नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा दिन भी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले दो दिनों तक लगातार हंगामे, विरोध-प्रदर्शन और कार्यवाही स्थगित होने के बाद बुधवार को भी सदन में तीखी नोकझोंक और गतिरोध के आसार हैं। कांग्रेस ने घोषणा की है कि उसके सांसद आज काले कपड़े पहनकर संसद परिसर में विरोध दर्ज कराएंगे। यह प्रदर्शन विपक्षी नेताओं के साथ हुई पुलिस कार्रवाई, छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध का प्रतीक माना जा रहा है।
मंगलवार को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा। विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष के विरोध और लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।
मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए थे। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों को दबाया जा रहा है तथा शांतिपूर्ण विरोध को भी पुलिस बल के माध्यम से रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी नेताओं को वहां से हटाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया।
राहुल गांधी ने इस दौरान सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने, संबंधित मुद्दों पर केंद्रीय गृहमंत्री से सदन में बयान देने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका कहना था कि देश के लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं तथा सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
दूसरी ओर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि सदन सुचारु रूप से चलेगा तो सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि छात्रों की भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में एनडीए की बैठक के दौरान परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं।
इस बीच विपक्षी दल भी अपनी रणनीति को और मजबूत करने में जुटे हैं। आज सुबह विपक्षी नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में प्रस्तावित है, जिसमें संसद के भीतर और बाहर की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि विभिन्न विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए साझा रुख अपनाने का प्रयास करेंगे।
राजनीतिक गतिविधियों के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात करने वाले हैं। यह बैठक सांसद संजय राउत के निवास पर प्रस्तावित है, जिसमें विपक्षी एकजुटता और चल रहे आंदोलन सहित विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इस मुलाकात को विपक्षी दलों के बीच बढ़ते समन्वय के रूप में भी देखा जा रहा है।
उधर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद डॉ. वी. शिवदासन ने नियम 267 के तहत राज्यसभा सभापति को नोटिस देकर परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताओं तथा प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सदन में विशेष चर्चा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय महत्व के हैं और इन पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
कुल मिलाकर मॉनसून सत्र का तीसरा दिन भी बेहद महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहने की संभावना है। एक ओर सरकार सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाकर विधायी कार्य पूरे करना चाहती है, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रहा है। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आज संसद में गतिरोध समाप्त होगा या फिर विरोध और हंगामे के कारण कार्यवाही एक बार फिर प्रभावित होगी।
