
नई दिल्ली/दुबई। दुबई का आसमान शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के स्वदेशी ताकत के सबसे दमदार प्रदर्शन का साक्षी बनने वाला था। दुनिया के 50 से अधिक देशों के रक्षा विशेषज्ञ अपनी निगाहें भारत के ‘तेजस’ पर टिकाए बैठे थे—वो हल्का लड़ाकू विमान जिसने पिछले दशक में भारतीय एयरोस्पेस क्षमता का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया। लेकिन जो शुक्रवार भारतीय तकनीक और साहस का प्रदर्शन बनने वाला था, वह अचानक मातम में बदल गया। कुछ ही सेकंड में आसमान से उठे एक धमाके ने भारत सहित पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। भारत ने अपना एक और बहादुर सपूत खो दिया—स्क्वाड्रन लीडर नमांश स्याल।
तेजस की उड़ान और वह आखिरी सेकंड…
दुबई एयर शो-2025 का माहौल उमंग और उत्साह से भरा था। अभ्यास सत्र चल रहा था और भारतीय ‘तेजस’ अपनी तेज़ी, चपलता और सटीक maneuvering के लिए दर्शकों का ध्यान खींच रहा था। भारतीय वायुसेना इस वर्ष के एयर शो को भारत की रक्षा क्षमताओं के प्रदर्शन के बड़े अवसर के रूप में देख रही थी।
सामने रनवे पर तेजस ने अभ्यास उड़ान भरते हुए एक रूटीन हाई-वर्टिकल क्लाइंब किया। सब कुछ सामान्य था। अचानक—एक तेज धमाका। कुछ ही पलों में विमान हवा में टुकड़ों में बिखरता नज़र आया। कंट्रोल टॉवर के साथ संपर्क भी टूट गया।
सेकंड भर की उस खामोशी के बाद, पूरे एयरबेस पर सायरन गूंजने लगे।
भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि दुर्घटना में पायलट स्क्वाड्रन लीडर नमांश स्याल की मृत्यु हो गई। बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
कौन थे स्क्वाड्रन लीडर नमांश स्याल?
34 वर्षीय नमांश स्याल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का ऐसा नाम था, जिस पर पूरा जिला गर्व करता था। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था लेकिन सपने बहुत बड़े थे। बचपन से ही जेट विमानों, आकाश और राष्ट्र सेवा के प्रति उनका आकर्षण इतना गहरा था कि उन्होंने महज 10 साल की उम्र में ही तय कर लिया था कि वह भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनेंगे।
- पिता गगन कुमार — रिटायर्ड प्रिंसिपल
- मां वीना देवी — गृहणी
- एक बहन — जो अब अपने भाई के पार्थिव शरीर का इंतज़ार करती हुई गम में डूबी है।
नमांश अपनी यूनिट में ‘शांत लेकिन बेहद सटीक हाथ वाला पायलट’ के रूप में पहचाने जाते थे। उनकी flying hours संख्या 1700 से अधिक थी—जो उनकी दक्षता और सटीकता को दर्शाती है।
उनके सहयोगियों का कहना है कि नमांश हमेशा मुस्कुराते रहते थे, और विमान उड़ाते समय उनकी आंखों में एक अलग ही चमक होती थी—वह चमक जो अपने सपनों को जीने वाले व्यक्ति में होती है।
तेजस: भारत की उम्मीद और सामर्थ्य का प्रतीक
तेजस का क्रैश इसलिए भी देश के लिए बेहद दर्दनाक है क्योंकि यह विमान भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जाता है। एचएएल द्वारा विकसित यह फाइटर जेट पिछले कुछ वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों का ध्यान खींच चुका है।
तेजस की खासियतें:
- अत्याधुनिक एवियोनिक्स
- अत्यंत maneuverability
- कम वजन लेकिन शक्तिशाली इंजन
- आधुनिक हथियार प्रणाली
- दुनिया के कई एयर शो में सफल प्रदर्शन
लेकिन शुक्रवार की दुर्घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि तकनीक कितनी ही उन्नत क्यों न हो, आकाश में उड़ान हमेशा जोखिम भरी होती है—और यह जोखिम सबसे पहले पायलट उठाता है।
घर में मातम, गांव में सन्नाटा
कांगड़ा जिले के पटियालकर वार्ड नंबर 7 में रहने वाला स्याल परिवार इस हादसे की खबर सुनते ही टूट गया। जो मां अपने बेटे के लिए रोज दुआ करती थी, वह अब उसके अंतिम दर्शन की प्रतीक्षा कर रही है। पिता का कंधा, जिसे बेटा बूढ़ापे में सहारा देने वाला था, अब उसी कंधे पर शहीद बेटे का पार्थिव शरीर आएगा।
गांव में जैसे ही यह खबर पहुंची, पूरा इलाका स्तब्ध रह गया। नमांश की शहादत ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डाल दिया है। लोग घर के बाहर जमा होने लगे। हर चेहरे पर दुख और गर्व दोनों दिखाई दे रहा था।
सरकार और वायुसेना की प्रतिक्रिया
भारतीय वायुसेना ने तुरंत उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। हादसे की वजह इंजन फेलियर थी या किसी तकनीकी खराबी का परिणाम, इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और वायुसेना सभी ने दुबई अधिकारियों से संपर्क स्थापित कर लिया है। नमांश स्याल के पार्थिव शरीर को विशेष सम्मान के साथ भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा:“स्क्वाड्रन लीडर नमांश स्याल की शहादत राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा। उनका बलिदान भारत की रक्षा शक्ति के प्रति समर्पण और साहस की मिसाल है।”
रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया:“भारत ने अपना वीर पुत्र खोया है। वायुसेना इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है।”
दुबई एयर शो के आयोजकों के लिए बड़ा झटका
यह हादसा अंतरराष्ट्रीय एयर शो के इतिहास में एक बड़ा हादसा माना जाएगा। आयोजकों ने भारतीय वायुसेना के साहस की सराहना की और सुरक्षा प्रोटोकॉल की पुनः समीक्षा शुरू कर दी है।
दुबई के रक्षा अधिकारियों ने कहा: “यह दुखद घटना न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे एरोस्पेस समुदाय के लिए एक बड़ा नुकसान है।”
एक बहादुर पायलट की अमर कहानी
स्क्वाड्रन लीडर नमांश स्याल भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी उड़ान, उनका साहस और उनका बलिदान हमेशा भारतीय वायुसेना के इतिहास में दर्ज रहेगा। वह उन चुनिंदा पायलटों में से थे जो देश के स्वदेशी फाइटर जेट को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उड़ाने का गौरव रखते थे।
उनकी शहादत भारत के हर नागरिक के लिए गर्व और भावुकता का क्षण है। एक और वीर आसमान में खो गया, लेकिन उसकी कहानी हमेशा धरती पर जीवित रहेगी।



