उत्तराखंडफीचर्ड

अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट से राहत के बाद बोले पूर्व विधायक सुरेश राठौर — “गोल्ज्यू देवता पर पूरा विश्वास, न्याय अवश्य मिलेगा”

हरिद्वार, 8 जनवरी। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ी कथित वीआईपी कंट्रोवर्सी में मिली कानूनी राहत के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने गुरुवार को हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें न्याय पर पूरा भरोसा है और सच्चाई अवश्य सामने आएगी।

राठौर ने कहा कि इस पूरे प्रकरण को लेकर जो भी भ्रम और विवाद खड़ा किया गया, उसके पीछे राजनीतिक षड्यंत्र रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने अंकिता के नाम पर प्रदेश में माहौल को दूषित किया और भावनाओं को भड़काकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।

“गोल्ज्यू देवता न्याय देंगे”

मीडिया से बातचीत के दौरान सुरेश राठौर ने भावनात्मक लहजे में कहा कि वे न्याय की उम्मीद के साथ अब तक दो बार गोल्ज्यू देवता मंदिर में मत्था टेक चुके हैं। राठौर ने कहा, “गोल्ज्यू देवता न्याय के देवता हैं। मुझे विश्वास है कि वही सच्चाई को सबके सामने लाएंगे। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, मैं भगवा वस्त्र धारण नहीं करूंगा।”

पूर्व विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि वे शुरुआत से ही जांच प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसका निर्णय अदालत और सरकार के हाथ में है।

उर्मिला पर गंभीर आरोप

सुरेश राठौर ने प्रेस वार्ता में कहा कि उर्मिला द्वारा सोशल मीडिया और जनसभाओं में उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उर्मिला ने समाज और संत समुदाय के साथ धोखा किया है और राजनीतिक विरोधियों के इशारे पर उन्हें और उनके साथियों को फंसाने की कोशिश की जा रही है।

राठौर का कहना था कि उन्होंने डेढ़ साल पहले ही उर्मिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अगर उस समय कार्रवाई होती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने कहा, “तीन साल से उर्मिला मेरा उत्पीड़न कर रही है। झूठे ऑडियो-वीडियो बनाकर मेरी छवि बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।”

वायरल ऑडियो एआई से तैयार किया गया

मामले में एक और बड़ा दावा करते हुए राठौर ने कहा कि उर्मिला द्वारा वायरल किया गया उनका कथित ऑडियो एआई तकनीक से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी नेता या व्यक्ति के खिलाफ कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की। “यह फर्जी ऑडियो एआई से बनाई गई है। मैं एसआईटी द्वारा किसी भी प्रकार की तकनीकी जांच के लिए तैयार हूं,” राठौर ने कहा।

उन्होंने यह भी दोहराया कि वे अंकिता भंडारी हत्याकांड के किसी भी बिंदु पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हैं। “मैं चश्मदीद गवाह नहीं हूं, जैसा कि उर्मिला कह रही है। यह सब मुझे बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है,“।

कांग्रेस पर हमला, “अंकिता के नाम पर राजनीति” का आरोप

पूर्व विधायक ने विपक्षी दल कांग्रेस पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले का राजनीतिकरण किया और जनता की भावनाओं को भड़काकर प्रदेश का माहौल खराब किया। उन्होंने कहा, “अंकिता के प्रति हम सबकी संवेदना है, लेकिन कांग्रेस ने इस संवेदनशील मुद्दे को जनआकर्षण का माध्यम बना लिया। राजनीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जो न्याय की राह में बाधा बने।”

राठौर ने आगे कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और कुछ सामाजिक संगठनों ने बिना तथ्यों की जांच किए सड़क पर प्रदर्शन कर माहौल बिगाड़ा। उन्होंने अपील की कि ऐसी घटनाओं पर समाज को भावनाओं में बहने के बजाय तथ्यों के आधार पर ही प्रतिक्रिया करनी चाहिए।

रविदास पीठ को बदनाम करने का प्रयास

अपने संबोधन में राठौर ने कहा कि रविदास पीठ, जो एक सामाजिक और धार्मिक संस्था के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, उसे भी इस विवाद में अनुचित रूप से घसीटा गया है। उन्होंने कहा कि विरोधियों ने जानबूझकर इस संस्था की छवि खराब करने की कोशिश की ताकि संत समाज में भ्रम पैदा हो।

उन्होंने कहा, “मैंने आज तक किसी के लिए कोई अपशब्द नहीं कहा। मेरे संस्कार ऐसे नहीं हैं। अगर किसी को न्याय नहीं मिला या किसी दोषी को सजा नहीं हुई, तो सरकार और अदालत ही उचित निर्णय लेंगी।”

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड 2022 में सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। यह मामला एक वीआईपी रिजॉर्ट से जुड़ा था, जहां अंकिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) गठित की थी। उसी दौरान कुछ ऑडियो-वीडियो क्लिप्स वायरल हुए थे, जिनमें कथित रूप से राजनीति और प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आए।

इन वायरल क्लिप्स से जुड़ी एक पंक्ति में पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नाम भी उछाला गया था। हालांकि राठौर ने लगातार इस संबंध को झूठा और राजनीतिक षड्यंत्र बताया है। हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उनसे संबंधित सभी मामलों में उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की है, जिसके बाद उनकी यह पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया आई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button