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The Hill India > Blog > फीचर्ड > शीर्षासन के फायदे: स्किन से लेकर बालों तक असरदार, जानें करने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां
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शीर्षासन के फायदे: स्किन से लेकर बालों तक असरदार, जानें करने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

Rajesh Dabral
Last updated: April 1, 2026 9:39 am
Rajesh Dabral
Published: April 1, 2026
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बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते तनाव के बीच लोग अब अपनी सेहत को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में योग एक बार फिर लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। योग के कई आसनों में से एक प्रमुख और प्रभावशाली आसन है शीर्षासन (Sirsasana), जिसे ‘आसनों का राजा’ भी कहा जाता है। यह आसन न केवल शारीरिक मजबूती देता है, बल्कि मानसिक संतुलन और एकाग्रता को भी बढ़ाता है। विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित रूप से शीर्षासन का अभ्यास करने से शरीर के कई हिस्सों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, खासकर त्वचा और बालों पर।

क्या है शीर्षासन?

शीर्षासन दो संस्कृत शब्दों ‘शीर्ष’ यानी सिर और ‘आसन’ यानी मुद्रा से मिलकर बना है। अंग्रेजी में इसे हेडस्टैंड पोज (Headstand Pose) कहा जाता है। इस आसन में व्यक्ति सिर के बल खड़ा होकर पूरे शरीर का संतुलन बनाता है। यह एक उन्नत स्तर का योगासन है, जिसे सही तकनीक और अभ्यास के साथ करना बेहद जरूरी होता है।

शीर्षासन के प्रमुख फायदे

  1. मस्तिष्क को मिलती है ऊर्जा

शीर्षासन के दौरान शरीर उल्टा हो जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह मस्तिष्क की ओर बढ़ता है। इससे दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण मिलता है, जिससे याददाश्त, फोकस और मानसिक स्पष्टता में सुधार होता है।

  1. तनाव और चिंता में राहत

नियमित रूप से शीर्षासन करने से मानसिक तनाव कम होता है। यह आसन नर्वस सिस्टम को शांत करता है और चिंता, डिप्रेशन जैसी समस्याओं में भी राहत देता है।

  1. त्वचा में आता है निखार

जब सिर नीचे और पैर ऊपर होते हैं, तो चेहरे की ओर रक्त संचार बढ़ता है। इससे त्वचा में ग्लो आता है और झुर्रियां व पिंपल्स जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।

  1. बालों के लिए फायदेमंद

शीर्षासन बालों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन से बालों की जड़ों को पोषण मिलता है, जिससे बाल झड़ना कम हो सकता है और बाल मजबूत बनते हैं।

  1. पाचन तंत्र में सुधार

यह आसन पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं में राहत दिला सकता है। यह आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है।

  1. शरीर का संतुलन और ताकत बढ़ाता है

शीर्षासन करने से कंधे, भुजाएं और कोर मसल्स मजबूत होती हैं। यह शरीर के संतुलन को बेहतर बनाता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।

  1. हार्मोनल बैलेंस में मदद

यह आसन एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है। खासतौर पर थायरॉयड और पिट्यूटरी ग्लैंड के लिए यह लाभकारी माना जाता है।

रोज शीर्षासन करने से क्या होता है?

अगर रोजाना सही तरीके से शीर्षासन किया जाए, तो यह शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक असर डालता है। नियमित अभ्यास से न केवल शारीरिक ताकत बढ़ती है, बल्कि मानसिक स्थिरता भी आती है। त्वचा में चमक, बालों की मजबूती, बेहतर नींद और सकारात्मक सोच जैसे बदलाव धीरे-धीरे दिखाई देने लगते हैं।

शीर्षासन करने का सही तरीका

  1. सबसे पहले एक समतल स्थान पर योगा मैट बिछाएं।
  2. घुटनों के बल बैठ जाएं और दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें।
  3. हथेलियों को जमीन पर टिकाएं और सिर को उनके बीच रखें।
  4. धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं और शरीर का संतुलन बनाएं।
  5. शुरुआत में घुटनों को मोड़कर छाती के पास रखें, फिर धीरे-धीरे पैरों को सीधा करें।
  6. संतुलन बनने के बाद सामान्य सांस लेते रहें।
  7. वापस आने के लिए धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं।

कितनी देर तक करें शीर्षासन?

शुरुआती लोग 10 से 30 सेकंड तक इस आसन को करें। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाने के बाद इसे 3 से 5 मिनट तक किया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ की सलाह के बिना ज्यादा देर तक करने से बचना चाहिए।

किन लोगों को नहीं करना चाहिए शीर्षासन?

हालांकि शीर्षासन के कई फायदे हैं, लेकिन यह सभी के लिए सुरक्षित नहीं है। निम्नलिखित स्थितियों में इस आसन से बचना चाहिए—

  • उच्च रक्तचाप (High BP) के मरीज
  • चक्कर आने की समस्या वाले लोग
  • गर्दन या रीढ़ की हड्डी में दर्द या चोट
  • आंखों से जुड़ी समस्याएं जैसे ग्लूकोमा या मोतियाबिंद
  • हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति
  • गर्भवती महिलाएं

विशेषज्ञों की सलाह

योग विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्षासन एक एडवांस योगासन है, इसलिए इसे हमेशा प्रशिक्षित योग गुरु की निगरानी में ही सीखना चाहिए। गलत तरीके से करने पर गर्दन और रीढ़ पर दबाव पड़ सकता है, जिससे चोट लगने का खतरा रहता है।

योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर आप न केवल फिट रह सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और संतुलित जीवन भी जी सकते हैं।

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