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उत्तराखंडफीचर्ड

मध्य प्रदेश के किसान से उत्तराखंड के राजभवन तक! कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन, जानिए विधायक से सांसद और राज्यपाल बनने तक का पूरा सफर

The Hill India News
Last updated: October 13, 2026 4:33 am
The Hill India News
Published: October 13, 2026
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सिवनी के बरघाट से शुरू हुई राजनीतिक पारी, चार बार बने विधायक और 2019 में बालाघाट से पहुंचे लोकसभा; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड के राज्यपाल पद पर किया नियुक्त

Contents
सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ जन्म, किसान परिवार से जुड़ा नाता1990 में पहली बार बने विधायक, लगातार चार चुनावों में हासिल की जीतमध्य प्रदेश सरकार में संभाली कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारीराज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे डॉ. बिसेन2019 में बालाघाट लोकसभा सीट से जीतकर पहुंचे संसदबालाघाट और पवार समाज से भी जुड़ा है राजनीतिक संबंधसिवनी जिले के दूसरे नेता को मिला राज्यपाल बनने का अवसरउत्तराखंड के नए राज्यपाल के सामने होगी संवैधानिक जिम्मेदारीविधायक से राज्यपाल तक, ऐसा रहा डॉ. ढाल सिंह बिसेन का सफर

देहरादून/सिवनी: उत्तराखंड को नया राज्यपाल मिल गया है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में उनकी नियुक्ति की घोषणा की गई। वह उत्तराखंड के वर्तमान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लेंगे। हालांकि, उनकी नियुक्ति प्रभावी होने की तारीख पदभार ग्रहण करने की तारीख होगी। <Cite refs={[“turn693467search0″,”turn693467search3”]}/>

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से आने वाले डॉ. बिसेन का राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरा है। विधानसभा चुनावों में लगातार जीत, मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य और फिर लोकसभा तक का सफर उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा रहा है। अब उन्हें उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

लेकिन डॉ. ढाल सिंह बिसेन कौन हैं? उनका मध्य प्रदेश से क्या संबंध है? राजनीति में उनकी शुरुआत कैसे हुई और वह विधायक से सांसद बनने के बाद राज्यपाल की जिम्मेदारी तक कैसे पहुंचे? आइए, उनके जीवन और राजनीतिक सफर को विस्तार से जानते हैं।

सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ जन्म, किसान परिवार से जुड़ा नाता

डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ था। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा रहा है और राजनीति में आने से पहले भी उनका संबंध ग्रामीण जीवन से रहा। पेशे से वह चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और किसान के रूप में भी उनकी पहचान रही है।

लोकसभा की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, डॉ. बिसेन ने आयुर्वेदिक चिकित्सा से संबंधित शिक्षा प्राप्त की। उनकी शैक्षणिक योग्यता में आयुर्वेद विज्ञानाचार्य (A.V.M.S.) और चिकित्सा से जुड़े डिप्लोमा का उल्लेख मिलता है। इस तरह उनका परिचय केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चिकित्सा और कृषि से भी उनका जुड़ाव रहा है। <Cite refs={[“turn693467search2″,”turn693467search14”]}/>

सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र से उनका राजनीतिक जुड़ाव काफी पुराना रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से आने के कारण स्थानीय समस्याओं, किसानों और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दे उनके राजनीतिक जीवन का हिस्सा रहे। यहीं से उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत होती गई और उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह बनाई।

1990 में पहली बार बने विधायक, लगातार चार चुनावों में हासिल की जीत

डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी शुरुआत विधानसभा चुनावों के माध्यम से की। वर्ष 1990 में वह पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने 1993, 1998 और 2003 के विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज की।

इस तरह वह मध्य प्रदेश विधानसभा में चार बार विधायक रहे। उनका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से सिवनी जिले की बरघाट विधानसभा सीट रही, जहां से उन्होंने लगातार चुनाव जीतकर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1990 से 2008 के बीच उनके चार विधानसभा कार्यकाल दर्ज हैं। <Cite refs={[“turn693467search2″,”turn693467search10”]}/>

लगातार चार बार विधानसभा पहुंचना उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। विधानसभा में रहते हुए उन्हें राज्य की राजनीति, प्रशासनिक कामकाज और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर काम करने का अवसर मिला।

विधायक के रूप में उनकी भूमिका ने आगे चलकर राज्य सरकार में मंत्री बनने का रास्ता भी तैयार किया। स्थानीय स्तर से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर धीरे-धीरे प्रदेश की सत्ता और फिर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा।

मध्य प्रदेश सरकार में संभाली कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी

वर्ष 2003 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2003 से 2005 के दौरान उन्होंने राज्य सरकार में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां संभालीं।

उनके मंत्री कार्यकाल में वन, परिवहन, खनिज, स्कूल शिक्षा और जेल विभागों से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल रहीं। उपलब्ध संसदीय और समाचार विवरणों के अनुसार, वर्ष 2003 से 2004 के बीच उन्होंने वन, परिवहन और खनिज विभागों की जिम्मेदारी संभाली, जबकि 2004 से 2005 के दौरान स्कूल शिक्षा और जेल विभाग से जुड़े दायित्व निभाए। <Cite refs={[“turn693467search2″,”turn693467search10”]}/>

कैबिनेट मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल उनके राजनीतिक करियर का अहम हिस्सा रहा। विधायक के तौर पर क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहने के बाद उन्हें राज्य स्तर पर नीतियों और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े विभागों में काम करने का अवसर मिला।

वन और खनिज जैसे विभागों का संबंध प्राकृतिक संसाधनों से है, जबकि परिवहन, शिक्षा और जेल विभागों का सीधा संबंध प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से है। इन विभागों की जिम्मेदारियां संभालने के दौरान उन्हें शासन के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का अनुभव मिला।

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे डॉ. बिसेन

मंत्री पद से आगे बढ़ते हुए डॉ. ढाल सिंह बिसेन को मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली। वह वर्ष 2012 से 2013 के दौरान इस पद पर रहे। <Cite refs={[“turn693467search2″,”turn693467search28”]}/>

राज्य वित्त आयोग का काम राज्य और स्थानीय निकायों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे से संबंधित विषयों पर सिफारिशें करना होता है। इस तरह की जिम्मेदारी में स्थानीय निकायों की वित्तीय जरूरतों और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल जैसे विषय महत्वपूर्ण होते हैं।

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल उनके प्रशासनिक अनुभव में एक और महत्वपूर्ण अध्याय रहा। विधानसभा और मंत्रिमंडल में काम करने के बाद यह जिम्मेदारी उन्हें वित्तीय और संस्थागत व्यवस्था से जुड़े विषयों पर काम करने का अवसर देती है।

2019 में बालाघाट लोकसभा सीट से जीतकर पहुंचे संसद

डॉ. ढाल सिंह बिसेन के राजनीतिक सफर में वर्ष 2019 एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया। भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा सांसद बने।

बालाघाट लोकसभा क्षेत्र का भौगोलिक संबंध सिवनी जिले के कुछ हिस्सों से भी है। बरघाट विधानसभा क्षेत्र से उनका पुराना राजनीतिक जुड़ाव उनके लिए इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान रहा। लोकसभा पहुंचने के बाद उनकी राजनीति का दायरा राज्य विधानसभा से बढ़कर राष्ट्रीय संसद तक पहुंच गया।

संसद की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, डॉ. बिसेन मई 2019 में 17वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सांसद के रूप में उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में भी काम किया। इनमें शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल से संबंधित स्थायी समिति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन से संबंधित समिति शामिल थीं। <Cite refs={[“turn693467search2″,”turn693467search28”]}/>

लोकसभा में उनका कार्यकाल 2019 से 2024 तक रहा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बालाघाट सीट से उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया और भारती पारधी पार्टी की उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर सांसद बनीं। इसके बाद डॉ. बिसेन की संसदीय पारी समाप्त हुई, लेकिन उनका राजनीतिक सफर आगे जारी रहा। <Cite refs={[“turn693467search28″,”turn693467search14”]}/>

बालाघाट और पवार समाज से भी जुड़ा है राजनीतिक संबंध

डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक आधार मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में रहा है। सिवनी और बालाघाट के बीच उनके राजनीतिक संबंधों ने उन्हें विधानसभा और लोकसभा, दोनों स्तरों पर पहचान दिलाई।

उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित पवार समुदाय का नेता माना जाता है। बालाघाट क्षेत्र में पवार समाज की उल्लेखनीय उपस्थिति का जिक्र स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में होता रहा है। इस क्षेत्र से अलग-अलग समय पर विभिन्न दलों के पवार समुदाय के नेताओं को चुनाव लड़ने का अवसर मिला है।

हालांकि, किसी नेता की चुनावी सफलता को केवल जातीय समीकरणों से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, पार्टी का संगठन, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं का समर्थन भी चुनावी परिणामों में भूमिका निभाते हैं।

डॉ. बिसेन का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि उन्होंने स्थानीय विधानसभा क्षेत्र से शुरुआत करते हुए राज्य सरकार, वित्त आयोग और संसद तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं।

सिवनी जिले के दूसरे नेता को मिला राज्यपाल बनने का अवसर

डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति के साथ सिवनी जिले का नाम एक बार फिर राज्यपाल पद से जुड़ गया है। इससे पहले कांग्रेस की वरिष्ठ नेता उर्मिला सिंह को भी राज्यपाल की जिम्मेदारी मिल चुकी है।

उर्मिला सिंह मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के लखनादौन क्षेत्र से संबंध रखती थीं। उन्हें वर्ष 2010 में हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था और उन्होंने 2015 तक इस पद पर कार्य किया। वर्ष 2018 में उनका निधन हो गया।

इस तरह डॉ. बिसेन की नियुक्ति को सिवनी जिले के राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। एक ही जिले से संबंध रखने वाले दो नेताओं का अलग-अलग समय पर राज्यपाल पद तक पहुंचना स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना है।

उत्तराखंड के नए राज्यपाल के सामने होगी संवैधानिक जिम्मेदारी

राज्यपाल का पद किसी राज्य में केवल औपचारिक भूमिका तक सीमित नहीं है। भारतीय संविधान के तहत राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। राज्य सरकार के गठन, विधानसभा से पारित विधेयकों, संवैधानिक प्रक्रियाओं और कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

डॉ. ढाल सिंह बिसेन अब उत्तराखंड में इस संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। मध्य प्रदेश में विधायक, कैबिनेट मंत्री, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद के रूप में काम करने का उनका अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन का प्रमुख हिस्सा रहा है।

उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां मध्य प्रदेश से अलग हैं। यहां पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियां, सीमावर्ती इलाकों की आवश्यकताएं, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे विशेष महत्व रखते हैं। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका संविधान और निर्धारित प्रशासनिक व्यवस्था के दायरे में होगी।

राष्ट्रपति भवन की घोषणा के अनुसार, डॉ. बिसेन की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। इसलिए नियुक्ति की घोषणा और औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। <Cite refs={[“turn693467search0″,”turn693467search4”]}/>

विधायक से राज्यपाल तक, ऐसा रहा डॉ. ढाल सिंह बिसेन का सफर

डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से शुरू हुआ और चार बार विधायक बनने के बाद उन्होंने राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में काम किया और 2019 में बालाघाट से लोकसभा सांसद चुने गए।

अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया है। यह उनके सार्वजनिक जीवन में एक नया अध्याय है। उनकी नियुक्ति के साथ मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले एक और नेता का नाम संवैधानिक पद से जुड़ गया है।

अब उत्तराखंड में उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद राज्यपाल के रूप में उनकी नई भूमिका औपचारिक रूप से शुरू होगी।

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