
मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी क्षेत्र से एक ऐसी प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जो आज के युवाओं के लिए मिसाल बनती जा रही है। यहां के रहने वाले युवा किसान राहुल लोधी ने एक सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़कर खेती को अपनाया और आज लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने परंपरागत खेती के बजाय औषधीय खेती का रास्ता चुना, जिसने उनकी किस्मत ही बदल दी।
राहुल लोधी पहले भोपाल के एलबीएस अस्पताल में पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (PRO) के पद पर कार्यरत थे। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने नौकरी शुरू की, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि नौकरी में सीमित आय और कम अवसर हैं। इसी दौरान उनके मन में कुछ नया करने का विचार आया। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने अश्वगंधा की खेती के बारे में जानकारी जुटाई और देखा कि कई किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। यह देखकर उन्होंने बड़ा फैसला लिया और नौकरी छोड़कर अपने गांव लौट आए।
गांव लौटने के बाद राहुल ने शुरुआत में खेती के बारे में और गहराई से समझने का प्रयास किया। उन्हें जानकारी मिली कि जयपुर और कोटा में औषधीय खेती की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद वह कोटा पहुंचे और वहां अश्वगंधा की खेती की तकनीक सीखी। साथ ही जयपुर से उच्च गुणवत्ता वाले बीज भी लेकर आए। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने पूरी योजना बनाकर खेती की शुरुआत की।
राहुल ने नवंबर महीने में 10 एकड़ जमीन पर अश्वगंधा की बुवाई की। वर्तमान में उनकी 5 एकड़ फसल की कटाई हो चुकी है, जबकि बाकी 5 एकड़ में हार्वेस्टिंग का काम जारी है। उनके अनुसार, एक एकड़ में औसतन 5 से 6 क्विंटल तक अश्वगंधा की जड़ निकलती है। बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण उन्हें अच्छे दाम मिल रहे हैं।
अश्वगंधा की जड़ का बाजार भाव लगभग 30,000 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके अलावा इसका भूसा करीब 2,000 रुपये प्रति क्विंटल और बीज 20,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक जाता है। इस तरह एक एकड़ से कुल मिलाकर करीब 2 लाख रुपये तक की आय संभव हो जाती है। अगर लागत की बात करें, तो एक एकड़ में लगभग 30,000 रुपये का खर्च आता है, जबकि मुनाफा 1.5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
राहुल लोधी का कहना है कि यह खेती परंपरागत फसलों जैसे गेहूं और चना की तुलना में कहीं ज्यादा लाभदायक है। आज वह सालाना 18 से 20 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। उनकी सफलता को देखते हुए आसपास के किसान भी अब औषधीय खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
राहुल बताते हैं कि शुरुआत में जोखिम जरूर था, लेकिन सही जानकारी और प्रशिक्षण ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसान बाजार की मांग को समझकर और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए खेती करें, तो वे अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
उनकी यह पहल देवरी ब्लॉक में अश्वगंधा की खेती का पहला बड़ा उदाहरण बन गई है। आज देश के कई शहरों जैसे नीमच और कोटा से उन्हें उनकी फसल के लिए लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे यह साफ है कि औषधीय खेती का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसमें भविष्य की अपार संभावनाएं हैं।
राहुल लोधी की सफलता यह साबित करती है कि अगर सही दिशा, मेहनत और जोखिम उठाने का साहस हो, तो खेती को भी एक सफल और लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी कहानी न केवल युवाओं को प्रेरित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि आधुनिक खेती के जरिए गांव में रहकर भी शानदार जीवन जिया जा सकता है।



