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अप्रैल की शुरुआत में महंगाई का झटका: कमर्शियल गैस सिलेंडर 195 रुपये महंगा, घरेलू दरें स्थिर

नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत आम लोगों और कारोबारियों के लिए महंगाई का बड़ा झटका लेकर आई है। सरकारी तेल कंपनियों ने 1 अप्रैल से गैस सिलेंडर के नए दाम लागू कर दिए हैं, जिसमें खासतौर पर 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और अन्य छोटे-बड़े व्यवसायों पर पड़ने वाला है।

ताजा अपडेट के अनुसार, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 195.50 रुपये की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल सिलेंडर अब 2,078.50 रुपये का हो गया है, जबकि पहले इसकी कीमत 1,884.50 रुपये थी। वहीं, कोलकाता में यह सिलेंडर 2,208 रुपये, चेन्नई में 2,246.50 रुपये और मुंबई में 2,031 रुपये में मिलेगा।

हालांकि राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे आम घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों का असर धीरे-धीरे खाने-पीने की चीजों और सेवाओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

केवल कमर्शियल ही नहीं, बल्कि छोटे सिलेंडरों की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। 5 किलोग्राम वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 51 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर छोटे व्यवसायों और सीमित उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।

गैस सिलेंडर की कीमतों में यह लगातार दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 1 मार्च को भी कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 114.50 रुपये की वृद्धि की गई थी। वहीं 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये का इजाफा हुआ था, जिसके बाद दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये हो गई थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल एक बड़ा कारण है। हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिली है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है, जहां तेल और गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रभावित होती हैं।

कमर्शियल गैस की कीमत बढ़ने से सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर पड़ेगा। कारोबारी अब बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा सकते हैं। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

कुल मिलाकर, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत महंगाई के दबाव के साथ हुई है। भले ही घरेलू गैस उपभोक्ताओं को इस बार राहत मिली हो, लेकिन बाजार में बढ़ती लागत का असर जल्द ही आम लोगों तक पहुंच सकता है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हालात और सरकारी नीतियों के आधार पर गैस की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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