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उत्तर प्रदेश: स्मार्ट प्रीपेड मीटर बना मुसीबत! कर्मचारियों से लेकर जनता तक में नाराज़गी, कांग्रेस का CM योगी को पत्र

Rajesh Dabral
Last updated: April 1, 2026 5:00 am
Rajesh Dabral
Published: April 1, 2026
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर सियासत तेज हो गई है। अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद प्रदेश में व्यापक जनअसंतोष पैदा हो गया है और इससे न केवल उपभोक्ता बल्कि बिजली विभाग के कर्मचारी भी परेशान हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा है कि राज्य में अब तक 74 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 69 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना पूर्व सूचना के प्रीपेड मोड में बदल दिए गए, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इस कदम से आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऑटोमेटिक डिस्कनेक्शन अभियान के तहत करीब 5.79 लाख उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन स्वतः काट दिए गए। इससे हजारों परिवारों को अचानक अंधेरे में रहना पड़ा, जिससे उनके दैनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस समस्या की शिकायतें सामने आ रही हैं।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि कई मामलों में उपभोक्ताओं द्वारा समय पर बिल जमा करने या बैलेंस उपलब्ध होने के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जा रही है। कई उपभोक्ताओं को घंटों ही नहीं बल्कि कई दिनों तक बिजली का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि मौजूदा प्रणाली तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्षम नहीं है।

इसके अलावा उपभोक्ताओं ने बिजली बिलों में असामान्य वृद्धि की भी शिकायत की है। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आ रहे हैं, जिससे मीटर की सटीकता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की स्थिति आम जनता के आर्थिक बोझ को और बढ़ा रही है।

मामले का एक अहम पहलू बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों से भी जुड़ा है। अजय राय ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने के साथ ही संविदा कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। इससे न केवल रोजगार पर असर पड़ रहा है, बल्कि बिजली आपूर्ति और रखरखाव व्यवस्था के और कमजोर होने का खतरा भी बढ़ गया है।

कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को निजीकरण से भी जोड़ते हुए कहा है कि प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि मौजूदा अव्यवस्था को आधार बनाकर सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण की तैयारी की जा रही है।

अजय राय ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य रूप से लागू करने की प्रक्रिया को स्थगित किया जाए, जब तक कि यह पूरी तरह तकनीकी रूप से सक्षम और त्रुटिरहित साबित न हो जाए। उन्होंने बिजली आपूर्ति बहाली के लिए समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित करने और उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई करने की भी मांग की है।

इसके साथ ही कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर की सटीकता, बिलिंग प्रणाली और तकनीकी ढांचे का स्वतंत्र थर्ड पार्टी से पारदर्शी ऑडिट कराने पर जोर दिया है। पार्टी ने बिना पूर्व सूचना किसी भी मीटर को प्रीपेड मोड में बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

साथ ही, संविदा कर्मचारियों की छंटनी रोकने और उपभोक्ताओं के लिए एक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता भी बताई गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या उपभोक्ताओं को इस विवाद से राहत मिल पाती है।

 

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