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हार नहीं मानूंगा: 35 असफलताओं के बाद भी नहीं टूटा हौसला, IPS बनने के बाद फिर UPSC क्रैक कर बने IAS

The Hill India News
Last updated: April 22, 2026 6:06 am
The Hill India News
Published: April 22, 2026
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Success Story: असफलता को अक्सर लोग अंत मान लेते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इसे अपनी ताकत बना लेते हैं। हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले विजय वर्धन की कहानी इसी जज़्बे और अटूट संकल्प की मिसाल है। 35 बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार न केवल UPSC परीक्षा पास की, बल्कि पहले IPS अधिकारी बने और फिर अपने सपने को पूरा करते हुए IAS अधिकारी भी बन गए।

विजय वर्धन का सफर आसान नहीं था। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अपनी पढ़ाई पूरी की और इसके बाद अपने सपनों को साकार करने के लिए दिल्ली का रुख किया। उनका लक्ष्य साफ था—देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, UPSC को पास करना। लेकिन इस राह में उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। हरियाणा PCS, उत्तर प्रदेश PCS, SSC समेत करीब 35 प्रतियोगी परीक्षाओं में वे असफल रहे। इतनी बार असफल होना किसी भी व्यक्ति के आत्मविश्वास को तोड़ सकता है, लेकिन विजय वर्धन ने हर बार खुद को संभाला और आगे बढ़ते रहे।

उनकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने असफलताओं को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वे हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करते थे और उन्हें सुधारने की कोशिश करते थे। उनका मानना था कि असफलता केवल यह बताती है कि किस दिशा में सुधार की जरूरत है। यही सोच उन्हें बाकी उम्मीदवारों से अलग बनाती है।

विजय वर्धन का कहना है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि धैर्य और आत्मविश्वास भी बेहद जरूरी है। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान कई बार मानसिक दबाव और निराशा का सामना किया, लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। परिवार और दोस्तों का समर्थन भी उनके लिए एक बड़ी ताकत बना।

कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयासों का परिणाम आखिरकार साल 2018 में सामने आया, जब उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 104 हासिल की। इस उपलब्धि के साथ वे IPS अधिकारी बने। हालांकि, उन्होंने यहीं रुकने का फैसला नहीं किया। उनका सपना IAS अधिकारी बनने का था, इसलिए उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

विजय वर्धन ने एक बार फिर पूरे समर्पण के साथ UPSC की तैयारी शुरू की। उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया, अपनी कमजोरियों पर ज्यादा ध्यान दिया और पहले से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश की। उनकी यह मेहनत रंग लाई और साल 2021 में उन्होंने एक बार फिर UPSC परीक्षा पास की। इस बार उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करते हुए IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।

उनकी यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। विजय वर्धन की कहानी यह सिखाती है कि असफलता कोई अंत नहीं है, बल्कि यह सफलता की दिशा में एक जरूरी कदम है। यदि व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और खुद पर विश्वास हो, तो वह किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

आज के समय में जब युवा जल्दी हार मान लेते हैं, विजय वर्धन का यह संघर्ष उन्हें एक नई दिशा देता है। यह कहानी बताती है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए वर्षों की मेहनत, धैर्य और संघर्ष की जरूरत होती है।

विजय वर्धन की यात्रा हमें यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है। उनकी कहानी उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।

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