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उत्तराखंडफीचर्ड

एजुकेशन हब से ‘क्राइम कैपिटल’ बनने की राह पर देहरादून? गैंगवॉर, फायरिंग और बढ़ती हिंसा ने खड़े किए बड़े सवाल

The Hill India News
Last updated: August 21, 2026 1:51 pm
The Hill India News
Published: August 21, 2026
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देहरादून: कभी स्कूल-कॉलेजों की घंटियों, सैन्य अनुशासन, शांत जीवनशैली, रिटायर्ड अधिकारियों की मौजूदगी और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाने वाला देहरादून आज अपराध की बदलती तस्वीर को लेकर चर्चा में है। उत्तराखंड की राजधानी और देश के प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में मशहूर यह शहर लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांत और सुरक्षित माना जाता रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों छात्र यहां पढ़ाई के लिए आते हैं, जबकि रोजगार, पर्यटन और बेहतर जीवनशैली की तलाश में भी बड़ी संख्या में लोग देहरादून का रुख करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में सामने आई मारपीट, गैंगवार, फायरिंग, छात्रों के बीच हिंसक संघर्ष, हथियारबंद अपराधियों की सक्रियता और पर्यटकों-स्थानीय लोगों के बीच बढ़ते विवादों ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Contents
पटेलनगर में दिनदहाड़े फायरिंग ने बढ़ाई चिंतापुराने दोस्तों का विवाद और फिर गोली तक पहुंची बातचोरी-चेन स्नैचिंग से आगे बढ़ चुकी है अपराध की बहसएजुकेशन हब की छवि पर बढ़ता सवालदून में हथियारबंद अपराधियों की चुनौतीमसूरी में भी छोटी कहासुनी बन रही हिंसा की वजहआखिर क्यों तेजी से हिंसा में बदल रहे हैं विवाद?तेजी से फैलता शहर, बढ़ती पुलिसिंग की चुनौतीपुलिस का दावा—संदिग्धों पर लगातार कार्रवाईक्या ‘क्राइम कैपिटल’ बन रहा है देहरादून?

स्थिति इतनी चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अब अपराध की चर्चा केवल चोरी, वाहन चोरी या चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। मामूली कहासुनी के बाद मारपीट, पुराने विवादों में हथियार निकलना और भीड़भाड़ वाले इलाकों में फायरिंग जैसी घटनाएं एक नए तरह की चुनौती का संकेत दे रही हैं। सवाल यह है कि आखिर शांत माने जाने वाले देहरादून में विवाद इतने तेजी से हिंसा का रूप क्यों ले रहे हैं? क्या तेजी से फैलते शहर के साथ पुलिसिंग का ढांचा उसी रफ्तार से मजबूत नहीं हो पाया है? क्या छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ती आक्रामकता, बाहरी अपराधियों की आवाजाही, नशे का नेटवर्क और अवैध हथियारों की उपलब्धता जैसी समस्याएं मिलकर एक बड़ी चुनौती पैदा कर रही हैं?

पटेलनगर में दिनदहाड़े फायरिंग ने बढ़ाई चिंता

देहरादून में अपराध की बदलती तस्वीर का ताजा उदाहरण पटेलनगर क्षेत्र में हुई फायरिंग की घटना है। शहर के व्यस्त और आबादी वाले इलाके में दिनदहाड़े गोली चलने की खबर ने लोगों को हैरान कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आईटीएस कॉलेज वाली रोड पर कुछ युवक खड़े थे। इसी दौरान गुरमीत नाम का युवक कुछ अन्य लोगों के साथ स्विफ्ट कार से वहां पहुंचा। आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच चल रहे पुराने विवाद के कारण फायरिंग की गई।

पहली बार हुई फायरिंग में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली, लेकिन इसके बाद मामला वहीं खत्म नहीं हुआ। बताया गया कि दूसरा पक्ष कार का पीछा करते हुए आगे बढ़ा और घटनाक्रम शिमला बाईपास रोड स्थित सेंट जूड चौक के पास पहुंच गया। यहां दोबारा फायरिंग होने की बात सामने आई, जिसमें साहिल नाम का युवक गोली लगने से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

यह घटना कई मायनों में गंभीर है। पहला, यह किसी सुनसान या अपराध प्रभावित दूरदराज के इलाके में नहीं हुई, बल्कि शहर के ऐसे क्षेत्र में सामने आई जहां लोगों और वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है। दूसरा, कथित तौर पर विवाद पहले से चल रहा था और अंततः वह गोलीबारी तक पहुंच गया। तीसरा, इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि अगर दो पक्षों के बीच पुराना तनाव था तो क्या उसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर पहले से मौजूद थी? यदि थी तो समय रहते ऐसी हिंसक स्थिति को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?

पुराने दोस्तों का विवाद और फिर गोली तक पहुंची बात

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि घटना में शामिल दोनों पक्ष पहले एक-दूसरे के परिचित और मित्र रहे थे। बताया गया कि पिछले कुछ समय से गुरमीत का आदित्य, सुजल और अंशुल के साथ विवाद चल रहा था। धीरे-धीरे मतभेद बढ़ते गए और मामला हिंसक टकराव तक पहुंच गया।

यही बात देहरादून की बदलती क्राइम स्टोरी को सबसे ज्यादा चिंताजनक बनाती है। पहले जहां व्यक्तिगत विवादों को बातचीत, स्थानीय स्तर पर समझौते या कानूनी कार्रवाई के जरिए सुलझाने की कोशिश होती थी, वहीं अब कई मामलों में युवाओं के बीच विवाद सीधे हिंसा तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। हाथापाई से शुरू हुआ मामला डंडों, धारदार हथियारों और कई बार गोलीबारी तक पहुंच सकता है।

पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि वास्तविक विवाद की शुरुआत कैसे हुई, इसमें कितने लोग शामिल थे और हथियार कहां से आए। फरार आरोपियों की तलाश के साथ ही घटना में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी भी जांच का अहम हिस्सा है। लेकिन यह मामला केवल कुछ युवकों के व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है। यह उस व्यापक चुनौती की ओर भी इशारा करता है जिसमें शहर के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं के बीच छोटे विवाद तेजी से गंभीर रूप ले रहे हैं।

चोरी-चेन स्नैचिंग से आगे बढ़ चुकी है अपराध की बहस

देहरादून में अपराध को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब चर्चा केवल पारंपरिक अपराधों तक सीमित नहीं है। चेन स्नैचिंग, चोरी या वाहन चोरी जैसी घटनाओं के साथ-साथ अब खुलेआम मारपीट, समूहों के बीच संघर्ष और हथियारों के इस्तेमाल की घटनाएं भी चिंता का कारण बन रही हैं।

किसी भी शहर में अपराध की प्रकृति बदलना कानून-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत होता है। जब व्यक्तिगत विवादों में हथियार इस्तेमाल होने लगें और सार्वजनिक स्थानों पर फायरिंग जैसी घटनाएं सामने आएं, तो इसका असर केवल पीड़ित और आरोपी तक सीमित नहीं रहता। आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है। अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होते हैं और शहर की सामाजिक व आर्थिक छवि भी प्रभावित होती है।

देहरादून जैसे शहर के लिए यह चिंता और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए रहते हैं। कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, पीजी और हॉस्टलों से भरे इलाकों में युवाओं की बड़ी आबादी रहती है। ऐसे में यदि छात्र समूहों या युवाओं के बीच विवाद हिंसक होने लगें तो इसे केवल सामान्य झगड़ा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एजुकेशन हब की छवि पर बढ़ता सवाल

देहरादून की पहचान लंबे समय से देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में होती रही है। यहां स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों की बड़ी संख्या है। देश के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के राज्यों से छात्र यहां पढ़ाई करने पहुंचते हैं। अभिभावक भी देहरादून को एक ऐसे शहर के रूप में देखते रहे हैं जहां बेहतर शिक्षा के साथ अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण मिलता है।

लेकिन हाल के समय में छात्रों के बीच हिंसक भिड़ंत की घटनाओं ने इस छवि पर सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2026 में छात्रों के दो गुटों के बीच हिंसक संघर्ष में एक बीटेक छात्र की मौत का मामला सामने आया था। इस घटना में कथित तौर पर छात्रों के बीच गैंगवार जैसी स्थिति बनने और एक युवक पर फावड़े से हमला किए जाने की बात भी सामने आई।

यह किसी कॉलेज कैंपस में होने वाली सामान्य बहस या झगड़े से कहीं ज्यादा गंभीर स्थिति है। जब छात्रों के बीच मतभेद हिंसक हमले तक पहुंच जाएं तो शिक्षण संस्थानों, हॉस्टल प्रबंधन, अभिभावकों और पुलिस सभी की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

सवाल यह भी है कि छात्र किन परिस्थितियों में ऐसे समूहों में बंट रहे हैं? क्या कॉलेज और हॉस्टल के आसपास बाहरी लोगों का हस्तक्षेप बढ़ रहा है? क्या छात्रों के बीच पुरानी रंजिश, वर्चस्व की लड़ाई, सोशल मीडिया विवाद या किसी अन्य कारण से गुटबाजी पैदा हो रही है? इन सभी पहलुओं पर गहराई से काम करने की जरूरत है।

दून में हथियारबंद अपराधियों की चुनौती

देहरादून के सामने चुनौती केवल छात्रों या स्थानीय युवाओं के विवाद तक सीमित नहीं है। इसी वर्ष अप्रैल में प्रेमनगर क्षेत्र में पुलिस और एक आरोपी के बीच हुई मुठभेड़ ने भी हथियारबंद अपराधियों की सक्रियता की ओर ध्यान खींचा था। पुलिस के अनुसार, लूट के प्रयास के बाद फरार आरोपी के साथ हुई मुठभेड़ में आरोपी की मौत हो गई, जबकि एक पुलिस अधिकारी भी गोली लगने से घायल हुआ था।

आरोपी के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई थी। इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि देहरादून की सुरक्षा चुनौती कई स्तरों पर मौजूद है। एक तरफ स्थानीय विवाद हिंसक हो रहे हैं, दूसरी तरफ पेशेवर या गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी शहर या आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय हो सकते हैं।

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और पड़ोसी राज्यों से सड़क संपर्क भी पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अपराधियों की आवाजाही, अस्थायी ठिकाने, किराये के मकान और तेजी से विकसित होते नए इलाके पुलिस के सामने निगरानी की नई चुनौतियां खड़ी करते हैं।

मसूरी में भी छोटी कहासुनी बन रही हिंसा की वजह

देहरादून जिले की दूसरी बड़ी चिंता पर्यटन नगरी मसूरी में सामने आने वाले विवाद हैं। पहाड़ों की रानी के रूप में मशहूर मसूरी हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटन सीजन में यहां लोगों और वाहनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। होटल, पार्किंग, टैक्सी, दुकानों, सड़कों और स्थानीय कारोबार को लेकर तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।

हाल के दिनों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच विवादों के कई मामले सामने आए हैं। कुछ घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें मामूली कहासुनी के बाद लोग मारपीट करते दिखाई दिए। सोशल मीडिया ने भी ऐसी घटनाओं के प्रभाव को बढ़ा दिया है। जो विवाद पहले केवल कुछ लोगों तक सीमित रहता था, वह वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन जाता है।

इसका सीधा असर मसूरी और देहरादून की पर्यटन छवि पर पड़ सकता है। पर्यटक किसी स्थान पर केवल प्राकृतिक सुंदरता देखने नहीं जाते, बल्कि वहां की सुरक्षा और सामाजिक वातावरण भी उनके अनुभव का हिस्सा होता है। इसलिए पर्यटन स्थलों पर कानून-व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।

आखिर क्यों तेजी से हिंसा में बदल रहे हैं विवाद?

देहरादून की अलग-अलग घटनाओं को एक साथ देखें तो उनकी प्रकृति भले ही अलग हो, लेकिन एक समानता साफ दिखाई देती है—विवाद तेजी से हिंसक रूप ले रहे हैं। कहीं पुराने दोस्तों के बीच रंजिश गोलीबारी तक पहुंच रही है, कहीं छात्रों के गुट आमने-सामने आ रहे हैं और कहीं पर्यटकों व स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी मारपीट में बदल रही है।

इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। तेजी से बदलती जीवनशैली, युवाओं में बढ़ती आक्रामकता, सोशल मीडिया के जरिए विवादों का फैलना, गुटबाजी, नशे की समस्या, अवैध हथियारों की उपलब्धता और छोटी बात पर शक्ति प्रदर्शन की प्रवृत्ति जैसे कारक कानून-व्यवस्था की चुनौती को बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों और प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि किसी घटना के बाद केवल आरोपी को पकड़ने तक कार्रवाई सीमित न रहे। यह भी समझना होगा कि आखिर ऐसे विवाद पैदा क्यों हो रहे हैं और कौन से इलाके या समूह हिंसा के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। यदि किसी क्षेत्र में लगातार एक जैसी घटनाएं हो रही हैं तो वहां लक्षित पुलिसिंग और सामाजिक स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत हो सकती है।

तेजी से फैलता शहर, बढ़ती पुलिसिंग की चुनौती

देहरादून का तेजी से विस्तार उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और बड़ी चुनौती भी। राजधानी बनने के बाद शहर का भौगोलिक और आर्थिक विस्तार तेजी से हुआ है। नए आवासीय क्षेत्र, बाजार, शिक्षण संस्थान, अस्पताल, होटल, पीजी, हॉस्टल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान लगातार बढ़ रहे हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों से लोग रोजगार, शिक्षा और कारोबार के लिए यहां पहुंच रहे हैं। इसके कारण आबादी का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे में पुलिसिंग का पारंपरिक ढांचा नए शहरी विस्तार के अनुरूप लगातार मजबूत करना जरूरी है।

किरायेदारों का सत्यापन, संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी, बाहरी अपराधियों की जानकारी, छात्रों और हॉस्टलों से जुड़े विवादों पर नजर, नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई और अवैध हथियारों की सप्लाई रोकना—ये सभी एक साथ चलने वाले काम हैं।

देहरादून के कई नए इलाके तेजी से विकसित हुए हैं, जहां बड़ी संख्या में किराये के मकान और पीजी मौजूद हैं। ऐसे क्षेत्रों में सत्यापन और स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र मजबूत होना महत्वपूर्ण है। केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित विवादों को समय रहते पहचानना भी पुलिसिंग का अहम हिस्सा होना चाहिए।

पुलिस का दावा—संदिग्धों पर लगातार कार्रवाई

देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल के अनुसार, पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों पर लगातार कार्रवाई कर रही है और बड़ी संख्या में सत्यापन अभियान भी चलाए जा रहे हैं। पुलिस छात्रों के विभिन्न समूहों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नजर रखने की बात भी कह रही है।

यह जरूरी है कि पुलिसिंग केवल प्रतिक्रिया आधारित न होकर रोकथाम आधारित भी हो। यानी घटना होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ ऐसे कारणों की पहचान भी की जाए जो भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को जन्म दे सकते हैं।

कॉलेज प्रशासन, हॉस्टल संचालकों और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि किसी छात्र समूह के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है तो समय रहते बातचीत और निगरानी के जरिए स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।

क्या ‘क्राइम कैपिटल’ बन रहा है देहरादून?

कुछ घटनाओं के आधार पर किसी पूरे शहर को अपराध की राजधानी कहना उचित नहीं हो सकता, लेकिन लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं को नजरअंदाज करना भी खतरनाक होगा। देहरादून की पहचान आज भी शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से जुड़ी हुई है। यहां बड़ी संख्या में लोग शांत और सुरक्षित जीवन के लिए भी आते हैं।

लेकिन यदि मारपीट, गैंगवार, फायरिंग और हथियारों से जुड़े मामले लगातार बढ़ते हैं तो यह शहर की छवि और आम लोगों की सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। चुनौती केवल अपराधियों को गिरफ्तार करने की नहीं, बल्कि अपराध को जन्म देने वाली परिस्थितियों को समझने और उन्हें समय रहते नियंत्रित करने की भी है।

देहरादून को अपने तेजी से बढ़ते स्वरूप के अनुरूप आधुनिक और प्रभावी पुलिसिंग की जरूरत है। अपराध के हॉटस्पॉट की पहचान, सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार, किरायेदार सत्यापन, अवैध हथियारों और नशे के खिलाफ अभियान, कॉलेजों और हॉस्टलों में बेहतर निगरानी तथा युवाओं के बीच हिंसा रोकने के लिए संस्थागत प्रयास जरूरी हैं।

फिलहाल पटेलनगर की फायरिंग, छात्रों के बीच हिंसक संघर्ष, प्रेमनगर की मुठभेड़ और मसूरी में सामने आने वाले विवादों ने एक बात जरूर स्पष्ट कर दी है कि देहरादून के सामने कानून-व्यवस्था की चुनौती बदल रही है। शहर तेजी से बढ़ रहा है और उसके साथ अपराध का स्वरूप भी बदल रहा है। अब जरूरत केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को मजबूत करने की है जो विवाद को गोली चलने से पहले ही रोक सके।

देहरादून आज भी देश का प्रमुख एजुकेशन हब है, पर्यटन और संस्कृति की मजबूत पहचान रखता है। लेकिन इस पहचान को बनाए रखने के लिए बढ़ती हिंसा पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अपराधी कौन है और उसे कब पकड़ा जाएगा, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आखिर देहरादून में ऐसे हालात बनने ही क्यों लगे हैं? आने वाले समय में पुलिस, प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर इसका जवाब तलाशना होगा, ताकि दून की पहचान शिक्षा और शांति के शहर के रूप में ही बनी रहे।

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