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India-Afghanistan Relations: नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में बड़ा बदलाव, तालिबान के वरिष्ठ सदस्य नूर अहमद नूर ने संभाला कार्यभार

The Hill India News
Last updated: January 10, 2026 3:10 am
The Hill India News
Published: January 10, 2026
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नई दिल्ली: अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के नियंत्रण के करीब पांच साल बाद, भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’ ने नूर अहमद नूर को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास का नया चार्ज डी’अफेयर्स (CDA) नियुक्त किया है। रिपोर्टों के अनुसार, नूर अहमद नूर अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के लिए दिल्ली पहुँच चुके हैं।

Contents
मुख्य हाइलाइट्स:मुत्ताकी की भारत यात्रा और जयशंकर के साथ हुआ ‘सीक्रेट’ समझौता?अशरफ गनी सरकार के राजनयिकों की विदाई!बांग्लादेश दौरा और क्षेत्रीय सक्रियताभारत का रुख: मान्यता नहीं, लेकिन संवाद जरूरीक्षेत्रीय राजनीति पर प्रभावआज की अन्य प्रमुख खबरें एक नजर में:

यह नियुक्ति न केवल कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है, बल्कि इसे भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (Neighborhood First) नीति के तहत अफगानिस्तान के साथ ‘प्रैग्मैटिक’ (व्यावहारिक) संबंधों के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।


मुख्य हाइलाइट्स:

  • नूर अहमद नूर: अफगान विदेश मंत्रालय के प्रथम राजनीतिक विभाग के पूर्व महानिदेशक अब दिल्ली में कमान संभालेंगे।

  • समझौता: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच हुए समझौते के बाद हुई नियुक्ति।

  • कूटनीतिक स्थिति: भारत ने अभी तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन मानवीय सहायता और तकनीकी मिशन के जरिए संबंध बहाल हैं।

  • ऐतिहासिक संदर्भ: नूर अहमद नूर उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जिसने हाल ही में देवबंद के दारुल उलूम का दौरा किया था।


मुत्ताकी की भारत यात्रा और जयशंकर के साथ हुआ ‘सीक्रेट’ समझौता?

नूर अहमद नूर की नियुक्ति की नींव अक्टूबर 2025 में पड़ी थी, जब अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी सात दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर आए थे। इस यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मुत्ताकी के बीच एक उच्च स्तरीय सहमति बनी थी।

इस समझौते के तहत भारत ने नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास के लिए इस्लामिक अमीरात द्वारा नियुक्त राजनयिकों को स्वीकार करने पर हामी भरी थी। नूर अहमद नूर, जो तालिबान के एक वरिष्ठ और अनुभवी सदस्य हैं, उसी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो मुत्ताकी के साथ भारत आया था। अपनी उस यात्रा के दौरान उन्होंने देवबंद स्थित प्रसिद्ध दारुल उलूम मदरसे का दौरा भी किया था, जिसे सांस्कृतिक कूटनीति के तौर पर देखा गया।


अशरफ गनी सरकार के राजनयिकों की विदाई!

अब तक नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास का संचालन पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार द्वारा नियुक्त सईद मोहम्मद इब्राहिम खिल कर रहे थे। हालांकि, मुंबई और हैदराबाद स्थित अफगान वाणिज्य दूतावास (Consulates) पहले ही तालिबान द्वारा नियुक्त राजनयिकों के जरिए संचालित हो रहे थे। अब दिल्ली दूतावास में नूर अहमद नूर की एंट्री से गनी प्रशासन के दौर के राजनयिक युग का औपचारिक अंत होता दिख रहा है।


बांग्लादेश दौरा और क्षेत्रीय सक्रियता

नूर अहमद नूर केवल भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी सक्रिय रहे हैं। दिसंबर 2025 में उन्होंने बांग्लादेश का दौरा किया था। वहां के चुनावों से ठीक पहले हुई इस यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना गया था, जहां उन्होंने कई प्रमुख इस्लामी नेताओं से मुलाकात की थी। उनकी यह सक्रियता दर्शाती है कि तालिबान अब वैश्विक कूटनीति में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए अनुभवी चेहरों को आगे कर रहा है।


भारत का रुख: मान्यता नहीं, लेकिन संवाद जरूरी

भारत सरकार ने अभी तक तालिबान सरकार को ‘औपचारिक मान्यता’ नहीं दी है। हालांकि, भारत का स्टैंड स्पष्ट रहा है:

  1. मानवीय सहायता: भारत लगातार अफगानिस्तान को अनाज, दवाएं और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध करा रहा है।

  2. सुरक्षा चिंताएं: अफगानिस्तान की धरती का उपयोग भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए न हो, इसके लिए संवाद अनिवार्य है।

  3. तकनीकी मिशन: काबुल में भारत का एक ‘तकनीकी मिशन’ पहले से ही सक्रिय है, जो दोनों देशों के बीच सेतु का काम कर रहा है।


क्षेत्रीय राजनीति पर प्रभाव

नूर अहमद नूर की दिल्ली में नियुक्ति यह संकेत देती है कि भारत और काबुल के बीच ‘बर्फ पिघल’ रही है। यह कदम क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कूटनीतिक मेलजोल भविष्य में पूर्ण मान्यता की ओर बढ़ता है या यह केवल मानवीय और तकनीकी कार्यों तक सीमित रहता है।


आज की अन्य प्रमुख खबरें एक नजर में:

  • जयपुर हादसा: पत्रकार कॉलोनी में बेकाबू ऑडी ने 16 लोगों को रौंदा, 1 की मौत, 15 घायल। सीएम भजनलाल ने दिए जांच के आदेश।

  • मौसम अपडेट: उत्तर भारत में ‘कोल्ड डे’ का कहर, यूपी के अलीगढ़-मथुरा में ओलावृष्टि का अलर्ट।

  • UP चुनाव अपडेट: वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए निर्वाचन आयोग ने शुरू की ‘बुक-ए-कॉल विद बीएलओ’ सेवा।

  • हल्द्वानी: पत्नी से विवाद के बाद दिल्ली गए दो दोस्तों के शव रेलवे ट्रैक पर मिले, इलाके में हड़कंप।

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