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आसाराम के बेटे नारायण साईं को इंदौर कोर्ट से बड़ा झटका: पत्नी की तलाक अर्जी मंजूर, देने होंगे 2 करोड़ रुपये ‘एलिमनी’

The Hill India News
Last updated: April 8, 2026 2:52 am
The Hill India News
Published: April 8, 2026
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इंदौर | स्वयंभू बाबा आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दुष्कर्म के मामले में गुजरात की सूरत जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं को अब पारिवारिक मोर्चे पर भी बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इंदौर के स्थानीय कुटुम्ब न्यायालय (Family Court) ने नारायण साईं की पत्नी जानकी हरपलानी द्वारा दायर तलाक की अर्जी को न केवल मंजूर कर लिया है, बल्कि नारायण साईं को अपनी पत्नी को ₹2 करोड़ की भारी-भरकम स्थायी भरण-पोषण (Permanent Alimony) राशि देने का भी कड़ा आदेश जारी किया है।

Contents
6 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसलातीन महीने के भीतर करना होगा भुगतानपिछला बकाया भी नहीं किया गया अदाक्रूरता और अवैध संबंधों के आरोपों ने बदली केस की दिशासूरत जेल में बंद है नारायण साईंक्या कहता है यह फैसला?

6 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला

इंदौर की रहने वाली जानकी हरपलानी ने साल 2018 में नारायण साईं के खिलाफ तलाक का मामला दर्ज कराया था। जानकी के वकील अनुरागचंद्र गोयल ने मीडिया को बताया कि उनकी मुवक्किल ने नारायण साईं पर मानसिक क्रूरता, प्रताड़ना और अनैतिक गतिविधियों के गंभीर आरोप लगाए थे। याचिका में जानकी ने अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए एकमुश्त ₹5 करोड़ की स्थायी भरण-पोषण राशि की मांग की थी।

लंबे समय तक चली अदालती कार्यवाही और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश ने 2 अप्रैल को इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने जानकी द्वारा पेश किए गए ‘पक्के दस्तावेजी सबूतों’ को आधार मानते हुए विवाह विच्छेद (तलाक) की डिग्री जारी कर दी।

तीन महीने के भीतर करना होगा भुगतान

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि नारायण साईं को तलाक के मुआवजे और स्थायी भरण-पोषण के तौर पर ₹2 करोड़ की राशि अपनी पत्नी जानकी को देनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने इस राशि के भुगतान के लिए केवल तीन महीने का समय निर्धारित किया है। यदि नारायण साईं इस समयावधि के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा और भी कड़ा हो सकता है।

पिछला बकाया भी नहीं किया गया अदा

नारायण साईं और जानकी का विवाह साल 2008 में हुआ था। शादी के कुछ वर्षों बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया था। जानकी के वकील के अनुसार, साल 2018 में जब तलाक का मामला शुरू हुआ था, तब भी अदालत ने नारायण साईं को अंतरिम आदेश देते हुए हर महीने ₹50,000 भरण-पोषण के रूप में जानकी को देने को कहा था।

हैरानी की बात यह है कि पिछले 8 वर्षों से नारायण साईं की ओर से एक भी पैसा अदा नहीं किया गया। कोर्ट में दलील दी गई कि नारायण साईं ने न्यायिक आदेशों की लगातार अवहेलना की है, जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लिया।


क्रूरता और अवैध संबंधों के आरोपों ने बदली केस की दिशा

जानकी हरपलानी ने अपनी याचिका में केवल मानसिक क्रूरता ही नहीं, बल्कि नारायण साईं के अन्य महिलाओं के साथ संबंधों और आपराधिक मामलों में संलिप्तता का भी जिक्र किया था। जानकी ने अदालत को बताया कि जिस व्यक्ति को दुनिया ‘गुरु’ मानती थी, उसकी असलियत कुछ और ही थी। नारायण साईं ने हालांकि इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था, लेकिन कोर्ट ने जानकी द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और नारायण साईं के वर्तमान आपराधिक रिकॉर्ड (रेप केस में सजा) को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।

सूरत जेल में बंद है नारायण साईं

यह नारायण साईं तलाक केस ऐसे समय में आया है जब वह पहले से ही कानूनी दलदल में फंसा हुआ है। गौरतलब है कि सूरत की एक अदालत ने साल 2013 के एक दुष्कर्म मामले में नारायण साईं को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तब से वह गुजरात की लाजपोर जेल (सूरत) में बंद है। पिता आसाराम भी जोधपुर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

क्या कहता है यह फैसला?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर कोर्ट का यह फैसला महिलाओं के अधिकारों के प्रति एक सख्त संदेश है। अक्सर हाई-प्रोफाइल मामलों में प्रभावशाली व्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया को लंबा खींचने का प्रयास करते हैं, लेकिन ₹2 करोड़ की एलिमनी का यह आदेश दर्शाता है कि पत्नी की गरिमा और उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी से कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता, चाहे वह जेल में ही क्यों न हो।

प्रमुख बिंदु जो इस फैसले को महत्वपूर्ण बनाते हैं:

  • स्थायी सुरक्षा: कोर्ट ने ₹2 करोड़ की राशि को उचित माना ताकि महिला अपना स्वतंत्र जीवन सम्मान के साथ जी सके।

  • समय सीमा: 3 महीने के भीतर भुगतान का आदेश त्वरित न्याय की दिशा में एक कदम है।

  • सबूतों की प्राथमिकता: नारायण साईं के खंडन के बावजूद ‘पक्के दस्तावेजी सबूत’ केस का टर्निंग पॉइंट साबित हुए।

इंदौर के इस ऐतिहासिक फैसले ने नारायण साईं के पारिवारिक जीवन के अध्याय को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। अब देखना यह होगा कि जेल में बंद नारायण साईं इस राशि का इंतजाम कैसे करता है या क्या वह इस फैसले को उच्च न्यायालय (High Court) में चुनौती देता है। फिलहाल, जानकी हरपलानी के लिए यह 6 साल के संघर्ष के बाद मिली एक बड़ी कानूनी जीत है।

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