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The Hill India > Blog > देश > गोवा : रेड शूज’ फिल्म मेक्सिको में महिलाओं के खिलाफ लिंग आधारित हिंसा से संबंधित है-निर्देशक कार्लोस एशेलमैन कैसर
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गोवा : रेड शूज’ फिल्म मेक्सिको में महिलाओं के खिलाफ लिंग आधारित हिंसा से संबंधित है-निर्देशक कार्लोस एशेलमैन कैसर

The Hill India News
Last updated: November 26, 2022 3:43 pm
The Hill India News
Published: November 26, 2022
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यह फिल्म मेरे लिए बेहद खास है। इस फिल्म ने मुझे बहुत गहराई तक प्रभावित किया है: निर्देशक कार्लोस एशेलमैन कैसर

मैक्सिकन फिल्म रेड शूज (जापाटोस रोजोस) के निर्देशक कार्लोस एशेलमैन कैसर का कहना है कि यह फिल्म मेरे लिए बहुत खास है। इसने मुझे बहुत गहराई तक प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि किसी महोत्सव से अधिक यह कलाकारों की व्यक्तिगत यात्रा है, जो मेरे लिए अधिक कहीं महत्वपूर्ण है। श्री कार्लोस ने निर्माता एलेजांद्रो डी इकाजा और गैब्रिएला माल्डोनाडो तथा मुख्य अभिनेत्री नतालिया सोलियन के साथ इफ्फी के ‘टेबल टॉक्स’ सत्र में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इस सत्र की मेजबानी पत्र सूचना कार्यालय ने गोवा में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के अवसर पर की।

53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित गोल्डन पीकॉक के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता खंड के तहत प्रतिस्पर्धा करने वाली 15 फिल्मों में मेक्सिको की रेड शूज भी एक प्रमुख फिल्म है।

फिल्म की कहानी एक ऐसे किसान के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अलगाव में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। यह कथानक उसकी बेटी की मृत्यु की खबर मिलने के बाद होने वाली घटनाओं के बारे में है। फिल्म धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, और कहानी के अनुसार किसान अपनी मृतक बेटी के पार्थिव शरीर को घर वापस लाने के लिए एक अपरिचित तथा विदेशी दुनिया से भिड़ने की कोशिश करता है। फिल्म को मिले कई पुरस्कार नामांकनों में सफलता मिली और यह वेनिस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ऑडियंस अवार्ड के लिए प्रतिस्पर्धा में थी।

निर्माता एलेजांद्रो डी इकाजा ने कहा कि दर्शकों के सामने रखने के लिए फिल्म में एक अद्भुत कहानी थी। यह अलग बात है कि इसकी शूटिंग काफी जटिल और लंबी रही थी, क्योंकि हमने कोविड महामारी के दौरान शूट किया था। उन्होंने कहा कि कार्लोस के साथ काम करने का अनुभव बहुत शानदार था।

एलेजांद्रो डी इकाजा ने कहा कि फिल्म चंदे से प्राप्त कोष का उपयोग करके बनाई गई है, क्योंकि कला का व्यावसायीकरण करना बहुत कठिन कार्य है। कोई संदेह नहीं है कि कोविड महामारी ने इसे और जटिल व कठिन बना दिया। उन्होंने कहा कि हम भारत आकर बहुत खुश हैं। देखा जाये तो भारत और मेक्सिको में बहुत सारी सांस्कृतिक समानताएं हैं। भारत में फिल्म उद्योग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने विशेष रूप से विशाल और फलते-फूलते बॉलीवुड उद्योग की सराहना की।

नतालिया सोलियन ने नवोदित अभिनेत्री के रूप में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से एक अच्छी फिल्म करना चाहती थीं और वह इस फिल्म के लिए बहुत उत्साहित थीं। नतालिया ने कहा कि मैं टैचो के साथ काम करने के लिए बहुत उत्सुक थी, क्योंकि टैचो एक स्वाभाविक अभिनेता हैं। उन्होंने बताया कि निर्देशक की बहुत स्पष्ट सोच रही है और वह भावनात्मक रूप से भी बड़े सुलझे हुए हैं। नतालिया ने कहा कि मैक्सिकन महिला के रूप में, मैं हमेशा से बहुत ही संतुलित थी और भावनात्मक ही रहना चाहती थी, तो कुल मिलाकर यह एक खास एहसास था।

निर्देशक कार्लोस ने अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए मिलने वाली प्रेरणा के बारे में बताया कि इसका मुख्य विचार उनके पिता के साथ उनके संबंधों से उत्पन्न हुआ था। यह फिल्म पौरुष से सम्बन्धित मुद्दों को उजागर करने की कोशिश करती है कि इसे सकारात्मक तरीके से किस तरह से इस्तेमाल किया जाए। लेकिन कहानी का मुख्य विषय महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर आधारित है। फिल्म का शीर्षक भी उन कार्यकर्ताओं से ही प्रेरित था, जो मेक्सिको में महिलाओं के खिलाफ प्रचलित लिंग आधारित हिंसा को उजागर करने के लिए लाल जूते पहनकर सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा कर लेते थे।

यह प्रश्न पूछे जाने पर कि उन्होंने टैचो के मुख्य किरदार को निभाने के लिए अभिनेता यूस्टेसियो एस्कासियो को कैसे प्रशिक्षित किया, तो निर्देशक कार्लोस ने बताया कि यह बहुत मुश्किल नहीं था क्योंकि यूस्टेसियो की टैचो के साथ एक मजबूत भावनात्मक समानता थी और वे फिल्म के साथ बहुत गहरे भावनात्मक स्तर तक जुड़ गए थे। उन्होंने बताया कि फिल्म की कहानी टैचो की लय के अनुकूल है और हमने उसका अनुसरण करने की कोशिश की है।

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