
वाराणसी/देहरादून। चिकित्सा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान और समाज सेवा के प्रति अटूट समर्पण के लिए विख्यात, पद्म श्री प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी वाराणसी में एक प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। वाराणसी ऑर्थोपीडिक एसोसिएशन (VOA) ने उन्हें चिकित्सा शिक्षा, जनस्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए ‘प्रो. टी. पी. श्रीवास्तव ओरेशन’ प्रदान किया।
एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय ने इस अवसर पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान दिया, जिसने न केवल चिकित्सकों बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए राष्ट्र निर्माण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया।
चिकित्सक केवल सर्जन नहीं, राष्ट्र के शिक्षक भी: प्रो. डॉ. संजय
समारोह को संबोधित करते हुए पद्म श्री प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि आधुनिक युग में एक चिकित्सक की जिम्मेदारी केवल अस्पताल की चारदीवारी या ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं रह सकती। उन्होंने जोर देकर कहा, “डॉक्टर समाज का एक प्रबुद्ध हिस्सा हैं। उन्हें केवल रोगों का उपचार ही नहीं करना चाहिए, बल्कि रोग-निवारण (Prevention) और जन-जागरूकता के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का संवाहक भी बनना चाहिए।”
डॉ. संजय के अनुसार, एक सफल चिकित्सक वह है जो एक शिक्षक के रूप में समाज को जागरूक करे, एक कुशल संवादक के रूप में मरीजों का विश्वास जीते और एक सजग नागरिक के रूप में राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाए।
‘विकसित भारत’ के लिए प्रो. संजय का ‘7D दृष्टिकोण’
अपने व्याख्यान का मुख्य आकर्षण पेश करते हुए प्रो. डॉ. संजय ने अपने स्व-विकसित “7D दृष्टिकोण” (7D Approach) को विस्तार से समझाया। उन्होंने इसे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने वाला एक प्रभाकारी उपकरण बताया। यह दृष्टिकोण पेशेवर और सामाजिक सहभागिता के सात चरणों पर आधारित है:
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प्रलेखन (Documentation): किसी भी सार्थक कार्य की नींव डेटा और सही प्रलेखन पर टिकी होती है।
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प्रदर्शन (Display): किए गए कार्यों को उचित पटल पर रखना ताकि समाज उससे प्रेरित हो सके।
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डेमॉन्स्ट्रेशन (Demonstration): कार्यक्षमता और गुणवत्ता के माध्यम से विश्वसनीयता (Credibility) स्थापित करना।
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प्रसार (Dissemination): अर्जित ज्ञान और अनुभवों को दूसरों के साथ साझा करना।
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संवाद (Dialogue): हितधारकों और समाज के साथ निरंतर चर्चा करना ताकि उनकी समस्याओं को समझा जा सके।
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निर्णय-निर्धारण (Decision-making): संवाद और डेटा के आधार पर सटीक और त्वरित निर्णय लेना।
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कार्यान्वयन (Delivery): अंतिम चरण में सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना।
प्रो. डॉ. संजय ने स्पष्ट किया कि यह 7D मॉडल केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि इसे प्रशासन, इंजीनियरिंग या शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी लागू किया जाए, तो भारत को वैश्विक महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
स्वास्थ्य ही आत्मनिर्भरता की पहली सीढ़ी
पद्म श्री प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि एक स्वस्थ समाज ही विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है। यदि नागरिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होंगे, तो आर्थिक प्रगति के लक्ष्य अधूरे रह जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ यानी बीमारी होने से पहले ही सावधानी बरतने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर बल दिया। उनके अनुसार, सड़क सुरक्षा, स्वच्छता और संतुलित जीवनशैली जैसे विषयों पर डॉक्टरों को आगे आकर नेतृत्व करना चाहिए।
वाराणसी ऑर्थोपीडिक एसोसिएशन ने जताया आभार
वाराणसी ऑर्थोपीडिक एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रख्यात सर्जनों ने प्रो. डॉ. संजय के आजीवन समर्पण की सराहना की। एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रो. टी. पी. श्रीवास्तव ओरेशन उनके संगठन का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जो केवल उन हस्तियों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हों।
उपस्थित विशेषज्ञों ने प्रो. डॉ. संजय के शैक्षणिक शोध और गरीब मरीजों के लिए किए गए उनके निस्वार्थ ऑपरेशनों का उल्लेख करते हुए उन्हें ‘चिकित्सा जगत का प्रकाश स्तंभ’ बताया।
एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
देहरादून से ताल्लुक रखने वाले और वर्तमान में एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। वह न केवल एक कुशल ऑर्थोपीडिक सर्जन हैं, बल्कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उनका जीवन उन युवा डॉक्टरों के लिए एक मिसाल है जो पेशेवर सफलता के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी जीवित रखना चाहते हैं।
मुख्य बिंदु:
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सम्मान: प्रो. टी. पी. श्रीवास्तव ओरेशन।
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आयोजक: वाराणसी ऑर्थोपीडिक एसोसिएशन (VOA)।
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मुख्य संदेश: चिकित्सक समाज के शिक्षक और राष्ट्र निर्माता हैं।
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नवाचार: राष्ट्र निर्माण के लिए 7D दृष्टिकोण का प्रतिपादन।
वाराणसी के इस समारोह ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि जब ज्ञान और सेवा का संगम होता है, तो वह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का उत्सव बन जाता है।



