो सकती है शुरुआत

भारतीय रेलवे ने फिलहाल इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के प्रयागराज मंडल में शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर की ट्रेनों में लागू किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह पहल रेलवे प्रशासन और यात्रियों के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी।

दो प्रमुख ट्रेनों से हुई शुरुआत

इस नई व्यवस्था की शुरुआत फिलहाल दो महत्वपूर्ण ट्रेनों में की गई है। इनमें 12417/12418 प्रयागराज एक्सप्रेस (प्रयागराज–नई दिल्ली–प्रयागराज) और 12451/12452 श्रम शक्ति एक्सप्रेस (कानपुर–नई दिल्ली–कानपुर) शामिल हैं। पहले चरण में इन ट्रेनों में ड्यूटी करने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ को बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं।

रेलवे प्रशासन ने शुरुआती चरण में लगभग 30 कैमरे उपलब्ध कराए हैं। इन कैमरों के प्रभावी उपयोग के लिए टिकट चेकिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे तकनीक का सही तरीके से उपयोग कर सकें और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या न आए।

क्या होता है बॉडी वॉर्न कैमरा?

बॉडी वॉर्न कैमरा एक छोटा डिजिटल कैमरा होता है जिसे कर्मचारी अपनी यूनिफॉर्म पर पहनते हैं। यह कैमरा कर्मचारी के सामने होने वाली गतिविधियों को लगातार रिकॉर्ड करता है। टिकट जांच के दौरान यात्री और टीटीई के बीच होने वाली बातचीत, टिकट की जांच, किसी प्रकार की बहस या अन्य घटनाएं ऑडियो और वीडियो दोनों रूपों में रिकॉर्ड होती रहेंगी।

रेलवे द्वारा उपयोग किए जा रहे इन कैमरों में कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इनमें हाई-डेफिनिशन वीडियो रिकॉर्डिंग, स्पष्ट ऑडियो रिकॉर्डिंग, कम रोशनी में रिकॉर्डिंग के लिए नाइट विजन, लंबी दूरी की यात्रा के अनुरूप बैटरी बैकअप तथा टैम्पर-प्रूफ रिकॉर्डिंग सिस्टम शामिल है। टैम्पर-प्रूफ तकनीक की वजह से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में बाद में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकेगा, जिससे जांच पूरी तरह निष्पक्ष बनी रहेगी।

विवाद होने पर मिलेगा स्पष्ट सबूत

रेलवे में अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जब टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टीटीई के बीच बहस या विवाद की स्थिति बन जाती है। कई मामलों में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि गलती किस पक्ष की थी। कभी यात्रियों की शिकायत सामने आती है तो कभी टिकट चेकिंग स्टाफ अपने साथ अभद्र व्यवहार या झूठे आरोपों की बात करता है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यदि किसी प्रकार का विवाद होता है तो कैमरे में रिकॉर्ड हुई ऑडियो-वीडियो फुटेज की सहायता से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा सकेगी। इससे शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और गलत पक्ष के खिलाफ उचित कार्रवाई करना भी आसान होगा।

कर्मचारियों की सुरक्षा भी होगी मजबूत

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाना नहीं बल्कि टिकट चेकिंग स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। कई बार टिकट जांच के दौरान कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, धमकी या मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों में वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में काम करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

रेलवे कर्मचारी संगठनों द्वारा भी लंबे समय से बॉडी कैमरे की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि कैमरे होने से कर्मचारियों पर होने वाले झूठे आरोपों में कमी आएगी और वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगी।

पहले भी हो चुका है सफल परीक्षण

रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बॉडी वॉर्न कैमरों का परीक्षण इससे पहले मध्य रेलवे (CR) और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के कुछ मंडलों में किया जा चुका है। वहां इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए। टिकट जांच प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई और विवादों के समाधान में रिकॉर्डिंग काफी उपयोगी साबित हुई। इन्हीं सफल परिणामों को देखते हुए अब उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में इस परियोजना का विस्तार किया गया है।

यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलने की उम्मीद है। टिकट जांच के दौरान किसी प्रकार की गलतफहमी या अनावश्यक विवाद की संभावना कम होगी। यदि किसी यात्री को शिकायत होती है तो उसके पास रिकॉर्डिंग के रूप में मजबूत साक्ष्य उपलब्ध होगा। दूसरी ओर, ईमानदारी से अपना कार्य करने वाले टीटीई को भी झूठे आरोपों से सुरक्षा मिलेगी।

इसके अलावा, रिकॉर्डिंग की जानकारी होने के कारण यात्रियों और कर्मचारियों दोनों के व्यवहार में अधिक जिम्मेदारी और अनुशासन आने की संभावना है। इससे टिकट जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सहज और पेशेवर बन सकेगी।

चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में हो सकती है शुरुआत

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. शिवम शर्मा के अनुसार, यदि प्रयागराज मंडल में चल रहा पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे उत्तर मध्य रेलवे की अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। इसके बाद भारतीय रेलवे चरणबद्ध तरीके से देश के विभिन्न रेलवे जोनों और मंडलों में भी इस तकनीक का विस्तार करेगा।

रेलवे का मानना है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करके यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। बॉडी वॉर्न कैमरों की यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यदि यह परियोजना अपेक्षित परिणाम देती है तो देशभर के लाखों रेल यात्रियों और हजारों टिकट चेकिंग कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था एक नई और अधिक भरोसेमंद टिकट जांच प्रणाली का आधार बन सकती है।

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