By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: Dry Winter in Himalayas: उत्तराखंड और हिमाचल में क्यों रूठी बर्फबारी? वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी- ‘सिकुड़ रही है सर्दी, तप रहे हैं ग्लेशियर’
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > Dry Winter in Himalayas: उत्तराखंड और हिमाचल में क्यों रूठी बर्फबारी? वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी- ‘सिकुड़ रही है सर्दी, तप रहे हैं ग्लेशियर’
उत्तराखंडपर्यावरणफीचर्ड

Dry Winter in Himalayas: उत्तराखंड और हिमाचल में क्यों रूठी बर्फबारी? वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी- ‘सिकुड़ रही है सर्दी, तप रहे हैं ग्लेशियर’

The Hill India News
Last updated: December 26, 2025 1:44 pm
The Hill India News
Published: December 26, 2025
Share
SHARE

Climate Change in Himalayas: देवभूमि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थल इस बार बर्फ की सफेद चादर के लिए तरस रहे हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण न केवल पर्यटन प्रभावित हो रहा है, बल्कि ग्लेशियरों के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।

Contents
मौसमी चक्र में बदलाव: सिकुड़ रही हैं सर्दियांग्लेशियरों के भीतर बढ़ा तापमान: चौंकाने वाली रिसर्च3000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच रही है बारिशअर्थव्यवस्था पर चोट: कश्मीर की ओर मुड़ रहे पर्यटकनिष्कर्ष: हिमालय के भविष्य पर प्रश्नचिह्न

देहरादून/शिमला | दिसंबर और जनवरी का महीना, जो कभी हिमालयी राज्यों में भारी हिमपात (Snowfall) के लिए जाना जाता था, अब सूखा बीत रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय हिल स्टेशनों पर इस बार सैलानियों को निराशा हाथ लग रही है। जहाँ एक ओर जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में बर्फबारी देखी गई, वहीं उत्तराखंड और हिमाचल में आसमान साफ है। इस ‘ड्राई विंटर’ (शुष्क सर्दी) के पीछे वैज्ञानिक और पर्यावरणविद जलवायु परिवर्तन के खतरनाक संकेतों को जिम्मेदार मान रहे हैं।

मौसमी चक्र में बदलाव: सिकुड़ रही हैं सर्दियां

प्रसिद्ध पर्यावरणविद और प्रोफेसर एसपी सती के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में मौसमी चक्र में तेजी से बदलाव आया है। उनके विश्लेषण के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • सर्दियों का घटना: गर्मियों का सीजन लगातार लंबा हो रहा है और सर्दियों का समय सिकुड़ता जा रहा है।

  • स्नोफॉल का रेनफॉल में बदलना: जिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले बर्फ गिरती थी, वहां अब तापमान अधिक होने के कारण बारिश हो रही है।

  • पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और उसकी प्रकृति में आए बदलाव के कारण बर्फबारी के अनुकूल परिस्थितियां नहीं बन पा रही हैं।

ग्लेशियरों के भीतर बढ़ा तापमान: चौंकाने वाली रिसर्च

बर्फबारी न होने का सबसे भयावह असर ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान ने अपनी हालिया रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य साझा किए हैं:

  • पिंडारी ग्लेशियर का मामला: डॉ. चौहान ने बताया कि पिंडारी ग्लेशियर के भीतर की सतह का तापमान, जिसे शून्य से नीचे (Minus) होना चाहिए था, वह अब 1 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है।

  • बर्फ को जमने का समय नहीं: पहाड़ों पर अगर बर्फ गिर भी रही है, तो धरती और वायुमंडल का तापमान इतना बढ़ा हुआ है कि उस बर्फ को ग्लेशियर के रूप में जमने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

  • शिफ्टिंग रेट: स्नोफॉल पड़ने का शिफ्टिंग रेट अब 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गया है।

3000 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच रही है बारिश

जलवायु परिवर्तन का असर अब ऊंचाई की सीमाओं को भी पार कर रहा है। पहले जो बारिश 2500 मीटर की ऊंचाई तक सीमित रहती थी, वह अब 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हो रही है। इसका मतलब है कि अब ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में भी बर्फ के बजाय पानी गिर रहा है, जो ग्लेशियरों को तेजी से पिघलाने का काम कर रहा है।

प्रभाव का क्षेत्र वर्तमान स्थिति संभावित परिणाम
पर्यटन (Tourism) बर्फ न होने से पर्यटकों की संख्या में गिरावट स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान
कृषि (Horticulture) सेब और अन्य पहाड़ी फलों के लिए चिलिंग ऑवर की कमी फसल की गुणवत्ता और पैदावार में कमी
जल स्तर (Water Level) ग्लेशियरों का कम रिचार्ज होना गर्मियों में नदियों के सूखने का खतरा

अर्थव्यवस्था पर चोट: कश्मीर की ओर मुड़ रहे पर्यटक

उत्तराखंड के मसूरी, नैनीताल, औली और हिमाचल के शिमला-मनाली में बर्फबारी न होने के कारण पर्यटक अब अपना रुख जम्मू-कश्मीर की ओर कर रहे हैं। इससे होटल कारोबारियों और स्थानीय व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बर्फबारी का यही ट्रेंड रहा, तो विंटर टूरिज्म का पूरा मॉडल खतरे में पड़ सकता है।

निष्कर्ष: हिमालय के भविष्य पर प्रश्नचिह्न

हिमालय में बर्फबारी का न होना केवल एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल वार्मिंग की एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते उत्सर्जन पर नियंत्रण और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में ‘सफेद सोना’ (बर्फ) केवल किताबों और तस्वीरों तक सीमित रह जाएगा।

You Might Also Like

खुद को प्रधानमंत्री मोदी का करीबी बताकर ठगी करने वाले मोहम्मद कासिफ को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 1.10 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहत
New Delhi : Jagdeep Dhankhar was elected the next Vice President of the country, defeating Margaret Alva
भारत-कनाडा संबंधों में मजबूती के संकेत: NSA अजीत डोवल की ओटावा यात्रा से निकला सुरक्षा का नया फॉर्मूला
ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों के एडमिशन पर तत्काल रोक
“क्या वे भारत का नाम बदल देंगे, देश के साथ ये गद्दारी है” BJP सरकार पर भड़के केजरीवाल
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडपर्यटनफीचर्ड

‘हनुमान अंश’ के बाद कैंची धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब! वीकेंड पर 11 अक्टूबर तक ट्रैफिक प्लान लागू, भारी वाहनों की एंट्री बंद; जानें कहां होगी पार्किंग और किन रास्तों से गुजरेंगे वाहन

The Hill India News
The Hill India News
October 10, 2026
कैंसर से जंग लड़ रही महिला पर दोहरी मार! तिलवाड़ा में खुदाई से चार मंजिला मकान पर मंडराया खतरा, बेबस प्रभा सकलानी ने CM धामी से लगाई न्याय की गुहार
दून की बासमती पर कंक्रीट का कब्जा! कभी दुनिया में महक बिखेरने वाले धान के खेत सिमटे, अब 160 किसानों के भरोसे विरासत बचाने की जंग
देहरादून में महिला के अपहरण की साजिश, हरिद्वार में तमंचे के दम पर लूट! 5 हजार का इनामी ‘पंडित’ गिरफ्तार, चार आरोपियों के जुड़े तार
एशियन गेम्स में भारत का ‘गोल्डन’ आगाज, महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने रचा इतिहास; दक्षिण कोरिया को हराकर जीता स्वर्ण
कोटद्वार में ‘मोहम्मद’ दीपक की गिरफ्तारी से फिर गरमाया विवाद, दुकान में घुसकर बदसलूकी का आरोप; व्यापारियों ने कोतवाली में दिया धरना
गांधी-शास्त्री जयंती पर देशभर में गूंजा श्रद्धा और संकल्प का संदेश, राष्ट्रपति मुर्मू से PM मोदी तक ने दी श्रद्धांजलि
UPL क्लोजिंग से पहले गरमाया विवाद: मासूम शर्मा के शो के खिलाफ UKD का प्रदर्शन, स्टेडियम के बाहर नारेबाजी से बढ़ा सियासी पारा
हरिद्वार को बड़ी सौगात: अब यहीं तैयार होंगे MBBS डॉक्टर, ESI मेडिकल कॉलेज को मिली मंजूरी; 50 सीटों से होगी शुरुआत
‘एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा’ से ‘नारी अपने आप की’ तक, दिल्ली की सड़कों पर गूंजा Gen Z का गुस्सा; DU-JNU-जामिया की छात्राओं ने उठाए महिला सुरक्षा पर सवाल
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?