By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख: “कानून तोड़ने वाले राहत के हकदार नहीं”, एमडीडीए की मस्जिद सीलिंग कार्रवाई को बताया सही
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख: “कानून तोड़ने वाले राहत के हकदार नहीं”, एमडीडीए की मस्जिद सीलिंग कार्रवाई को बताया सही
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख: “कानून तोड़ने वाले राहत के हकदार नहीं”, एमडीडीए की मस्जिद सीलिंग कार्रवाई को बताया सही

The Hill India News
Last updated: February 24, 2026 3:22 pm
The Hill India News
Published: February 24, 2026
Share
SHARE

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अवैध निर्माण और सार्वजनिक सुरक्षा के मामलों में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दो महत्वपूर्ण आदेश पारित किए हैं। एक ओर जहां न्यायालय ने देहरादून में बिना अनुमति निर्मित एक धार्मिक स्थल को सील करने की कार्रवाई को जायज ठहराया है, वहीं दूसरी ओर नैनीताल जिले की बदहाल सड़कों और पहाड़ों पर अवैध डंपिंग को लेकर जिला प्रशासन की खिंचाई की है।

Contents
बिना अनुमति निर्माण पर ‘नो रिलीफ’याचिकाकर्ता की मांग और कोर्ट की टिप्पणीकंपाउंडिंग के लिए मिला चार सप्ताह का समयनैनीताल की सड़कों पर ‘मौत का मलबा’, हाईकोर्ट गंभीरपर्यटकों और स्थानीय लोगों की जान जोखिम मेंकोर्ट का आदेश: रोड सेफ्टी और कचरा प्रबंधन पर मांगी रिपोर्टप्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

बिना अनुमति निर्माण पर ‘नो रिलीफ’

देहरादून के थानो क्षेत्र में जामा मस्जिद सोसायटी द्वारा किए गए अवैध निर्माण के खिलाफ मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की सीलिंग की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जो संस्था या व्यक्ति स्वयं कानून का उल्लंघन करता है, वह अनुच्छेद 226 के तहत न्यायालय से संरक्षण की अपेक्षा नहीं कर सकता।

याचिकाकर्ता की मांग और कोर्ट की टिप्पणी

जामा मस्जिद सोसायटी ने एमडीडीए द्वारा 13 फरवरी 2026 को जारी उस नोटिस को निरस्त करने की मांग की थी, जिसमें पुलिस सहायता लेकर मस्जिद को सील करने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उन्हें ‘कंपाउंडिंग मानचित्र’ (शमन मानचित्र) प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए और तब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि निर्माण के लिए प्राधिकरण से कभी कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। इस पर न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:

“याचिकाकर्ता सोसायटी स्वयं डिफॉल्टर है। न्यायालय किसी भी अवैध निर्माण को संरक्षण देने का माध्यम नहीं बन सकता। बिना अनुमति निर्माण कर बाद में संरक्षण मांगना स्थापित विधि के सिद्धांतों के विपरीत है।”

कंपाउंडिंग के लिए मिला चार सप्ताह का समय

हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक कानूनी विकल्प देते हुए यह छूट दी है कि यदि वे चार सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण के शमन (Compounding) हेतु आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करते हैं, तो एमडीडीए उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के प्रावधानों के तहत उस पर विचार करेगा।


नैनीताल की सड़कों पर ‘मौत का मलबा’, हाईकोर्ट गंभीर

उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने नैनीताल जिले में बदहाल सड़कों, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पहाड़ों पर हो रही अवैध डंपिंग को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर भी सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने नगर पालिका और जिला प्रशासन को इस गंभीर मानवीय मुद्दे पर तत्काल बैठक करने और प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों की जान जोखिम में

याचिकाकर्ता अनिल यादव की ओर से अधिवक्ता डी.सी.एस. रावत और जय कृष्ण पांडे ने कोर्ट को बताया कि हल्द्वानी-नैनीताल, कालाढूंगी और भवाली-कैंची धाम जैसे व्यस्त मार्गों पर निर्माण कार्यों का मलबा ‘ब्लाइंड टर्न्स’ (तीखे मोड़ों) पर फेंका जा रहा है।

याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु:

  • अवैध डंपिंग: निर्माण कार्यों का मलबा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने के बजाय सीधे सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है।

  • खतरनाक मोड़: मलबे के कारण तीखे मोड़ों पर दृश्यता कम हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

  • मानसून का खतरा: मलबे के कारण सड़कों पर होने वाली फिसलन स्थानीय स्कूली बच्चों, पर्यटकों और यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

  • सुरक्षा उपकरणों का अभाव: व्यस्ततम मार्गों से क्रैश बैरियर और सुरक्षा दीवारें नदारद हैं।

कोर्ट का आदेश: रोड सेफ्टी और कचरा प्रबंधन पर मांगी रिपोर्ट

न्यायालय ने पर्यावरण और जनसुरक्षा के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को गंभीरता से लिया है। खंडपीठ ने जिला प्रशासन और नगर पालिका को निर्देश दिए हैं कि वे समन्वय स्थापित कर रोड सेफ्टी सुनिश्चित करें और कूड़े के निस्तारण के लिए ठोस योजना बनाएं। कोर्ट ने प्रशासन से इस संबंध में की गई प्रगति से अवगत कराने को कहा है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

हाईकोर्ट के इन दोनों फैसलों ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक तरफ एमडीडीए को अवैध निर्माणों पर सख्ती जारी रखने का नैतिक बल मिला है, वहीं दूसरी तरफ नैनीताल जिला प्रशासन को बुनियादी ढांचे की अनदेखी पर जवाब देना होगा।


उत्तराखंड हाईकोर्ट के ये आदेश राज्य में ‘रूल ऑफ लॉ’ को स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर हैं। यह स्पष्ट संदेश है कि चाहे वह धार्मिक संस्थान हो या सरकारी विभाग, कानून और जनसुरक्षा से ऊपर कोई नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन चार सप्ताह के भीतर इन निर्देशों का पालन धरातल पर कैसे सुनिश्चित करता है।

You Might Also Like

किसान को धमकाने वाले कांग्रेस के जिला शहर अध्यक्ष को पुलिस ने किया गिरफ्तार
उत्तराखण्ड: मुख्यमंत्री धामी ने गंगोत्री धाम में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए ’रक्तवन ग्लेशियर एवं अन्य तीन पर्वत चोटियों पर आरोहण हेतु जा रहे पतंजलि आयुर्वेद, निम एवं आई.एम.एफ. के संयुक्त अभियान दल का फ्लैग ऑफ किया।
हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में ठंड बढ़ी; अगले 24 घंटे में बारिश-बर्फबारी की संभावना
कार्बन क्रेडिट में उत्तराखंड की संभावनाओं पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित, शून्य उत्सर्जन लक्ष्य को लेकर नीति स्तर पर मंथन
सोनम वांगचुक की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई: पर्यावरण बनाम व्यवस्था की जंग का अहम मोड़
TAGGED:High Court on illegal constructionJustice Pankaj PurohitMDDA Dehradun mosque sealingNainital road safety PILUttarakhand High Court verdict
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

J&K में सियासी भूचाल: उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा- ‘NC विधायक को तोड़ने के लिए मिला ₹30 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर’, BJP का पलटवार

The Hill India News
The Hill India News
July 11, 2026
देहरादून में ‘लोक संवर्धन पर्व’ का शंखनाद: उत्तराखंड बना केंद्र का पहला साझीदार, सीएम धामी और किरेन रिजिजू ने बढ़ाया शिल्पकारों का मान
सहसपुर में बोले सीएम धामी- सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटेगी जनता, अब खुद उनके द्वार पहुंचेगी सरकार
जमानत मिलते ही हैवान बना POCSO का आरोपी: तेलंगाना में पत्नी, दो मासूम बच्चों और पीड़िता समेत 6 लोगों की बेरहमी से हत्या, दहला रंगा रेड्डी
भवाली नरेश पांडे कांड में नया मोड़: मूल पीड़िता को ही पुलिस ने बनाया आरोपी, अदालत ने रिमांड अर्जी खारिज कर दी जमानत
ऑकलैंड में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, भारत-न्यूजीलैंड FTA को बताया ऐतिहासिक मील का पत्थर
मौसम का यू-टर्न: झमाझम बारिश के बाद अब बदलने वाला है मिजाज, जानिए आपके राज्य में कैसी है मॉनसून की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट में हाई वोल्टेज ड्रामा: याचिकाकर्ता ने खुद को बताया ‘सॉवरेन’, जजों को कहा ‘न्यायिक सेवक’; हवा में कागज़ उछालने पर पुलिस ने किया गिरफ्तार
देहरादून की सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक से मिलेगी मुक्ति: डीएम डॉ. आशीष चौहान सख्त, जाम और पार्किंग के लिए बनेगा ‘माइक्रो लेवल प्लान’
ग्लोबल टूरिज्म मैप पर चमकेगी टिहरी झील: हाई पॉवर कमेटी की बैठक में ब्लूप्रिंट तैयार, दिखेंगे उत्तराखंड के लोक-रंग
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?