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Reading: केदारनाथ यात्रा ने तोड़ा 2024 का रिकॉर्ड — श्रद्धालुओं की संख्या 16.56 लाख के पार
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उत्तराखंडफीचर्ड

केदारनाथ यात्रा ने तोड़ा 2024 का रिकॉर्ड — श्रद्धालुओं की संख्या 16.56 लाख के पार

The Hill India News
Last updated: October 8, 2025 4:06 pm
The Hill India News
Published: October 8, 2025
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देहरादून: उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ रही है। मौसम की चुनौतियों और भूस्खलन के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। खासतौर पर केदारनाथ धाम ने इस बार नया इतिहास रच दिया है। अब तक यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 16 लाख 56 हजार के पार पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष 2024 के पूरे यात्राकाल में आए 16 लाख 52 हजार 76 यात्रियों से अधिक है।

Contents
5614 श्रद्धालुओं ने बुधवार को किए बाबा केदार के दर्शनचारधाम यात्रा फिर पकड़ रही रफ्तारप्रकृति की चुनौतियों के बीच प्रशासन की तत्परतासुरक्षित यात्रा के लिए पुख्ता इंतज़ाममुख्यमंत्री धामी ने दिए सख्त निर्देशधार्मिक पर्यटन के बढ़ते आयामयात्रियों के लिए जरूरी हिदायतेंश्रद्धालु उत्साह से भरपूर

गौरतलब है कि अभी धाम के कपाट बंद होने में करीब 15 दिन शेष हैं। ऐसे में यह आंकड़ा आने वाले दिनों में और ऊंचाई छूने की संभावना है।


5614 श्रद्धालुओं ने बुधवार को किए बाबा केदार के दर्शन

बुधवार को बाबा केदारनाथ के धाम में 5614 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यात्रा के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की यात्रा अप्रैल के अंत में शुरू हुई थी, और तब से अब तक प्रतिदिन औसतन पांच से दस हजार श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच रहे हैं।

केदारनाथ धाम के कपाट आगामी 23 अक्टूबर को भैयादूज के अवसर पर बंद होंगे। इस प्रकार यात्राकाल अभी दो सप्ताह से अधिक शेष है, और प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार यात्रियों की संख्या 17 लाख से पार जा सकती है।


चारधाम यात्रा फिर पकड़ रही रफ्तार

लंबे मानसून सीजन और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के चलते कुछ समय के लिए चारधाम यात्रा की रफ्तार थम गई थी। लेकिन जैसे ही मौसम ने करवट ली, श्रद्धालुओं का सैलाब फिर से उमड़ पड़ा है।

अब न केवल केदारनाथ, बल्कि बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में भी यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

राज्य सरकार के अनुसार, अब तक चारों धामों में 43 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो राज्य की धार्मिक पर्यटन क्षमता और श्रद्धालु विश्वास का संकेत है।


प्रकृति की चुनौतियों के बीच प्रशासन की तत्परता

इस साल का मानसून उत्तराखंड के लिए कई चुनौतियां लेकर आया। जुलाई और अगस्त में बादल फटने, भूस्खलन और अतिवृष्टि ने चारधाम मार्गों को कई जगहों पर अवरुद्ध कर दिया।
खासकर गंगोत्री धाम का धराली क्षेत्र भयंकर आपदा की चपेट में आया, जहां मार्ग और कई ढांचागत सुविधाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।

लेकिन प्रशासन ने हार नहीं मानी। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, BRO और पुलिस-होमगार्ड टीमों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए मार्गों को फिर से सुचारू कराया।
जेसीबी और हाइड्रा मशीनें लगातार मलबा हटाने में लगीं, ताकि यात्रा निर्बाध जारी रह सके।


सुरक्षित यात्रा के लिए पुख्ता इंतज़ाम

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

  • संवेदनशील क्षेत्रों में NDRF, SDRF और पुलिस बल की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं।
  • भूस्खलन संभावित स्थलों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
  • मार्गों की सफाई और मलबा हटाने के लिए 24×7 जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं।
  • प्रमुख पड़ावों — सीतापुर, सोनप्रयाग, गौरीकुंड और रामबाड़ा में चिकित्सा केंद्र और राहत टीमें मौजूद हैं।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान दें और खराब मौसम में यात्रा से परहेज़ करें।


मुख्यमंत्री धामी ने दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा,

“श्रद्धालुओं का विश्वास हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने हर स्तर पर तैयारी की है। सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत व बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यात्रियों को सुविधाएं सर्वोच्च स्तर पर दी जाएंगी।


धार्मिक पर्यटन के बढ़ते आयाम

चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा है। अनुमान है कि इस यात्रा से प्रतिवर्ष राज्य को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ होता है।

इस वर्ष के रिकॉर्ड आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन तेजी से पुनर्जीवित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ धाम से जुड़ाव और सरकार की लगातार निवेश नीतियों ने इस क्षेत्र में नई ऊर्जा भरी है।

यात्रियों के लिए विकसित नई रोपवे योजना, हेली सेवाएं और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम ने यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बना दिया है।


यात्रियों के लिए जरूरी हिदायतें

जिला प्रशासन ने यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है —

  • मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रा स्थगित करें।
  • प्रशासनिक या पुलिस टीमों के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
  • ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी या ठंड लगने की स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लें।
  • यात्रा पर निकलने से पहले चारधाम यात्री पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

श्रद्धालु उत्साह से भरपूर

विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु अब भी बाबा केदार के दर्शन के लिए कतार में हैं। गुजरात से आए एक श्रद्धालु विनोदभाई पटेल ने कहा,

“बारिश, ठंड और बर्फ के बावजूद यहां की ऊर्जा अद्भुत है। ऐसा लगता है जैसे बाबा खुद आशीर्वाद दे रहे हों।”

दिल्ली की मीनाक्षी शर्मा कहती हैं,

“केदारनाथ आने का हर अनुभव नया होता है। इस बार सुविधाएं बेहतर हैं, रास्ते साफ हैं और प्रशासन हर जगह मौजूद है।”

केदारनाथ यात्रा का यह नया रिकॉर्ड सिर्फ संख्या नहीं है — यह उत्तराखंड की अदम्य इच्छाशक्ति, प्रशासनिक तत्परता और श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास का प्रतीक है।
प्रकृति की हर चुनौती के बावजूद राज्य ने यह साबित किया है कि “जहां आस्था, वहां व्यवस्था।”

आने वाले दो हफ्तों में यात्रियों की संख्या और बढ़ेगी और उम्मीद है कि वर्ष 2025 का यह यात्राकाल चारधाम इतिहास का सबसे सफल और सुरक्षित अध्याय साबित होगा।

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