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ग्रेटर नोएडा में महंगी हुई जमीन: अथॉरिटी ने अलॉटमेंट रेट 3.58% बढ़ाए, फ्लैट मालिकों को मिली बड़ी राहत

ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और आवासीय हब ग्रेटर नोएडा में जमीन खरीदना अब और महंगा हो गया है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने शहर में विभिन्न श्रेणियों की जमीनों के आवंटन दरों (Allotment Rates) में वृद्धि करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्राधिकरण द्वारा शनिवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बोर्ड बैठक में इस बात की घोषणा की गई। नई दरें 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी।

प्राधिकरण के इस फैसले के बाद ग्रेटर नोएडा में नया घर, दुकान, ऑफिस या कारखाना स्थापित करने का खर्च बढ़ जाएगा। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार की गई बढ़ोतरी काफी सीमित और राहत देने वाली है, जिससे रियल एस्टेट और उद्योग जगत के लिए एक सकारात्मक संकेत भी माना जा रहा है।


क्या हैं जमीन की नई और पुरानी कीमतें?

प्राधिकरण द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, इस साल जमीन की आवंटन दरों में औसतन 3.58 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने जमीनों के रेट में 5 प्रतिशत की वृद्धि की थी, जिसे इस बार घटाकर 3.58 प्रतिशत कर दिया गया है।

विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत ग्रेटर नोएडा में वर्तमान आवंटन दरें इस प्रकार हैं:

  • आवासीय श्रेणी (Residential Category): वर्तमान में इन जमीनों के रेट 33,481 रुपये से लेकर 49,588 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक हैं।

  • बिल्डर श्रेणी (Builder Category): इन क्षेत्रों में दरें 40,408 रुपये से 57,218 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक हैं।

  • औद्योगिक श्रेणी (Industrial Category): औद्योगिक इकाइयों के लिए दरें 10,416 रुपये से 32,327 रुपये प्रति वर्ग मीटर के बीच हैं।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इन्हीं श्रेणियों में 3.58 प्रतिशत का इजाफा लागू होगा।


सरकारी और अर्ध-सरकारी विभागों को राहत

इस बढ़ोतरी के बीच, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने सरकारी और अर्ध-सरकारी विभागों को विशेष राहत दी है। इन विभागों को नई दरों के बजाय पुरानी प्रचलित आवासीय दरों पर ही जमीन का आवंटन किया जाएगा। यह कदम सरकारी परियोजनाओं, जैसे स्कूल, अस्पताल और प्रशासनिक कार्यालयों के विकास की लागत को नियंत्रित रखने में मदद करेगा।


फ्लैट मालिकों के लिए बड़ी खुशखबरी: OTS योजना को मंजूरी

जमीनों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी के साथ ही, अथॉरिटी ने आम नागरिकों और फ्लैट खरीदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण ने ईडब्ल्यूएस (EWS) फ्लैटों और 135 वर्ग मीटर तक के मल्टीस्टोरी फ्लैट मालिकों के लिए ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ (OTS) कार्यक्रम को अपनी मंजूरी दे दी है।

इस योजना के तहत फ्लैट मालिकों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे:

  • ब्याज से राहत: प्रीमियम के बकाये पर अब किसी भी प्रकार का अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाएगा।

  • 80 प्रतिशत तक की छूट: प्रीमियम के बकाये और लीज डीड से जुड़ी लेट फीस में 80 प्रतिशत तक की भारी छूट दी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उन हजारों मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो लंबे समय से लेट फीस और ब्याज के बोझ तले दबे हुए थे।


रियल एस्टेट और औद्योगिक क्षेत्र पर असर

ग्रेटर नोएडा में जमीन की कीमतों में मामूली वृद्धि से भले ही निर्माण लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन 3.58% की यह दर पिछले साल के मुकाबले कम है, जिसे रियल एस्टेट विशेषज्ञों द्वारा एक संतुलित और व्यावहारिक कदम बताया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा तेजी से उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इन्वेस्टमेंट हब के रूप में विकसित हो रहा है। यहां बुनियादी ढांचे के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण निवेशकों का रुझान लगातार बना हुआ है।

प्राधिकरण के इन फैसलों से स्पष्ट है कि प्रशासन एक ओर जहां राजस्व बढ़ाने के उपायों पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता और छोटे उद्योगों की समस्याओं का भी पूरा समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।

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