भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर लंबे समय से अपने काम करने के तरीके और आक्रामक तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। जब भी टीम इंडिया का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता, गंभीर की कोचिंग और उनकी रणनीतियों पर सवाल उठने लगते हैं। खासकर टेस्ट क्रिकेट में टीम के खराब प्रदर्शन के बाद उनकी भूमिका को लेकर फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स के बीच बहस तेज हुई है। हालांकि, अब भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर और गंभीर के पुराने साथी हरभजन सिंह ने उनके बचाव में खुलकर अपनी बात रखी है।
हरभजन सिंह का कहना है कि उन्हें यह बात समझ नहीं आती कि टीम के खराब प्रदर्शन के लिए हर बार सिर्फ कोच को ही जिम्मेदार क्यों माना जाता है। उन्होंने गंभीर को एक ‘बहुत बढ़िया इंसान’ बताते हुए कहा कि वह सीधे और साफ शब्दों में अपनी बात रखने वाले व्यक्ति हैं। हरभजन के मुताबिक, गंभीर की बातें कई बार लोगों को कड़वी लग सकती हैं, लेकिन असल में वह केवल कड़वी सच्चाई सामने रखते हैं।
गंभीर को लेकर हरभजन ने कही बड़ी बात
PTI हेडक्वार्टर में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान हरभजन सिंह से गौतम गंभीर के व्यक्तित्व और लगातार हो रही उनकी आलोचना को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर हरभजन ने कहा कि उन्हें कभी समझ नहीं आया कि जब टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं करती तो लोगों की नजर सबसे पहले कोच पर ही क्यों जाती है।
हरभजन ने कहा कि वह गंभीर को लंबे समय से जानते हैं और उनके लिए गंभीर का व्यक्तित्व काफी अलग है। उनके मुताबिक, गंभीर जब क्रिकेट खेलते थे, तब भी बेहद जुनूनी और टीम को प्राथमिकता देने वाले खिलाड़ी थे। वह मैदान पर जीत के लिए पूरी ताकत लगाने में विश्वास रखते थे और यही सोच अब उनके कोचिंग करियर में भी दिखाई देती है।
हरभजन के मुताबिक, गंभीर ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने मन की बात खुलकर कहते हैं। वह किसी बात को घुमाकर पेश करने के बजाय सीधे मुद्दे पर आते हैं। यही उनका अंदाज कई बार लोगों को पसंद नहीं आता और उनकी छवि को लेकर अलग-अलग धारणाएं बनने लगती हैं।
‘वो बहुत बढ़िया इंसान हैं’
गौतम गंभीर के व्यवहार का बचाव करते हुए हरभजन सिंह ने साफ कहा कि गंभीर को केवल उनकी सार्वजनिक छवि के आधार पर आंकना सही नहीं है। उन्होंने उन्हें बेहद सीधा-सादा और समझदार इंसान बताया।
हरभजन ने कहा कि कई लोगों को गंभीर की बातें कड़वी लग सकती हैं, लेकिन वह जो कहते हैं, उसमें सच्चाई होती है। समस्या यह है कि हर व्यक्ति सच्चाई को उसी तरह स्वीकार नहीं कर पाता। गंभीर के बोलने का अंदाज भी ऐसा है कि कई बार लोग उन्हें कठोर या मुश्किल स्वभाव का व्यक्ति समझ लेते हैं।
लेकिन हरभजन का मानना है कि किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को समझने के लिए उसके साथ समय बिताना और उसे करीब से जानना जरूरी है। सिर्फ टीवी पर दिखाई देने वाली छवि या मैदान पर उनके आक्रामक व्यवहार के आधार पर किसी के बारे में राय बनाना उचित नहीं है।
युवा गंभीर के दोस्त कौन थे? हरभजन ने किया खुलासा
हरभजन सिंह ने गौतम गंभीर के शुरुआती क्रिकेट करियर के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब गंभीर पहली बार भारतीय टीम में आए थे, तब वह ज्यादा बातचीत करने वाले खिलाड़ी नहीं थे। वह ड्रेसिंग रूम में कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों के साथ ही ज्यादा समय बिताते थे।
हरभजन के मुताबिक, गंभीर के करीबी दोस्तों के समूह में वीरेंद्र सहवाग, अमित मिश्रा और मुनाफ पटेल शामिल थे। वह इन्हीं खिलाड़ियों के साथ ज्यादा समय बिताते थे और धीरे-धीरे टीम के माहौल में घुलते-मिलते गए।
हरभजन ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि आज भी इन सभी के बीच उसी तरह की दोस्ती है या नहीं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि पुराने रिश्ते अभी भी कायम होंगे। यह बात गंभीर के उस पक्ष को सामने लाती है, जो आमतौर पर मैदान पर दिखाई नहीं देता।
गंभीर के लिए सबसे अहम है जीत
हरभजन सिंह ने गौतम गंभीर की क्रिकेट सोच को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उनके मुताबिक, गंभीर की मानसिकता हमेशा से जीतने की रही है और कोच बनने के बाद भी उनकी प्राथमिकता यही है कि टीम जीत के इरादे से मैदान पर उतरे।
हरभजन ने कहा कि गंभीर ऐसी क्रिकेट को पसंद करते हैं जिसमें टीम मैच जीतने के लिए प्रयास करे। अगर जीत के प्रयास में हार भी मिलती है तो शायद गंभीर को उससे उतनी परेशानी नहीं होगी, जितनी मैच को सिर्फ ड्रॉ कराने के इरादे से खेलने से होगी।
यही सोच गंभीर की कोचिंग शैली में भी दिखाई देती है। वह खिलाड़ियों से आक्रामक क्रिकेट खेलने और परिणाम के लिए प्रयास करने की उम्मीद करते हैं। हालांकि, इस तरह की सोच के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। कई बार आक्रामक रणनीति का परिणाम जीत के बजाय हार के रूप में सामने आ सकता है और ऐसे समय में कोच की रणनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
टेस्ट क्रिकेट में खराब प्रदर्शन बना सबसे बड़ी चुनौती
गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारतीय क्रिकेट टीम ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी कोचिंग के दौरान टीम ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में महत्वपूर्ण खिताब अपने नाम किए हैं। लेकिन दूसरी तरफ टेस्ट क्रिकेट में टीम के प्रदर्शन ने गंभीर के लिए सबसे बड़ी चुनौती खड़ी की है।
ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ भारत को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। घरेलू परिस्थितियों में भी टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और टेस्ट क्रिकेट में लगातार खराब नतीजों ने गंभीर की रणनीतियों पर सवाल खड़े किए।
खासकर घरेलू मैदान पर टेस्ट सीरीज में खराब प्रदर्शन के बाद क्रिकेट फैंस के बीच यह चर्चा तेज हुई कि आखिर टीम की रणनीति में कहां कमी रह गई। बल्लेबाजी, गेंदबाजी, टीम चयन और खिलाड़ियों के इस्तेमाल से लेकर कप्तानी और कोचिंग तक कई पहलुओं पर बहस हुई।
इसी वजह से गंभीर की आलोचना भी बढ़ी। हालांकि, हरभजन सिंह का मानना है कि किसी भी टीम के प्रदर्शन की जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति पर डालना उचित नहीं है।
हरभजन बोले- धारणाओं के आधार पर गंभीर को आंकना गलत
हरभजन सिंह ने गंभीर के व्यक्तित्व को लेकर बनी धारणाओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को सिर्फ उसके बाहरी व्यवहार के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए।
गंभीर का मैदान पर आक्रामक रवैया किसी से छिपा नहीं है। खिलाड़ी के रूप में भी वह भावनाओं को खुलकर जाहिर करते थे और कोच बनने के बाद भी उनका जुनून दिखाई देता है। लेकिन हरभजन के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि गंभीर खराब इंसान हैं या उनके इरादे गलत हैं।
उन्होंने गंभीर को एक बुद्धिमान व्यक्ति बताते हुए कहा कि उन्हें क्रिकेट की अच्छी समझ है। वह जानते हैं कि खेल किस तरह खेला जाना चाहिए और टीम से किस तरह का प्रदर्शन अपेक्षित है।
कोच पर सवाल उठाना कितना सही?
क्रिकेट में टीम के प्रदर्शन के बाद कोच और कप्तान पर सवाल उठना कोई नई बात नहीं है। जब टीम लगातार जीतती है तो कोचिंग स्टाफ को श्रेय मिलता है और जब नतीजे खराब होते हैं तो उसी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। लेकिन हरभजन का कहना है कि टीम का प्रदर्शन सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है।
एक मैच या सीरीज में हार के पीछे कई कारण हो सकते हैं। खिलाड़ियों का प्रदर्शन, चोट, टीम चयन, परिस्थितियां, विपक्षी टीम की रणनीति और मैदान की स्थिति जैसे कई पहलू परिणाम को प्रभावित करते हैं। ऐसे में केवल कोच को जिम्मेदार ठहराना सही तस्वीर पेश नहीं करता।
गंभीर के मामले में भी यही बहस देखने को मिल रही है। एक तरफ उनके कार्यकाल की उपलब्धियां हैं, तो दूसरी तरफ टेस्ट क्रिकेट में मिली बड़ी हार हैं। ऐसे में उनका आकलन केवल एक पक्ष के आधार पर करना उचित नहीं होगा।
गंभीर की ‘कड़वी सच्चाई’ वाली छवि बनी चर्चा का विषय
गौतम गंभीर की सबसे बड़ी खासियत और आलोचना का कारण शायद उनका बेबाक अंदाज ही है। वह अपनी बात को बहुत ज्यादा सजाकर पेश करने के बजाय सीधे तौर पर कहने के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उनके बयान कई बार सुर्खियां बन जाते हैं।
हरभजन सिंह ने इसी पहलू को गंभीर के व्यक्तित्व की सच्चाई बताते हुए कहा कि लोग उनकी बातों को कड़वा मान सकते हैं, लेकिन कई बार वह जरूरी सच्चाई होती है। उनका मानना है कि गंभीर का मकसद टीम को बेहतर बनाना है और वह चाहते हैं कि भारतीय टीम मैदान पर जीतने की मानसिकता के साथ उतरे।
आने वाले समय में गंभीर के सामने बड़ी जिम्मेदारी
गौतम गंभीर के लिए आने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय क्रिकेट टीम से उम्मीदें हमेशा बहुत ज्यादा रहती हैं और खासकर टेस्ट क्रिकेट में टीम की प्रतिष्ठा को बनाए रखना बड़ी चुनौती है। सीमित ओवरों में सफलता के बावजूद टेस्ट क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन करना उनके कार्यकाल की बड़ी परीक्षा होगी।
हरभजन सिंह के बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि गंभीर को उनके नतीजों से आंकना चाहिए या उनकी पूरी सोच और काम करने के तरीके को भी समझना चाहिए। फिलहाल इतना साफ है कि गंभीर को लेकर भारतीय क्रिकेट में राय बंटी हुई है।
कुछ लोग उनके आक्रामक रवैये और स्पष्ट सोच को टीम के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ लोग उनके फैसलों और रणनीतियों पर सवाल उठाते हैं। लेकिन हरभजन सिंह जैसे पूर्व साथी खिलाड़ी का समर्थन यह जरूर बताता है कि गंभीर की सार्वजनिक छवि के पीछे एक अलग व्यक्तित्व भी मौजूद है।
हरभजन की बातों का सार यही है कि गौतम गंभीर को केवल उनके सख्त अंदाज से नहीं, बल्कि उनके क्रिकेट ज्ञान, टीम के प्रति प्रतिबद्धता और जीतने की मानसिकता से भी समझना चाहिए। आलोचना खेल का हिस्सा है, लेकिन किसी व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व का फैसला केवल उसके कुछ बयानों या खराब नतीजों के आधार पर करना शायद उचित नहीं होगा।
