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देहरादून में कांग्रेस की जन आक्रोश रैली: महंगाई, बेरोजगारी और अंकिता भंडारी के न्याय के लिए सड़कों पर उतरा विपक्ष

देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शनिवार की शाम कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ एक विशाल ‘जन आक्रोश रैली’ का आयोजन किया। चकराता रोड स्थित बल्लूपुर चौक से लेकर बल्लीवाला चौक तक निकाली गई इस रैली में राज्य के प्रमुख विपक्षी दल ने बढ़ती महंगाई, युवाओं की बेरोजगारी, बिगड़ती कानून व्यवस्था और बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सरकार के खिलाफ अपना तीखा विरोध दर्ज कराया।

इस रैली में प्रदेश कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सड़क पर उतरा, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विशेष रूप से शिरकत की। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए हरीश रावत ने पैदल मार्च किया और बाद में मोटरसाइकिल पर सवार होकर प्रदर्शन में भाग लिया। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े आंदोलन किए जाएंगे।


अंकिता भंडारी हत्याकांड पर न्याय की मांग

प्रदर्शन के दौरान मुख्य वक्ताओं ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। हरीश रावत ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहचान हमेशा शांति, सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान की रही है, लेकिन वर्तमान में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं।

“अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाना हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। यह रैली केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता और महिलाओं के गुस्से का प्रतीक है, जिसे अब सरकार ज्यादा दिन तक अनदेखा नहीं कर सकती।” — हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री

नेताओं ने आरोप लगाया कि मामले की जांच और न्याय की दिशा में सरकार की उदासीनता बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।


महंगाई और बेरोजगारी ने तोड़ी आम आदमी की कमर

रैली को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि आज उत्तराखंड की जनता महंगाई और बेरोजगारी की दोहरी मार से त्रस्त है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में युवा निराश होकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार के पास रोजगार सृजन की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है।

गोदियाल ने आगे कहा कि कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में पुलिस प्रशासन की ओर से छात्रों के उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो लोकतंत्र में कतई स्वीकार्य नहीं है। कांग्रेस पार्टी अब पूरी मजबूती से जनता की आवाज बनकर उभरी है और जब तक लोगों को न्याय नहीं मिल जाता, यह संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।


पोस्टर फाड़े जाने पर विवाद और राजनीतिक आरोप

रैली के दौरान आयोजकों ने राज्य सरकार पर पक्षपात और तानाशाही का आरोप भी लगाया। कार्यक्रम संयोजक रितेश ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि रैली के प्रचार-प्रसार के लिए चकराता रोड पर 50 से 60 बैनर और पोस्टर लगाए गए थे, जिन्हें शनिवार तड़के फाड़ दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पुराने बैनर और होर्डिंग्स बिना किसी नुकसान के अपनी जगह पर जस के तस लगे हुए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ विपक्ष में होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और राज्य की धामी सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है।


आगामी आंदोलन की चेतावनी

उत्तराखंड कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह जन आक्रोश रैली मात्र एक शुरुआत है। पार्टी ने संकल्प लिया है कि आने वाले समय में राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह के बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, ताकि सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जा सके और प्रदेश में कानून का शासन स्थापित हो सके।

इस रैली ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति को गरमा दिया है और यह स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले विधानसभा सत्र या अन्य राजनीतिक मंचों पर विपक्ष इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की पूरी तैयारी में है।

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