हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध कांवड़ मेले के लिए धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह तैयार दिखाई दे रही है। इस वर्ष प्रशासन को लगभग पांच करोड़ कांवड़ियों के आगमन की उम्मीद है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या में संभावित भारी वृद्धि को देखते हुए उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य सभी संबंधित एजेंसियों ने व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रशासन का लक्ष्य इस बार कांवड़ मेले को सुरक्षित, व्यवस्थित, स्वच्छ और सुचारु तरीके से संपन्न कराना है, ताकि देशभर से आने वाले शिवभक्त बिना किसी परेशानी के गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
पिछले वर्ष हरिद्वार में लगभग चार करोड़ कांवड़िए गंगाजल लेने पहुंचे थे। इस बार यह संख्या बढ़कर पांच करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इसी कारण सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात प्रबंधन तक हर स्तर पर विशेष योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव आनंद वर्धन स्वयं हरिद्वार पहुंचकर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर चुके हैं। बैठक में सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से व्यवस्थाएं पूरी करने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती जंगलों और वन क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले मार्गों की सुरक्षा होती है। हरिद्वार के आसपास कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां हाथियों और गुलदारों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। विशेष रूप से जगजीतपुर और श्यामपुर क्षेत्र वन्यजीवों की गतिविधियों के लिए संवेदनशील माने जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने व्यापक रणनीति तैयार की है। संवेदनशील स्थानों पर वनकर्मियों की विशेष टीमें चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी। साथ ही जंगलों के किनारे और कांवड़ मार्गों के आसपास उगी झाड़ियों की लगातार कटाई कराई जा रही है ताकि वन्यजीवों की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सके और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार का खतरा न हो।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान लगातार गश्त की जाएगी और यदि किसी स्थान पर हाथी या गुलदार की मौजूदगी की सूचना मिलती है तो तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे जंगलों के किनारे अनावश्यक रूप से न रुकें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
स्वास्थ्य विभाग ने भी इस बार कांवड़ मेले को देखते हुए बड़े पैमाने पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की है। पूरे मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग पर 32 अस्थायी अस्पताल स्थापित किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस और सभी आवश्यक दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। विशेष रूप से सांप के काटने की स्थिति में उपयोग होने वाली एंटी वेनम तथा कुत्ते के काटने पर लगने वाले एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा प्राथमिक उपचार से जुड़ी अन्य सभी दवाएं और चिकित्सा उपकरण भी अस्पतालों में रखे जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी हैं। पूरे मेले के दौरान चिकित्सकीय टीमें अलर्ट मोड पर रहेंगी। गंगा घाटों पर किसी दुर्घटना की स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें विशेष रूप से तैनात रहेंगी। इसके साथ ही नदी में किसी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाने के लिए वाटर एंबुलेंस का भी संचालन किया जाएगा। इससे डूबने जैसी घटनाओं में तेजी से बचाव और उपचार संभव हो सकेगा।
कांवड़ मेले को सुचारु बनाने के लिए प्रशासन ने शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान भी तेज कर दिया है। नगर निगम, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। कांवड़ मार्गों और प्रमुख बाजारों के आसपास बनी अवैध दुकानों तथा अस्थायी अतिक्रमणों को जेसीबी मशीनों की सहायता से हटाया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि मार्गों को पूरी तरह खुला रखने से श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान होगी और किसी भी प्रकार की भगदड़ या जाम जैसी स्थिति से बचा जा सकेगा।
हरिद्वार में इन दिनों आगामी कुंभ मेले की तैयारियां भी चल रही हैं, लेकिन फिलहाल कांवड़ मेले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण कुंभ से जुड़े नए विकास कार्यों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है। कांवड़ मार्गों पर चल रहे निर्माण कार्य भी फिलहाल बंद कर दिए गए हैं ताकि भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन का कहना है कि कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद कुंभ मेले से जुड़े सभी विकास कार्य दोबारा शुरू किए जाएंगे।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे यात्रा के दौरान सावधानी बरतें। खेतों और जंगलों से होकर गुजरने वाले मार्गों पर सांप, बिच्छू, आवारा कुत्तों और बंदरों से सतर्क रहें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र, पुलिस सहायता केंद्र या कंट्रोल रूम से संपर्क करें। इसके अलावा यात्रा के दौरान भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में धैर्य बनाए रखें और प्रशासन द्वारा निर्धारित रूट प्लान का पालन करें।
वन विभाग के अनुसार संवेदनशील इलाकों में चौबीस घंटे निगरानी रखी जाएगी और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिलाया है कि सभी अस्थायी अस्पताल पूरी तरह तैयार रहेंगे और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा टीमें भी तैनात की जाएंगी। जिला प्रशासन का कहना है कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
हरिद्वार प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य इस वर्ष के कांवड़ मेले को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाना है। सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यदि सभी तैयारियां योजनानुसार लागू होती हैं तो इस बार का कांवड़ मेला न केवल विशाल श्रद्धालु संख्या के कारण बल्कि अपनी बेहतर व्यवस्थाओं और प्रभावी प्रशासनिक समन्वय के कारण भी एक नई मिसाल बन सकता है। देशभर से आने वाले करोड़ों शिवभक्तों के स्वागत के लिए धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह तैयार है और प्रशासन हर चुनौती से निपटने के लिए चौबीसों घंटे सतर्क रहने का दावा कर रहा है।
