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चारधाम यात्रा 2026: आस्था के पथ पर 100 ‘डेंजर जोन’ की चुनौती, सुरक्षित सफर के लिए सरकार ने झोंकी ताकत

The Hill India News
Last updated: April 12, 2026 2:56 am
The Hill India News
Published: April 12, 2026
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देहरादून: हिमालय की गोद में बसी पावन चारधाम यात्रा का आगाज़ इस वर्ष 19 अप्रैल से होने जा रहा है। सनातन धर्म में मोक्ष का द्वार मानी जाने वाली इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह है। जहाँ एक ओर रिकॉर्ड तोड़ पंजीकरण के आंकड़े आस्था की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रा मार्ग पर बढ़ते ‘लैंडस्लाइड जोन’ और ‘डेंजर जोन’ सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।

Contents
आस्था का सैलाब: 2025 के मुकाबले भारी उछाल की उम्मीदबढ़ते भूस्खलन क्षेत्र: श्रद्धालुओं के लिए ‘रेड अलर्ट’सरकार की तैयारी: 700 करोड़ का ‘सुरक्षा कवच’सुरक्षा का त्रिस्तरीय घेरा: 15 हजार जवानों की तैनातीकपाट खुलने का शुभ मुहूर्त20 विभागों का संयुक्त ‘मिशन चारधाम’

आस्था का सैलाब: 2025 के मुकाबले भारी उछाल की उम्मीद

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पहचान की धुरी मानी जाने वाली इस यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या साल दर साल नया कीर्तिमान रच रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024 में करीब 46 लाख लोग उत्तराखंड पहुंचे थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 50 लाख के पार निकल गई। इस वर्ष भी अब तक 8 लाख से अधिक श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण करा चुके हैं, जो यह संकेत देता है कि 2026 की यात्रा पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर सकती है।

बढ़ते भूस्खलन क्षेत्र: श्रद्धालुओं के लिए ‘रेड अलर्ट’

यात्रा मार्ग पर बढ़ती भीड़ के बीच सबसे बड़ी बाधा प्राकृतिक चुनौतियां हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल यात्रा रूट पर करीब 100 डेंजर जोन चिन्हित किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2025 में इन संवेदनशील क्षेत्रों की संख्या 53 थी, जो अब लगभग दोगुनी हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष की उत्तरकाशी आपदा और लगातार हो रहे भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण नए लैंडस्लाइड जोन विकसित हुए हैं। विशेषकर यमुनोत्री और केदारनाथ मार्ग पर जोखिम सबसे अधिक है।

प्रमुख संवेदनशील क्षेत्र (लैंडस्लाइड पॉइंट्स):

  • बदरीनाथ मार्ग: तोता घाटी, लामबगड़, पागल नाला, सिरोह बगड़ और पीपल कोठी।

  • केदारनाथ मार्ग: सोनप्रयाग और गौरीकुंड के समीपवर्ती क्षेत्र।

  • अन्य संवेदनशील बिंदु: महादेव चट्टी, तीन धना, नारकोटा, नागूद, काकड़गढ़, सेमी बंद और धरासू बैंड।

सरकार की तैयारी: 700 करोड़ का ‘सुरक्षा कवच’

बढ़ते खतरों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने कमर कस ली है। भारत सरकार ने इन डेंजर जोन्स के उपचार और सुरक्षा कार्यों के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, चिन्हित 100 में से 80 डेंजर जोन्स पर युद्ध स्तर पर कार्य शुरू कर दिया गया है।

प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि इन क्षेत्रों में 24 घंटे भारी मशीनरी और कुशल कर्मचारी तैनात रहेंगे, ताकि भूस्खलन होने की स्थिति में मार्ग को तुरंत खोला जा सके और यातायात बाधित न हो।

सुरक्षा का त्रिस्तरीय घेरा: 15 हजार जवानों की तैनाती

चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस विभाग ने पूरे रूट को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टरों में विभाजित किया है। सुरक्षा व्यवस्था की कमान करीब 15,000 जवानों के हाथों में होगी, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के साथ-साथ ITBP, CRPF, SDRF और NDRF की टीमें शामिल हैं। प्रत्येक सेक्टर को करीब 10 किलोमीटर के दायरे में रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।

कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष की चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ 19 अप्रैल से होगा:

  • 19 अप्रैल: यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलेंगे।

  • 22 अप्रैल: बाबा केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

  • 23 अप्रैल: भगवान बदरीनाथ के दर्शन शुरू होंगे।

20 विभागों का संयुक्त ‘मिशन चारधाम’

केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, PWD, जल संस्थान, बिजली और पर्यटन विभाग सहित कुल 20 से अधिक विभाग इस महा-आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं, ताकि हाई-अल्टीट्यूड पर आने वाले श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन और मेडिकल इमरजेंसी में कोई समस्या न हो।

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद, हिमालयी क्षेत्रों की अनिश्चितता को नकारा नहीं जा सकता। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और डेंजर जोन से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतें। आस्था और सुरक्षा का सामंजस्य ही इस यात्रा को सफल और सुखद बनाएगा।

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