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Reading: UGC NET की गलतियों पर नया बवाल! अभ्यर्थियों का सवाल—14 सवाल चैलेंज करने के लिए 2800 रुपये कहां से लाएं?
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UGC NET की गलतियों पर नया बवाल! अभ्यर्थियों का सवाल—14 सवाल चैलेंज करने के लिए 2800 रुपये कहां से लाएं?

The Hill India News
Last updated: August 20, 2026 10:20 am
The Hill India News
Published: August 20, 2026
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UGC NET परीक्षा को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तीन विषयों की परीक्षाएं रद्द होने के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अब अन्य विषयों के कई अभ्यर्थियों ने प्रोविजनल आंसर की में कथित गलतियों का आरोप लगाते हुए नई चिंता जाहिर की है। छात्रों का कहना है कि अगर आंसर की में कई सवालों या उत्तरों में गलती है, तो उन्हें चुनौती देने के लिए भारी-भरकम रकम खर्च करनी पड़ सकती है। इसी को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है कि एक मध्यमवर्गीय छात्र आखिर कई प्रश्नों को चैलेंज करने के लिए हजारों रुपये कहां से लाए?

Contents
14 सवालों के लिए देने होंगे 2800 रुपयेप्रोविजनल आंसर की क्यों होती है महत्वपूर्ण?अभ्यर्थी ने उठाया उत्तर बदलने का सवालतीन विषयों के पेपर रद्द होने के बाद बढ़ी चिंताNTA पर फिर उठे सवालछात्रों की मांग—फीस कम हो या हो रिफंडेबल

UGC NET अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रोविजनल आंसर की में कथित तौर पर कई ऐसी त्रुटियां हैं, जिन्हें सुधारने के लिए उन्हें हर सवाल पर अलग-अलग शुल्क देना पड़ता है। NTA की व्यवस्था के अनुसार, उम्मीदवारों को प्रोविजनल आंसर की जारी होने के बाद निर्धारित समय के भीतर प्रश्न या उत्तर को चुनौती देने का अवसर दिया जाता है। लेकिन एक सवाल को चैलेंज करने के लिए 200 रुपये का शुल्क निर्धारित होने के कारण कई छात्रों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।

14 सवालों के लिए देने होंगे 2800 रुपये

इस मुद्दे को लेकर UGC NET की एक अभ्यर्थी सुचित्रा श्रीवास्तव ने अपनी परेशानी सामने रखी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पॉलिटिकल साइंस विषय से परीक्षा दी है और उनके अनुसार इस विषय में कई ऐसे प्रश्न और उत्तर हैं, जिनमें कथित तौर पर त्रुटियां दिखाई दे रही हैं।

अभ्यर्थी का दावा है कि उनके विषय में करीब 14 सवाल ऐसे हैं, जिन्हें चुनौती देना जरूरी है। लेकिन यदि प्रत्येक सवाल के लिए 200 रुपये का शुल्क जमा करना पड़े, तो कुल राशि 2800 रुपये हो जाती है। एक छात्र के लिए इतनी रकम केवल गलत प्रश्नों या कथित गलत उत्तरों को चुनौती देने के लिए खर्च करना आसान नहीं है।

यही कारण है कि अब छात्र केवल आंसर की की गलतियों पर ही सवाल नहीं उठा रहे, बल्कि चुनौती शुल्क की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी परीक्षा में कई प्रश्नों को लेकर विवाद है, तो हर सवाल के लिए अलग-अलग शुल्क लेने से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

प्रोविजनल आंसर की क्यों होती है महत्वपूर्ण?

UGC NET जैसी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रोविजनल आंसर की जारी होने के बाद उम्मीदवारों को अपने उत्तरों का मिलान करने का अवसर मिलता है। यदि किसी अभ्यर्थी को लगता है कि किसी प्रश्न का उत्तर गलत है या प्रश्न में कोई तकनीकी, तथ्यात्मक अथवा अन्य त्रुटि है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे चैलेंज कर सकता है।

इसके बाद संबंधित आपत्तियों और उपलब्ध कराए गए प्रमाणों की समीक्षा की जाती है। अंतिम आंसर की जारी होने के बाद ही परिणाम तैयार किया जाता है। इसलिए छात्रों के लिए आंसर की चैलेंज करने की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

लेकिन विवाद तब पैदा होता है, जब किसी छात्र को एक-दो नहीं बल्कि कई प्रश्नों पर आपत्ति हो। ऐसे में प्रत्येक प्रश्न के लिए 200 रुपये का शुल्क कुल रकम को काफी बढ़ा देता है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा देने, तैयारी करने, यात्रा और अन्य खर्चों के बाद हजारों रुपये केवल आपत्ति दर्ज कराने के लिए खर्च करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।

अभ्यर्थी ने उठाया उत्तर बदलने का सवाल

सुचित्रा श्रीवास्तव ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि उन्होंने परीक्षा के दौरान जिन उत्तरों को चिह्नित किया था और बाद में आंसर की में दिखाई देने वाले उत्तरों के बीच अंतर को लेकर उनकी चिंता बनी हुई है।

अभ्यर्थी का दावा है कि यह परेशानी केवल उनकी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि कई अन्य छात्र भी इसी तरह की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में उम्मीदवार चाहते हैं कि परीक्षा और उत्तरों से जुड़े रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जाए और यदि किसी प्रकार की त्रुटि सामने आती है तो उसे सुधारा जाए।

छात्रों की मांग है कि जिन मामलों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की ओर से समान शिकायतें आ रही हैं, वहां केवल व्यक्तिगत चुनौती शुल्क के आधार पर प्रक्रिया सीमित नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि संबंधित प्रश्नों और उत्तरों की स्वतंत्र रूप से विशेषज्ञों से समीक्षा कराई जानी चाहिए।

तीन विषयों के पेपर रद्द होने के बाद बढ़ी चिंता

UGC NET के तीन विषयों को लेकर पहले ही बड़ा विवाद सामने आ चुका है। इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षाओं में कथित गलतियों, स्पेलिंग मिस्टेक और प्रश्नों की पुनरावृत्ति जैसे मुद्दों को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए थे।

शुरुआत में इन शिकायतों को लेकर काफी विवाद हुआ। बाद में आंसर की जारी होने के बाद इन तीन विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। इसके बाद अब इन विषयों की दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने की बात सामने आई है।

तीन विषयों के पेपर रद्द होने के बाद दूसरे विषयों के अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गई है। छात्रों का कहना है कि यदि कुछ विषयों में गलतियां इतनी गंभीर थीं कि परीक्षा रद्द करनी पड़ी, तो अन्य विषयों की आंसर की और प्रश्नपत्रों की भी पूरी सावधानी से जांच होनी चाहिए।

NTA पर फिर उठे सवाल

NEET UG से जुड़े विवादों के बाद NTA पहले ही परीक्षा प्रक्रिया को लेकर आलोचनाओं और सवालों का सामना कर चुकी है। अब UGC NET से जुड़े नए आरोपों ने एजेंसी की परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और आंसर की तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर फिर बहस छेड़ दी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में एक-एक अंक उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता है। UGC NET के माध्यम से उम्मीदवार असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता और अन्य शैक्षणिक अवसरों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में किसी प्रश्न या उत्तर में गलती होने पर उसका असर सीधे उम्मीदवार के परिणाम और भविष्य पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि छात्र चाहते हैं कि परीक्षा से जुड़े सभी विवादों का जल्द और पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाए। उनकी मांग है कि जिन प्रश्नों पर बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज हो रही हैं, उनकी विशेषज्ञ समिति से समीक्षा कराई जाए।

छात्रों की मांग—फीस कम हो या हो रिफंडेबल

इस पूरे विवाद के बीच चुनौती शुल्क को लेकर भी बहस तेज हो गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी प्रश्न या उत्तर को वास्तव में गलत पाया जाता है, तो उम्मीदवार द्वारा जमा की गई चुनौती राशि वापस करने की व्यवस्था होनी चाहिए। कुछ छात्रों का यह भी कहना है कि एक साथ कई प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज कराने वाले अभ्यर्थियों के लिए शुल्क में राहत दी जानी चाहिए।

छात्रों का तर्क है कि गलत प्रश्न या गलत उत्तर की स्थिति में उम्मीदवारों को अपनी बात रखने के लिए आर्थिक दंड जैसा महसूस नहीं होना चाहिए। खासतौर पर तब, जब परीक्षा से जुड़ी गलती संस्थागत स्तर पर हुई हो।

हालांकि, अंतिम स्थिति NTA की आधिकारिक प्रक्रिया, विशेषज्ञ समीक्षा और अंतिम आंसर की जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल छात्रों की शिकायतों और सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों ने UGC NET विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

कुल मिलाकर, UGC NET अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर आंसर की में कई गलतियां दिखाई देती हैं, तो हर सवाल को चुनौती देने के लिए हजारों रुपये खर्च करना क्या सभी छात्रों के लिए संभव है? 14 सवालों के लिए 2800 रुपये का उदाहरण अब केवल एक अभ्यर्थी की परेशानी नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली और चैलेंज फीस की व्यवस्था पर उठता एक बड़ा सवाल बन गया है।

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