
चमोली/गैरसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैण) एक बार फिर राज्य की राजनीति का केंद्र बनने जा रही है। आगामी 9 मार्च से शुरू होने वाले गैरसैंण बजट सत्र को लेकर शासन-प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। बुधवार को चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कर्णप्रयाग से लेकर भराड़ीसैण विधानसभा परिसर तक का सघन स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने सत्र की सफलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक मुस्तैदी: शून्य से शिखर तक की तैयारी
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने विधानसभा परिसर में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि बजट सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, जल संस्थान, विद्युत विभाग और नगर निकाय के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बुनियादी सुविधाओं को समय सीमा के भीतर दुरुस्त कर लिया जाए।
प्रमुख व्यवस्थाएं जिन पर रहेगा फोकस:
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आवासीय सुविधा: विधायकों, मंत्रियों और सचिवालय स्टाफ के लिए पर्याप्त आवास और भोजन की व्यवस्था।
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बुनियादी ढांचा: सुचारू पेयजल आपूर्ति, निर्बाध बिजली और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी।
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स्वास्थ्य सेवाएं: सत्र के दौरान आपातकालीन चिकित्सा के लिए डॉक्टरों की टीम और एम्बुलेंस की चौबीसों घंटे तैनाती।
सुरक्षा का चक्रव्यूह: ‘शैडो एरिया’ पर विशेष नजर
पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने सुरक्षा व्यवस्था का खाका खींचते हुए बताया कि भराड़ीसैण विधानसभा और आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षा जोन में बांटा जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से ‘शैडो एरिया’ (जहाँ मोबाइल नेटवर्क की समस्या रहती है) को चिह्नित करने और वहां अतिरिक्त वायरलेस कनेक्टिविटी स्थापित करने के निर्देश दिए।
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए प्रशासन निम्नलिखित कदम उठा रहा है:
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सत्यापन अभियान: स्थानीय होमस्टे में रुकने वाले आगंतुकों, मजदूरों और फेरी लगाने वालों का गहन पुलिस सत्यापन।
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CCTV निगरानी: विधानसभा परिसर और मुख्य मार्गों पर अतिरिक्त हाई-डेफिनिशन कैमरों की स्थापना।
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बैरिकेडिंग और पार्किंग: यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कर्णप्रयाग-गैरसैंण मार्ग पर विशेष पार्किंग स्थलों का निर्माण।
“सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में नेटवर्क की बाधा को दूर करने के लिए संचार विभाग को अतिरिक्त टावर और सैटेलाइट फोन की व्यवस्था करने को कहा गया है।” – सुरजीत सिंह पंवार, एसपी, चमोली
इंफ्रास्ट्रक्चर पर कड़ा रुख: 3 दिन का अल्टीमेटम
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एनएच (NH) के कार्यों पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने एनएच के अधीक्षण अभियंता ओमकार को सख्त निर्देश दिए कि कर्णप्रयाग से गैरसैंण के बीच सड़क की स्थिति सुधारी जाए। विशेष रूप से खम्मप्यांणा और जखेड गदेरे के पास पानी की निकासी की समस्या और सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए मात्र 3 दिन का समय दिया गया है।
सड़क मार्ग की सुगमता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सत्र के दौरान वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट और जन-प्रदर्शनों की संभावना बनी रहती है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जन-प्रदर्शनों की संभावना और एहतियात
उत्तराखंड की राजनीति में गैरसैंण हमेशा से एक भावनात्मक मुद्दा रहा है। बजट सत्र के दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस बल की अतिरिक्त कंपनियों की मांग की गई है ताकि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थलों पर ही रोका जा सके और सत्र की कार्यवाही में कोई बाधा न आए।
समन्वय और उत्तरदायित्व
सत्र के सुचारू संचालन के लिए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मैनपावर या सामग्री की किसी भी कमी के लिए तत्काल नोडल अधिकारी या अपर जिलाधिकारी से संपर्क करें।
गैरसैंण की उम्मीदों का बजट
उत्तराखंड बजट 2026 के इस सत्र से प्रदेशवासियों को काफी उम्मीदें हैं। एक ओर जहाँ भराड़ीसैण की पहाड़ियों में लोकतंत्र की गूँज सुनाई देगी, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की अग्निपरीक्षा भी होगी कि वे इस दुर्गम क्षेत्र में इतने बड़े आयोजन को कितनी कुशलता से संपन्न कराते हैं।



