शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर देशभर के लाखों सरकारी शिक्षकों के बीच चल रही असमंजस की स्थिति पर केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट और महत्वपूर्ण जवाब दिया है। लंबे समय से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसी कोई योजना विचाराधीन नहीं है। इसका मतलब है कि जिन शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) लागू होती है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी ही होगी। सरकार का यह रुख देशभर के उन शिक्षकों के लिए अहम है जो लंबे समय से इस विषय पर किसी राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे।
संसद में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा से संबंधित नियम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप लागू हैं और सरकार इन्हें समाप्त करने या इनमें किसी प्रकार की छूट देने पर फिलहाल विचार नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद TET केवल नई नियुक्तियों के लिए ही नहीं, बल्कि पात्र मामलों में पदोन्नति (Promotion) के लिए भी आवश्यक माना गया है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से TET को लेकर चर्चा इसलिए तेज हुई थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत कार्यरत उन शिक्षकों के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था, जिन्होंने अब तक TET उत्तीर्ण नहीं किया है। अदालत ने कहा था कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा। इस फैसले के बाद देशभर के कई राज्यों में शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ गई थी और सरकार से इस नियम में राहत देने की मांग भी उठने लगी थी।
हालांकि बाद में दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को आंशिक राहत जरूर दी। अदालत ने TET पास करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी, ताकि शिक्षकों को परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सके। इसके साथ ही अदालत ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया कि वे प्रत्येक वर्ष कम से कम दो बार TET आयोजित करने का प्रयास करें, जिससे सभी पात्र शिक्षकों को समय पर परीक्षा देने का अवसर मिल सके।
संसद में सरकार से यह भी पूछा गया कि क्या लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनके अनुभव को देखते हुए TET की अनिवार्यता से छूट देने पर विचार किया जा रहा है। इस पर सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। यानी केवल वर्षों की सेवा या अनुभव के आधार पर किसी भी शिक्षक को TET से स्वतः छूट नहीं मिलेगी। जिन शिक्षकों पर यह नियम लागू होता है, उन्हें तय समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
केंद्र सरकार का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा का मुख्य उद्देश्य देश के विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने TET को शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता के रूप में निर्धारित किया है, ताकि विद्यालयों में केवल योग्य, प्रशिक्षित और आवश्यक शिक्षण दक्षता रखने वाले शिक्षक ही विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करें। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बेहतर होगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यह नियम मुख्य रूप से उन सेवारत शिक्षकों पर लागू होगा, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवा में अभी पांच वर्ष से अधिक समय शेष है। वहीं जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम समय बचा है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। इससे वरिष्ठ शिक्षकों को कुछ राहत अवश्य मिली है, लेकिन अधिकांश शिक्षकों के लिए TET पास करना अब भी अनिवार्य बना हुआ है।
सरकार के इस स्पष्ट रुख के बाद यह तय हो गया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता में किसी प्रकार की ढील फिलहाल नहीं मिलने वाली है। ऐसे में जिन शिक्षकों ने अभी तक TET उत्तीर्ण नहीं किया है, उन्हें समय रहते परीक्षा की तैयारी शुरू करनी होगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि TET केवल एक औपचारिक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षण गुणवत्ता को सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आने वाले समय में राज्यों द्वारा नियमित रूप से TET आयोजित किए जाने की संभावना है, जिससे पात्र शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकें और वे निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा पास कर सकें। सरकार के इस बयान ने TET को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है और स्पष्ट संकेत दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए TET की अनिवार्यता भविष्य में भी जारी रहेगी।
